Rajasthan Crop Insurance से जुड़ी 30 अक्टूबर 2026 की खबर किसानों के लिए अहम है। राजस्थान सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के तहत लंबित बीमा दावों के भुगतान के लिए करीब ₹345 करोड़ जारी किए हैं। राज्य सरकार के अनुसार यह राशि नौ जिलों के पात्र किसानों तक पहुंचाई गई है। इसमें पश्चिमी राजस्थान के सूखा प्रभावित किसानों को बड़ा हिस्सा मिला है। यह भुगतान उन किसानों को राहत दे सकता है जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा, सूखे या खराब मौसम से प्रभावित हुई थी और जिनके बीमा दावे लंबे समय से लंबित थे।
Rajasthan Crop Insurance में क्या हुआ?
ETGovernment की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग ₹345 करोड़ के लंबित दावों का भुगतान किया है। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्राकृतिक आपदा, सूखा और प्रतिकूल मौसम से फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिले। यह राशि राज्य के नौ जिलों के पात्र किसानों के दावों से जुड़ी है।
🌾 Rajasthan Crop Insurance Update
- भुगतान की खबर: 30 अक्टूबर 2026
- कुल लंबित दावे: करीब ₹345 करोड़
- योजना: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- जिले: 9
- पश्चिमी राजस्थान का हिस्सा: करीब ₹318 करोड़
- कवर अवधि: Rabi 2025-26 सहित अलग-अलग लंबित दावे
- मुख्य उद्देश्य: पात्र किसानों को फसल नुकसान की राहत
किन जिलों के किसानों को मिला भुगतान?
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार भुगतान जयपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, पाली, सिरोही, चूरू, जालौर और डूंगरपुर जिलों के पात्र किसानों से संबंधित है। कुल राशि में से करीब ₹318 करोड़ पश्चिमी राजस्थान के उन किसानों को दिए गए हैं जिन्हें Rabi 2025-26 सीजन में सूखे का सामना करना पड़ा था। भुगतान अधिसूचित बीमा कंपनियों के माध्यम से किया गया। इनमें Agriculture Insurance Company of India Limited और Reliance General Insurance Company Limited शामिल हैं।
जिला स्तर पर दिए गए आंकड़ों के अनुसार बाड़मेर के किसानों को ₹53.60 करोड़, बीकानेर को ₹116 करोड़, जोधपुर को ₹48 करोड़, पाली को ₹31 करोड़, चूरू को ₹25.85 करोड़ और जालौर को ₹43.58 करोड़ मिले। ये रकम अलग-अलग दावों के आधार पर दी गई हैं। किसी किसान को कितनी राशि मिलेगी, यह उसकी बीमित फसल, क्षेत्र, नुकसान के आकलन और योजना के नियमों पर निर्भर करेगा।
लंबित दावों के निपटारे में शिकायत समिति की भूमिका
कुल भुगतान में ₹17.60 करोड़ ऐसे लंबित दावों से जुड़े हैं जिन पर राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति ने निर्णय लिया। रिपोर्ट के अनुसार समिति ने Reliance General Insurance Company Limited की कुछ आपत्तियों को खारिज करते हुए डूंगरपुर और जालौर में भुगतान का निर्देश दिया। जालौर में Kharif 2024 के लंबित दावों के लिए ₹10.64 करोड़ और डूंगरपुर में Kharif 2025 के लिए ₹6.96 करोड़ किसानों के बैंक खातों में जमा किए गए।
📋 भुगतान से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े
- बाड़मेर: ₹53.60 करोड़
- बीकानेर: ₹116 करोड़
- जोधपुर: ₹48 करोड़
- पाली: ₹31 करोड़
- चूरू: ₹25.85 करोड़
- जालौर: ₹43.58 करोड़
- जालौर Kharif 2024 लंबित दावा: ₹10.64 करोड़
- डूंगरपुर Kharif 2025 लंबित दावा: ₹6.96 करोड़
जयपुर के Dudu क्षेत्र में भी दावा निपटाया गया
रिपोर्ट में जयपुर जिले की दूदू तहसील के पात्र किसानों को Kharif 2025 के लिए ₹9.50 करोड़ दिए जाने की जानकारी भी दी गई है। इन दावों में देरी का कारण कुछ बीमा इकाइयों में निर्धारित संख्या में crop-cutting experiments यानी फसल कटाई प्रयोग नहीं हो पाना था। ऐसे प्रयोगों के जरिए खेतों में फसल की वास्तविक पैदावार का आकलन किया जाता है। जब तय प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, तो बीमा दावे के निपटारे में देरी हो सकती है।
इस मामले में Agriculture Insurance Company of India Limited के माध्यम से उच्च औसत उपज के आधार पर भुगतान किया गया। फसल कटाई प्रयोग का उद्देश्य केवल किसी एक खेत की उपज देखना नहीं होता, बल्कि अधिसूचित क्षेत्र में फसल उत्पादन का मानक आकलन करना होता है। इसलिए किसानों को यह समझना चाहिए कि बीमा भुगतान में गांव, बीमा इकाई और अधिसूचित फसल के नियम महत्वपूर्ण होते हैं।
किसानों को बीमा भुगतान की जानकारी कैसे जांचनी चाहिए?
