ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते हमलों के बावजूद फारस की खाड़ी से तेल की आपूर्ति में सुधार हुआ है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली कंपनी Kpler के आंकड़ों के अनुसार, 18 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में मध्य पूर्व से तेल का औसत प्रवाह रोजाना 2.4 करोड़ बैरल से अधिक रहा। यह युद्ध से पहले के लगभग 2.33 करोड़ बैरल प्रतिदिन के स्तर से ज्यादा है।
Persian Gulf Oil: तेल सप्लाई में कैसे आया सुधार?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, इसी रास्ते से तेल की आवाजाही, ओमान की खाड़ी में समुद्र के बीच होने वाले जहाज-से-जहाज हस्तांतरण समेत, औसतन लगभग 1.4 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही। यह युद्ध से पहले के स्तर का करीब 82 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि खतरे बने रहने के बावजूद तेल कंपनियां और जहाज संचालक सप्लाई जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं।
इस काम में अमेरिकी सुरक्षा सहायता और जहाजों के लिए बनाए गए वैकल्पिक संचालन तरीकों की भूमिका बताई जा रही है। कुछ टैंकर खाड़ी के अंदर से तेल लेकर होर्मुज पार करते हैं और फिर ओमान के पास दूसरे जहाजों में तेल स्थानांतरित करते हैं। कई बार जहाज अपने ट्रैकिंग सिग्नल बंद कर देते हैं, जिससे उनकी यात्रा और जोखिम भरी हो जाती है।
🛢️ खाड़ी से तेल सप्लाई: अहम आंकड़े
- मध्य पूर्व से तेल प्रवाह: रोजाना 2.4 करोड़ बैरल से अधिक
- युद्ध से पहले का स्तर: लगभग 2.33 करोड़ बैरल प्रतिदिन
- होर्मुज से आवाजाही: करीब 1.4 करोड़ बैरल प्रतिदिन
- युद्ध-पूर्व स्तर के मुकाबले: लगभग 82 प्रतिशत
- आंकड़ों का स्रोत: जहाज ट्रैकर Kpler
तेल के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की पाइपलाइनें भी तेल को ऐसे रास्तों से भेजने में मदद कर रही हैं, जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना जरूरी नहीं होता। Kpler के अनुमान के अनुसार, सितंबर में खाड़ी से बाहर भेजे गए गैर-ईरानी कच्चे तेल का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा जलडमरूमध्य को पार किए बिना दूसरे मार्गों से गया। युद्ध से पहले यह हिस्सा लगभग 17 प्रतिशत था।
इन वैकल्पिक मार्गों से जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होता। पाइपलाइनों की क्षमता सीमित है और समुद्री परिवहन अब भी वैश्विक ऊर्जा व्यापार का अहम हिस्सा है। अधिक जानकारी के लिए Kpler की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
Iran War के बीच जहाजों पर हमले और बढ़ता खतरा
तेल की आवाजाही में सुधार के बावजूद फारस की खाड़ी और होर्मुज के आसपास जहाजों पर हमले जारी हैं। रिपोर्ट में शामिल आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में इस क्षेत्र में जहाजों पर करीब 30 हमलों की सूचना मिली। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस महीने के हमले युद्ध के दौरान अब तक निशाना बनाए गए जहाजों का लगभग 20 प्रतिशत हैं।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स जहाजों को रोकने के लिए ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल कर रही है। छोटे मछली पकड़ने वाले जहाजों से निगरानी और हमले करने जैसी रणनीतियों से भी समुद्री यातायात पर दबाव बनाया जा सकता है। ऐसे हालात में टैंकरों को सुरक्षा इंतजामों के साथ यात्रा करनी पड़ रही है।
⚠️ तेल ढुलाई महंगी होने की वजह
- समुद्री जोखिम: टैंकरों पर हमले और सुरक्षा की जरूरत
- बीमा लागत: युद्ध जोखिम बीमा जहाज के मूल्य के 10 प्रतिशत तक पहुंचने की सूचना
- ढुलाई खर्च: खाड़ी से चीन जाने वाले सुपरटैंकर का भाड़ा लगभग 37.37 डॉलर प्रति बैरल
- कर्मचारियों का जोखिम: खतरनाक मार्गों पर जाने के लिए अतिरिक्त भुगतान
- संभावित असर: तेल की अंतिम कीमत और उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ सकता है
तेल की कीमतों पर क्यों बना हुआ है दबाव?
