प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में विजयादशमी समारोह के दौरान रामराज्य को सुशासन का आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य लोगों की सेवा करना होना चाहिए। ऐसी व्यवस्था में हर नागरिक को न्याय और समान अवसर मिलें तथा गरीब और जरूरतमंद लोगों के कल्याण को प्राथमिकता दी जाए।
Ram Rajya को सुशासन का आदर्श बताया
नई दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि दशहरा सत्य की असत्य पर जीत और अत्याचार के अंत का प्रतीक है। उन्होंने विजयादशमी पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि देशभर में होने वाली रामलीलाएं भगवान राम के आदर्शों को जीवित रखती हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, रामराज्य ऐसी व्यवस्था का विचार है जिसमें किसी के साथ भेदभाव न हो। सभी लोगों को न्याय मिले और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि सत्ता का इस्तेमाल लोगों पर शासन करने के बजाय उनकी सेवा के लिए किया जाना चाहिए।
🕊️ रामराज्य और जनसेवा का संदेश
- मुख्य विचार: लोगों की सेवा करना
- सुशासन: सभी के लिए न्याय और समान अवसर
- प्राथमिकता: गरीब और वंचित लोगों का कल्याण
- नागरिक: नीतियों और फैसलों के केंद्र में जनता
आत्मनिर्भरता और मिलकर काम करने पर जोर
मोदी ने भगवान राम की लंका यात्रा और सेतु निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प और लोगों की भागीदारी से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने देश से अपनी क्षमताओं और संसाधनों पर भरोसा रखने तथा विकास की चुनौतियों का मिलकर सामना करने की अपील की।
उन्होंने राजनीतिक दलों और राष्ट्रीय संस्थाओं से देशहित में साथ काम करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज को बांटने और देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों का सामना सामूहिक प्रयास से किया जाना चाहिए।
🏛️ भारत की विरासत और आत्मनिर्भरता
- प्राचीन मूर्तियां: 650 से अधिक वापस लाई गईं
- समयावधि: पिछले 12 वर्षों में
- उद्देश्य: सांस्कृतिक धरोहर को लौटाना
- संदेश: अपनी पहचान और क्षमताओं पर विश्वास
650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत लौटीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई हैं। उनके मुताबिक, यह प्रयास देश की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित करने और भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विरासत किसी भी देश की पहचान और आत्मसम्मान का अहम हिस्सा होती है।
मोदी ने यह भी कहा कि विजयादशमी का संदेश भारत की दार्शनिक परंपराओं में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। उनका संबोधन सुशासन, जनसेवा, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित था। अधिक जानकारी के लिए मूल समाचार रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. पीएम मोदी ने रामराज्य को किस रूप में बताया?
उन्होंने रामराज्य को सुशासन का आदर्श बताया, जहां सभी नागरिकों को न्याय और समान अवसर मिलें। उनके अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों की सेवा करना और गरीब तथा वंचित वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता देना होना चाहिए।
2. दिल्ली में विजयादशमी समारोह कहां हुआ?
समारोह नई दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव मैदान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और दशहरे को सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक बताया।
3. मोदी ने लंका सेतु का उदाहरण क्यों दिया?
उन्होंने सेतु निर्माण का उल्लेख यह समझाने के लिए किया कि दृढ़ संकल्प और सामूहिक भागीदारी से कठिन काम भी पूरे किए जा सकते हैं। उन्होंने भारत से अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने और मिलकर विकास के लक्ष्य हासिल करने को कहा।
4. भारत कितनी प्राचीन मूर्तियां वापस लाया है?
प्रधानमंत्री के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई हैं। उन्होंने इसे देश की सांस्कृतिक धरोहर को लौटाने और भारतीय सांस्कृतिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास से जोड़ा।
5. पीएम मोदी ने शासन और नागरिकों को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि नागरिकों को नीतियां बनाने के केंद्र में रखा जाना चाहिए और सार्वजनिक सेवा को जिम्मेदारी माना जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों और राष्ट्रीय संस्थाओं से भी देश के हित में मिलकर काम करने की अपील की।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री के विजयादशमी संबोधन में जनसेवा, समानता, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विरासत प्रमुख विषय रहे। उन्होंने रामराज्य को ऐसे शासन के रूप में पेश किया जिसमें नागरिकों का कल्याण प्राथमिक हो। उन्होंने कठिन लक्ष्यों के लिए सामूहिक प्रयास और देश की क्षमताओं पर भरोसे का संदेश दिया।
डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है। वक्तव्य और आंकड़े संबंधित स्रोत के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं।