यदि किसान ने PMFBY के तहत बीमा कराया है और दावा लंबित है, तो उसे सबसे पहले पॉलिसी या आवेदन से जुड़ी जानकारी देखनी चाहिए। बैंक खाते में दर्ज नाम, आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक खाता संख्या, फसल का विवरण और बीमा आवेदन की रसीद सही होनी चाहिए। किसी भी गलती से भुगतान में देरी हो सकती है। किसान अपने बैंक खाते का विवरण और मोबाइल पर आए आधिकारिक संदेश भी जांच सकते हैं।
दावे की स्थिति जानने के लिए किसान योजना के आधिकारिक पोर्टल या कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। यदि भुगतान नहीं आया है, तो आवेदन संख्या और उपलब्ध दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। किसी अनजान व्यक्ति को OTP, बैंक PIN या पासवर्ड नहीं देना चाहिए। बीमा राशि जारी होने के नाम पर पैसे मांगने वाले संदेशों और फोन कॉल से सावधान रहना चाहिए।
कृषि से जुड़े दुकानदारों और ग्रामीण सेवा केंद्रों को बिल और लेनदेन का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के लिए thermal billing printer उपयोगी हो सकता है। जरूरत के अनुसार 80mm Thermal Receipt Printer जैसे उत्पाद देखे जा सकते हैं। यह किसानों के बीमा भुगतान की शर्त नहीं है, बल्कि दुकानों और सेवा केंद्रों के लिए एक वैकल्पिक उपकरण है।
PMFBY में दावा पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
किसान को फसल बीमा की अंतिम तारीख, अधिसूचित फसल, क्षेत्र और बीमा कंपनी की जानकारी समय पर जांचनी चाहिए। नुकसान होने पर योजना के नियमों के अनुसार तय समय में सूचना देना जरूरी हो सकता है। अलग-अलग प्रकार के नुकसान के लिए सूचना देने की प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए केवल सोशल मीडिया की जानकारी पर भरोसा न करें और कृषि विभाग या योजना के आधिकारिक निर्देश देखें।
आगे सरकार की प्राथमिकता क्या होगी?
कृषि मंत्री ने कहा है कि कृषि विभाग लंबित दावों की समीक्षा कर रहा है और किसानों की शिकायतों को सुलझाने के लिए बीमा कंपनियों से समन्वय किया जा रहा है। आने वाले समय में बाकी पात्र दावों की स्थिति और भुगतान प्रक्रिया पर नजर रहेगी। किसानों के लिए समय पर सहायता जरूरी है क्योंकि अगली बुवाई, बीज, खाद, सिंचाई और घरेलू खर्च के लिए उन्हें नकदी की जरूरत होती है।
फसल बीमा के नियम, पात्रता और आवेदन की जानकारी के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आधिकारिक पोर्टल को देखना चाहिए। भुगतान की खबर का मूल विवरण ETGovernment की रिपोर्ट में उपलब्ध है।
राजस्थान सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब ₹345 करोड़ के लंबित दावों का भुगतान किया है। यह राशि नौ जिलों के पात्र किसानों से जुड़ी है। व्यक्तिगत भुगतान किसान की पात्रता और स्वीकृत दावे पर निर्भर करता है।
रिपोर्ट में जयपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, पाली, सिरोही, चूरू, जालौर और डूंगरपुर जिलों का उल्लेख है। भुगतान केवल पात्र किसानों के दावों के लिए है। हर जिले के सभी किसानों को समान राशि नहीं मिलेगी।
कुल भुगतान में से करीब ₹318 करोड़ पश्चिमी राजस्थान के सूखा प्रभावित किसानों को दिए गए हैं। यह राशि Rabi 2025-26 सीजन के दावों से संबंधित है। भुगतान अधिसूचित बीमा कंपनियों के माध्यम से किया गया।
किसान योजना के आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं या स्थानीय कृषि कार्यालय और बीमा कंपनी से संपर्क कर सकते हैं। आवेदन संख्या, बैंक विवरण और बीमा दस्तावेज साथ रखने से शिकायत का समाधान आसान हो सकता है।
नहीं, भुगतान योजना की शर्तों, अधिसूचित फसल, बीमा क्षेत्र और नुकसान के आकलन पर निर्भर करता है। किसान को समय पर सूचना और सही दस्तावेज देने होते हैं। पात्रता पूरी होने पर ही दावा स्वीकृत किया जा सकता है।
निष्कर्ष
राजस्थान में ₹345 करोड़ का भुगतान लंबित फसल बीमा दावों के निपटारे की दिशा में अहम कदम है। किसानों को अपने आवेदन, बैंक विवरण और दावे की स्थिति जांचते रहना चाहिए, ताकि पात्र सहायता समय पर मिल सके।
Disclaimer: यह लेख प्रकाशित सरकारी जानकारी पर आधारित है। व्यक्तिगत दावे की पुष्टि के लिए कृषि विभाग या आधिकारिक PMFBY पोर्टल से संपर्क करें।