रांची विश्वविद्यालय के नए कुलपति के रूप में डॉ. सरोज शर्मा की नियुक्ति को लेकर झारखंड में विवाद गहरा गया है। आदिवासी छात्र संघ ने राज्यपाल से मुलाकात कर नियुक्ति रद्द करने की मांग उठाई है।
रांची विश्वविद्यालय (RU) के कुलपति के रूप में डॉ. सरोज शर्मा के हालिया चयन ने झारखंड के शैक्षणिक और सामाजिक हलकों में विरोध प्रदर्शनों को और तेज़ कर दिया है।
रांची विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति पर विवाद
महामहिम राज्यपाल और कुलाधिपति ने आज राजभवन में आदिवासी छात्र संघ (ACS) के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जहाँ उन्होंने ऐसे सबूत पेश किए जिनमें इस नियुक्ति को तत्काल रद्द करने की मांग की गई थी।
⚖️ कुलपति नियुक्ति विवाद की मुख्य बातें
- विश्वविद्यालय: रांची विश्वविद्यालय (RU)
- नियुक्ति: डॉ. सरोज शर्मा को कुलपति बनाया गया
- विरोध: आदिवासी छात्र संघ (ACS) का प्रदर्शन
- मांग: नियुक्ति तत्काल रद्द करने की अपील
- स्थान: राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात
- आरोप: गंभीर आपराधिक मामले का हवाला
डॉ. सरोज शर्मा पर गंभीर आरोप
गंभीर आपराधिक मामला: प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सूचित किया कि डॉ. सरोज शर्मा के खिलाफ दिल्ली के बादली पुलिस स्टेशन में केस नंबर 863/2024 के तहत मुकदमा चल रहा है।
धाराएँ: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, दोनों के तहत उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मुकदमा NIOS में एक दलित कर्मचारी (ड्राइवर) के साथ हुए दुर्व्यवहार और उसके बाद उसकी आत्महत्या से संबंधित है।
सामाजिक न्याय और नियुक्ति पर सवाल
संघ ने तर्क दिया कि जिस राज्य में बहुसंख्यक आबादी आदिवासियों और दलितों की है, वहाँ ऐसे किसी “दागी” व्यक्ति को कुलपति के पद पर नियुक्त करना सामाजिक न्याय के आदर्शों का अपमान है।
📢 छात्र संघ की प्रमुख मांगें
- मुख्य मांग: कुलपति नियुक्ति तत्काल रद्द हो
- आरोप: SC/ST एक्ट और IPC की गंभीर धाराएँ
- दस्तावेज़: समाचार कतरनें और केस रिकॉर्ड सौंपे गए
- तर्क: सामाजिक न्याय के खिलाफ नियुक्ति
- चिंता: विश्वविद्यालय की छवि पर असर
- अपील: योग्य और निष्पक्ष व्यक्ति की नियुक्ति
राज्यपाल को सौंपे गए दस्तावेज़
छात्र संघ ने राज्यपाल को विभिन्न समाचार पत्रों की कतरनें और दस्तावेज़ दिखाए, जिनमें कुलपति के विवादित अतीत और उनकी पिछली नियुक्तियों को रद्द किए जाने का विवरण था। संघ ने महामहिम से आग्रह किया कि आरोपी व्यक्ति राज्य के सबसे बड़े विश्वविद्यालय के प्रमुख के रूप में कार्य करने के लिए सर्वथा अयोग्य है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और विभिन्न पक्षों के बयानों पर आधारित है। मामले से संबंधित अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और न्यायिक संस्थाओं द्वारा लिया जाएगा।