भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने चिंता जताई है। उन्होंने भारत में मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने से जुड़ी खबरों पर सवाल उठाए हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों के मतदान के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में विपक्षी दल और छात्र संगठन इस प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।
मतदाता सूची विवाद पर प्रमिला जयपाल ने जताई चिंता
वाशिंगटन राज्य के सातवें संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमिला जयपाल ने भारत में हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन किया है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए। उन्होंने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में मतदान के अधिकारों को लेकर चल रही बहस से भी की। उनके अनुसार, लोकतंत्र की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण विरोध और नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय और अमेरिकी नागरिकों को निष्पक्ष चुनाव का अधिकार मिलना चाहिए।
मतदाता सूची विवाद की प्रमुख बातें
- प्रमिला जयपाल ने भारत में मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर चिंता जताई है।
- विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं।
- चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान मसौदा मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए।
- नाम छूटने वाले योग्य मतदाताओं के लिए दावा और आपत्ति की प्रक्रिया उपलब्ध है।
विशेष गहन पुनरीक्षण पर विपक्ष के सवाल
भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में भी इस मामले को लेकर प्रदर्शन हुआ था, जिसमें हजारों लोगों के शामिल होने की खबर सामने आई थी। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए।
चुनाव आयोग की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण के पहले और दूसरे चरण में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से लगभग 7.2 करोड़ नाम हटाए गए थे। तीसरे चरण में 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूचियां जारी होने के बाद हटाए गए नामों की संख्या लगभग 6.16 करोड़ बताई गई। आयोग ने यह भी कहा है कि यदि किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से सूची में शामिल नहीं हो पाया है, तो वह दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 भी भरा जा सकता है।
मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर क्या करें?
- निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर अपना नाम जांचें।
- नाम शामिल कराने के लिए लागू प्रक्रिया और पात्रता की जानकारी लें।
- आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित आवेदन जमा करें।
- आवेदन की स्थिति और संबंधित निर्वाचन अधिकारी से मिलने वाले निर्देशों पर ध्यान दें।
प्रमिला जयपाल का जन्म और शिक्षा
प्रमिला जयपाल का जन्म 21 सितंबर 1965 को चेन्नई में हुआ था। वह मलयाली नायर परिवार से संबंध रखती हैं। उनकी मां माया जयपाल लेखिका थीं, जबकि उनके पिता मुदुवंगड पुथनवीतिल जयपाल विपणन के क्षेत्र में काम करते थे। उनका बचपन भारत, इंडोनेशिया और सिंगापुर में बीता। 16 वर्ष की उम्र में वह पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गईं। उन्होंने जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय से व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
राजनीति में आने से पहले सामाजिक क्षेत्र में काम
राजनीति में आने से पहले जयपाल ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में काम किया। उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य और विकास से जुड़े विषयों पर लगभग दो दशक तक काम किया। वह अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था प्रोग्राम फॉर अप्रोप्रियेट टेक्नोलॉजी इन हेल्थ से भी लंबे समय तक जुड़ी रहीं। इसके अलावा, उन्होंने वाशिंगटन राज्य में प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन वनअमेरिका की स्थापना की और लगभग 12 वर्षों तक इसकी कार्यकारी निदेशक रहीं।
प्रमिला जयपाल की किताबें
जयपाल ने वर्ष 2000 में अपनी पहली पुस्तक प्रकाशित की, जिसका नाम पिलग्रिमेज टू इंडिया: अ वुमन रीविजिट्स हर होमलैंड है। इसके बाद उन्होंने राजनीति और सामाजिक बदलाव से संबंधित दूसरी पुस्तक भी लिखी, जिसका नाम यूज द पावर यू हैव: अ ब्राउन वुमन्स गाइड टू पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल चेंज है। इन पुस्तकों में उनके अनुभवों और सामाजिक तथा राजनीतिक भागीदारी से जुड़े विचारों को जगह दी गई है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में प्रमिला जयपाल की भूमिका
वर्ष 2016 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने जाने के बाद जयपाल ने वाशिंगटन राज्य के सातवें संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में चुनी जाने वाली दक्षिण एशियाई मूल की पहली महिला बनीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह वर्तमान में अपना पांचवां कार्यकाल पूरा कर रही हैं और 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में छठे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। इस चुनाव में उनका मुकाबला भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवार निरव शेठ से है, जिनका जन्म और पालन-पोषण गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था।
आव्रजन, विदेश नीति और नागरिक अधिकारों पर काम
अमेरिकी कांग्रेस में जयपाल आव्रजन, विदेश नीति और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करती हैं। वह प्रतिनिधि सभा की न्यायिक समिति की सदस्य हैं और आव्रजन से संबंधित उपसमिति में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा, वह विदेश मामलों की समिति में भी शामिल हैं, जहां अफ्रीका तथा दक्षिण और मध्य एशिया से जुड़े विषयों पर काम करती हैं। वह कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस की पूर्व अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और एशियाई तथा प्रशांत क्षेत्र के समुदायों से जुड़े राजनीतिक समूहों में जिम्मेदारी निभाती हैं।
आव्रजन नीति के मामले में जयपाल ने परिवारों को अलग करने जैसी नीतियों का विरोध किया है। उन्होंने अमेरिका में आव्रजन व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष और मानवीय बनाने के लिए कानून बनाने की पहल में भी भाग लिया है। इसके अलावा, उन्होंने थ्राइव एक्ट सहित स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने वाले विधायी प्रयासों का समर्थन किया है। भारत में मतदाता सूची को लेकर दिए गए उनके बयान ने एक बार फिर चुनावी अधिकारों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और नागरिकों की भागीदारी से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।
मतदाता सूची, नाम की जांच और पंजीकरण से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर जा सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रमिला जयपाल के बयान ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मतदान के अधिकारों को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। इस मुद्दे पर विपक्ष की आपत्तियों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी को समझना जरूरी है। मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति आधिकारिक पोर्टल पर जांचनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. प्रमिला जयपाल ने भारत में मतदाता सूची विवाद पर क्या कहा?
प्रमिला जयपाल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी खबरों पर चिंता जताई और मतदान के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तथा शांतिपूर्ण विरोध के महत्व की बात कही।
2. भारत में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाताओं के विवरण की समीक्षा की जाती है और मसौदा सूची में बदलाव किए जा सकते हैं।
3. मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने का क्या मतलब है?
यह आंकड़ा पुनरीक्षण के दौरान मसौदा मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों से जुड़ा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी नाम योग्य मतदाताओं के गलत तरीके से हटाए जाने के कारण हटे हैं।
4. मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने पर क्या किया जा सकता है?
यदि किसी योग्य मतदाता का नाम सूची में नहीं मिलता है, तो वह निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर लागू प्रक्रिया की जानकारी लेकर आवश्यक आवेदन जमा कर सकता है। संबंधित निर्वाचन अधिकारी से भी सहायता ली जा सकती है।
5. प्रमिला जयपाल अमेरिकी राजनीति में किस भूमिका में हैं?
प्रमिला जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वाशिंगटन राज्य के सातवें संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। वह आव्रजन, विदेश नीति और नागरिक अधिकारों सहित विभिन्न मुद्दों पर काम करती हैं।
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यह लेख समाचार संबंधी जानकारी पर आधारित है। राजनीतिक दावों और आंकड़ों में बदलाव या विवाद संभव है। अद्यतन विवरण के लिए आधिकारिक स्रोतों की जांच करें।

