कर्नाटक के कूर्ग में स्थित परिवार के 100 साल से भी पुराने कॉफी बागान को नया कारोबार बनाने के लिए रिश्विन देवाया ने अपनी नौकरी छोड़ दी। उन्होंने परिवार की कॉफी को केवल थोक व्यापारियों और निर्यातकों को बेचने के बजाय सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने का फैसला किया। उनके ब्रांड Riverside Coffee की सालाना कमाई अब करीब ₹2 करोड़ बताई गई है और कारोबार साल-दर-साल लगभग 30 प्रतिशत बढ़ रहा है।
Riverside Coffee की शुरुआत 1898 में हुई
इस परिवार का कॉफी बागान साल 1898 से जुड़ा है। देवाया के परदादा के परदादा परिवार की बड़ी जमीन के एक हिस्से में धान के खेतों की देखभाल करने आए थे। बाद में परिवार में मतभेद के कारण वे संपत्ति के दूर वाले हिस्से में रहने लगे। कई पीढ़ियों से चला आ रहा यह बागान आज नए तरीके से कारोबार करने की कोशिश कर रहा है।
देवाया ने पहले वाइन उद्योग में काम किया था। वहाँ उन्होंने देखा कि किसान और उत्पादक अपनी उपज के नाम से ब्रांड बना सकते हैं और अंतिम ग्राहक तक पहुँच सकते हैं। इसी अनुभव से उन्हें लगा कि परिवार की कॉफी के साथ भी ऐसा किया जा सकता है।
☕ Riverside Coffee कारोबार की मुख्य बातें
- शुरुआत: 1898 में पारिवारिक कॉफी एस्टेट
- स्थान: कूर्ग, कर्नाटक
- सालाना राजस्व: लगभग ₹2 करोड़
- विकास: सालाना करीब 30 प्रतिशत
- कारोबार: कॉफी की बिक्री, थोक आपूर्ति, कैफे और एस्टेट अनुभव
खेती से लेकर बिक्री तक अपना नियंत्रण
देवाया का लक्ष्य सिर्फ कॉफी उगाना नहीं था। वे उसकी प्रोसेसिंग, रोस्टिंग, ब्रांडिंग और बिक्री में भी हिस्सा लेना चाहते थे। इस तरीके को एस्टेट-टू-कप मॉडल कहा जा सकता है, जिसमें कॉफी बागान से तैयार पेय तक की प्रक्रिया को एक ही कारोबार से जोड़ने की कोशिश होती है।
इस बदलाव में खर्च और जोखिम दोनों थे। नई मशीनों, प्रोसेसिंग व्यवस्था और मार्केटिंग के लिए निवेश करना जरूरी था, जबकि यह तय नहीं था कि ग्राहक कितनी कॉफी खरीदेंगे। परिवार पहले कॉफी बेचकर होने वाली कमाई का अनुमान लगा सकता था, लेकिन नया ब्रांड बनाने में नतीजे का भरोसा कम था।
ग्राहकों को कॉफी समझाना भी जरूरी
Riverside Coffee अब सीधे ग्राहकों को बेचने के साथ थोक बिक्री, ऑनलाइन खुदरा कारोबार और बागान में कैफे व आगंतुकों के अनुभव भी उपलब्ध कराता है। अलग-अलग कैफे और ग्राहकों की पसंद, बजट, मशीनों और कॉफी बनाने के तरीकों में अंतर होता है। इसलिए सिर्फ प्रचार करना पर्याप्त नहीं है।
कॉफी का स्वाद इस्तेमाल की गई मशीन, पीसने के आकार, पानी, मात्रा और बनाने के तरीके से बदल सकता है। इसी वजह से कंपनी ग्राहकों को कॉफी की किस्मों, स्वाद और उसे सही तरीके से बनाने के बारे में जानकारी देने पर ध्यान देती है। Arabica और Robusta के साथ Excelsa किस्म को भी एक सैंपल पैक में शामिल किया गया है।
🌱 कारोबार की कमाई और आगे की चुनौतियाँ
- कॉफी बिक्री: मासिक राजस्व का लगभग 58 प्रतिशत सीधे कॉफी की बिक्री से
- अन्य माध्यम: करीब 42 प्रतिशत थोक, खुदरा, कैफे और एस्टेट अनुभव सहित अन्य स्रोतों से
- ऑनलाइन बिक्री: रिपोर्ट में अलग से लगभग 17 प्रतिशत का उल्लेख