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत मंगलवार को लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। कारोबारियों को चिंता है कि होर्मुज से तेल की बढ़ी हुई आवाजाही लंबे समय तक कायम रहेगी या नहीं। अगर लड़ाई फिर तेज होती है, तो सप्लाई दोबारा प्रभावित हो सकती है। दुनिया भर में तेल का भंडार भी सीमित रहने से बाजार के पास अचानक आई रुकावटों से निपटने की गुंजाइश कम है।
जहाजों पर हमलों और बीमा लागत बढ़ने से तेल को बाजार तक पहुंचाना महंगा हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी से चीन जाने वाले बड़े तेल टैंकरों का भाड़ा इस सप्ताह लगभग 37.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। समुद्री सुरक्षा जोखिम के कारण बीमा खर्च भी बढ़ा है। ये अतिरिक्त लागतें अंततः तेल कारोबारियों, रिफाइनरियों और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकती हैं।
भारत और वैश्विक बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए खाड़ी से सप्लाई का लगातार जारी रहना अहम है। यदि तेल की आवाजाही बाधित होती है या जहाजों का खर्च बढ़ता है, तो आयात बिल और ईंधन की लागत पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर असर कई बातों पर निर्भर करता है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का भाव, रुपये की विनिमय दर, टैक्स और घरेलू मूल्य निर्धारण शामिल हैं।
फिलहाल, खाड़ी से तेल का प्रवाह युद्ध से पहले के कुल स्तर से ऊपर बताया जा रहा है, लेकिन होर्मुज से गुजरने वाली मात्रा अभी पुराने स्तर तक नहीं लौटी है। इसलिए सप्लाई में सुधार को संकट का अंत नहीं माना जा सकता। अगर हमले बढ़ते हैं, तो जहाजों की सुरक्षा, बीमा और ढुलाई की लागत फिर बढ़ सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई क्यों बढ़ी है?
जहाज संचालक सुरक्षा सहायता, कम दूरी की यात्राओं, समुद्र में जहाजों के बीच तेल हस्तांतरण और वैकल्पिक परिवहन मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। इन तरीकों से खतरे के बावजूद तेल की आवाजाही जारी रखने में मदद मिली है, हालांकि समुद्री जोखिम अभी भी बना हुआ है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह मध्य पूर्व के तेल और गैस को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने वाला प्रमुख समुद्री रास्ता है। इस मार्ग पर रुकावट आने से जहाजों को दूसरे रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं, जिससे यात्रा लंबी और महंगी हो सकती है तथा वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
3. क्या तेल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो गई है?
नहीं। मध्य पूर्व से कुल तेल प्रवाह युद्ध से पहले के स्तर से ऊपर बताया गया है, लेकिन होर्मुज से गुजरने वाली सप्लाई अभी युद्ध-पूर्व स्तर के लगभग 82 प्रतिशत पर थी। हमलों और सुरक्षा जोखिमों के कारण स्थिति बदल सकती है।
4. जहाजों पर हमलों से तेल महंगा कैसे होता है?
हमलों के खतरे से जहाजों का बीमा, सुरक्षा और माल ढुलाई खर्च बढ़ सकता है। कंपनियां इन अतिरिक्त लागतों को अपने कारोबार में शामिल करती हैं। यदि खर्च लगातार ऊंचा रहे, तो इसका असर रिफाइनरियों, तेल खरीदारों और अंततः ईंधन बाजार पर पड़ सकता है।
5. क्या इसका भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर होगा?
संभव है, लेकिन असर तय नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के साथ रुपये की दर, सरकारी टैक्स और घरेलू मूल्य निर्धारण भी महत्वपूर्ण हैं। केवल खाड़ी से तेल की सप्लाई बढ़ने या घटने के आधार पर खुदरा कीमतों का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
निष्कर्ष
फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई में सुधार हुआ है, लेकिन होर्मुज के आसपास हमलों और बढ़ती ढुलाई लागत ने जोखिम बनाए रखा है। भारत समेत तेल आयातक देशों के लिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि समुद्री मार्ग कितने सुरक्षित रहते हैं और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार किस दिशा में जाता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। तेल की कीमतें और आपूर्ति के आंकड़े बदल सकते हैं। निवेश संबंधी निर्णय से पहले स्वतंत्र जांच करें।
