प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme) को लेकर केंद्र सरकार ने अब अपना फोकस बदल दिया है। सरकार अब केवल युवाओं के रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़ाने के बजाय यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार वास्तव में इंटर्नशिप शुरू करें, समय पर स्टाइपेंड प्राप्त करें और सफलतापूर्वक इसे पूरा करें।
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme) के प्रदर्शन को मापने के लिए नए मानक तय किए हैं। यह फैसला योजना के पायलट चरण की समीक्षा के बाद लिया गया है। समीक्षा में सामने आया कि बड़ी संख्या में युवाओं ने आवेदन तो किए, लेकिन उनमें से बहुत कम लोग वास्तव में इंटर्नशिप शुरू कर पाए। इसी वजह से अब सरकार का ध्यान केवल रजिस्ट्रेशन बढ़ाने के बजाय इंटर्नशिप शुरू कराने, समय पर स्टाइपेंड देने और इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी कराने पर रहेगा।
PM Internship Scheme में सरकार ने तय किए नए प्रदर्शन लक्ष्य
📌 योजना के नए लक्ष्य
- पायलट चरण: दिसंबर 2026 तक बढ़ाया गया
- लक्ष्य: वास्तविक इंटर्नशिप पर जोर
- कंपनियां: 750 पात्र कंपनियों को जोड़ना
- इंटर्नशिप अवसर: 73,333 अवसर उपलब्ध कराना
- स्टाइपेंड: समय पर DBT के जरिए भुगतान
सरकार ने इस योजना के पायलट चरण को दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। अब वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नए प्रदर्शन लक्ष्य तय किए गए हैं, जिनमें वास्तविक परिणामों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार चाहती है कि योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा युवाओं को इंटर्नशिप मिले और वे उसे सफलतापूर्वक पूरा भी करें।
जानकारी के अनुसार, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) को 750 पात्र कंपनियों को इस योजना से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा 73,333 इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराने, इंटर्नों को हर महीने समय पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए स्टाइपेंड देने और इंटर्नशिप पूरी होने की 100 प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही पीएम इंटर्नशिप पोर्टल पर इंटर्नशिप पोस्ट करने वाली कंपनियों और उपलब्ध इंटर्नशिप की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का भी लक्ष्य तय किया गया है।
पायलट चरण में कम रही इंटर्नशिप जॉइन करने वालों की संख्या
पायलट चरण में कंपनियों ने करीब 1.32 लाख इंटर्नशिप ऑफर दिए थे। इनमें से लगभग 52,782 उम्मीदवारों ने ऑफर स्वीकार किए, लेकिन आखिर में केवल 16,060 उम्मीदवारों ने इंटर्नशिप जॉइन की। इसी अनुभव के आधार पर सरकार ने योजना के क्रियान्वयन पर ज्यादा जोर देने का फैसला किया है।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्य उस समय तय किए गए थे, जब सरकार को उम्मीद थी कि योजना का पूरा विस्तार शुरू हो जाएगा। इसलिए भाग लेने वाली कंपनियों का लक्ष्य 500 से बढ़ाकर 750 कर दिया गया। वहीं कुल 1.10 लाख इंटर्नशिप अवसरों के लक्ष्य को दो वित्त वर्षों में बांट दिया गया, जिसमें 36,667 अवसर वित्त वर्ष 2025-26 और 73,333 अवसर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित किए गए हैं।
💼 PM Internship Scheme के फायदे
- मासिक स्टाइपेंड: 9,000 रुपये
- एकमुश्त सहायता: इंटर्नशिप शुरू करने पर 6,000 रुपये
- लाभार्थी: योग्य युवा उम्मीदवार
- उद्देश्य: रोजगार योग्य कौशल विकसित करना
- फोकस: बेहतर इंटर्नशिप अनुभव
बजट में कम हुआ योजना का प्रावधान
सरकार ने योजना के पायलट चरण को व्यय वित्त समिति (EFC) की मंजूरी के बाद दिसंबर 2026 तक जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 4,788.45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 56 प्रतिशत कम है। इसकी एक वजह योजना को अब तक अपेक्षित प्रतिक्रिया न मिलना भी माना जा रहा है।
योजना के तीसरे चरण में पात्र कंपनियों का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब केवल देश की शीर्ष 500 कंपनियां ही नहीं, बल्कि CSR खर्च के आधार पर शीर्ष 2,000 कंपनियां, 1,000 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाली कंपनियां और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा नेटवर्थ रखने वाली कंपनियां भी इसमें भाग ले सकती हैं।
विशेषज्ञों ने नए मानकों को बताया सकारात्मक कदम
इस योजना के तहत चुने गए इंटर्नों को सरकार की ओर से हर महीने 9,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाता है। इसके अलावा इंटर्नशिप शुरू करने पर 6,000 रुपये की एकमुश्त सहायता राशि भी मिलती है। कुछ कंपनियां अपनी ओर से तय न्यूनतम राशि से अधिक स्टाइपेंड भी दे रही हैं।
इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की कार्यकारी निदेशक सुचित्रा दत्ता का कहना है कि इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप जैसी योजनाएं तब ज्यादा सफल होती हैं, जब उन्हें प्रोफेशनल स्टाफिंग कंपनियों की मदद से लागू किया जाता है। उनके अनुसार नए प्रदर्शन मानकों में केवल रजिस्ट्रेशन के बजाय वास्तविक इंटर्नशिप और उसके सफल समापन पर जोर देना सही दिशा में उठाया गया कदम है। इससे युवाओं के बीच ड्रॉपआउट कम होंगे और योजना के बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।
योजना के भविष्य को लेकर सरकार की तैयारी
लोकसभा में मार्च 2026 में दिए गए एक लिखित जवाब में कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया था कि योजना के पहले दो चरण पूरे हो चुके हैं और तीसरा चरण संशोधित दिशा-निर्देशों के साथ शुरू किया गया है। सरकार का कहना है कि फिलहाल योजना का पायलट चरण जारी है और इसके अनुभवों के आधार पर आगे पूरे देश में इसे लागू करने का फैसला किया जाएगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। योजना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए सरकारी पोर्टल देखें।