- मुख्य जोखिम: बारिश, गर्मी और मौसम के बदलते चक्र
- आगे की योजना: नए भौतिक केंद्र खोलने के बजाय मार्केटिंग और वितरण में निवेश
मौसम में बदलाव से कॉफी की खेती प्रभावित
कॉफी की फसल मौसम के प्रति संवेदनशील होती है। देवाया के मुताबिक, इस साल बागान में बारिश कम हुई, जबकि पिछले साल परिस्थितियाँ लगभग सही थीं और उससे पहले जरूरत से ज्यादा बारिश हुई थी। बारिश, गर्मी और धूप में बदलाव फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।
उनकी चिंता सिर्फ तापमान बढ़ने को लेकर नहीं है। पहले किसान जिन मौसमों और समय पर भरोसा कर सकते थे, अब वे कम अनुमानित होते जा रहे हैं। फिलहाल Riverside Coffee नए स्थान खोलने के बजाय मार्केटिंग और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहता है।
इस खबर की मूल रिपोर्ट LiveMint में प्रकाशित जानकारी पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Riverside Coffee क्या है?
Riverside Coffee कर्नाटक के कूर्ग में स्थित एक पारिवारिक कॉफी बागान से जुड़ा ब्रांड है। यह कॉफी उगाने के साथ उसकी प्रोसेसिंग, रोस्टिंग, ब्रांडिंग और बिक्री पर भी ध्यान देता है, ताकि उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुँच सके।
2. Riverside Coffee की सालाना कमाई कितनी है?
रिपोर्ट के अनुसार, Riverside Coffee का सालाना राजस्व करीब ₹2 करोड़ है। कारोबार में साल-दर-साल लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि बताई गई है। ये आँकड़े रिपोर्ट में दिए गए हैं और भविष्य की कमाई की गारंटी नहीं हैं।
3. रिश्विन देवाया ने नौकरी क्यों छोड़ी?
देवाया अपने परिवार के पुराने कॉफी कारोबार को नया रूप देना चाहते थे। वाइन उद्योग में काम करते हुए उन्होंने देखा कि उत्पादक अपनी उपज का ब्रांड बनाकर ग्राहकों को सीधे बेच सकते हैं। उन्होंने यही तरीका पारिवारिक कॉफी व्यवसाय में अपनाने की कोशिश की।
4. एस्टेट-टू-कप मॉडल का क्या मतलब है?
एस्टेट-टू-कप मॉडल में कॉफी बागान से लेकर तैयार उत्पाद की बिक्री तक कई चरण एक ही कारोबार के अंतर्गत लाने की कोशिश की जाती है। इसमें खेती, प्रोसेसिंग, रोस्टिंग, पैकिंग, ब्रांडिंग और ग्राहक तक पहुँच शामिल हो सकते हैं।
5. मौसम में बदलाव कॉफी उत्पादकों के लिए चुनौती क्यों है?
कॉफी की फसल बारिश, गर्मी, धूप और मौसम के समय पर निर्भर करती है। बहुत ज्यादा या कम बारिश उत्पादन और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। मौसम का अनुमान कठिन होने से किसानों के लिए फसल और कारोबार की योजना बनाना भी मुश्किल हो जाता है।
निष्कर्ष
Riverside Coffee की कहानी दिखाती है कि पारिवारिक खेती को ब्रांड और सीधे ग्राहक बिक्री से नया अवसर मिल सकता है। हालांकि, निवेश, ग्राहक की पसंद और बदलते मौसम जैसी चुनौतियाँ बनी रहती हैं। लंबे समय की सफलता के लिए गुणवत्ता, जानकारी और भरोसेमंद वितरण जरूरी हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। राजस्व और विकास के आँकड़े रिपोर्ट में बताए गए हैं; इन्हें भविष्य की कमाई की गारंटी न समझें।

