कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय रुपये में बड़ी मजबूती की संभावना फिलहाल सीमित बनी हुई है।
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद भारतीय रुपये में बड़ी मजबूती आने की संभावना कम है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि निकट भविष्य में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 से 96 के दायरे में ही कारोबार कर सकता है। इसके बाद मार्च 2027 तक इसमें धीरे-धीरे कमजोरी आ सकती है और यह करीब 96.5 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है।
कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद रुपये पर सीमित असर
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतें काफी नीचे आ गई हैं। युद्ध के दौरान मई में कच्चे तेल का भाव 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो बाद में घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल रह गया। हालांकि, इसके बावजूद अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सिर्फ तेल सस्ता होने से रुपये में स्थायी मजबूती नहीं आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी पूंजी के रूप में आने वाले अतिरिक्त डॉलर का बड़ा हिस्सा अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में जोड़ सकता है। ऐसे में बाजार में डॉलर की आपूर्ति बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगी और रुपये को मजबूत होने का सीमित ही फायदा मिलेगा।
💵 रुपये पर प्रमुख अनुमान
- निकट अवधि: ₹94–₹96 प्रति डॉलर
- मार्च 2027 अनुमान: ₹96.5 प्रति डॉलर तक
- मुख्य कारण: RBI की फॉरेक्स रणनीति
- तेल कीमत: 114 डॉलर से घटकर लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल
- निष्कर्ष: केवल सस्ता तेल रुपये को मजबूत नहीं करेगा
RBI की रणनीति पर टिकी नजर
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि फिलहाल 94.5 से 95.5 प्रति डॉलर का स्तर रुपये के लिए संतुलित माना जा सकता है। उनके अनुसार, आरबीआई द्वारा विदेशी मुद्रा अनिवासी (FCNR) जमा को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों से बाजार में डॉलर की उपलब्धता बहुत अधिक नहीं बढ़ेगी, क्योंकि आने वाले डॉलर का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा भंडार में रखा जाएगा।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता का भी मानना है कि आरबीआई अतिरिक्त डॉलर का उपयोग विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और पहले से किए गए फॉरवर्ड सौदों को पूरा करने में करेगा। उनके अनुसार, निकट अवधि में रुपया थोड़ा मजबूत होकर 94.5 तक आ सकता है, लेकिन इसके बाद मार्च 2027 तक धीरे-धीरे 96.5 प्रति डॉलर तक कमजोर होने की संभावना है।
📊 अर्थशास्त्रियों की राय
- मदन सबनवीस: ₹94.5–₹95.5 संतुलित स्तर
- गौरा सेनगुप्ता: मार्च 2027 तक ₹96.5 संभव
- उपासना भारद्वाज: ₹95–₹96 का दायरा
- अनुभूति सहाय: ₹96 प्रति डॉलर का अनुमान
- समीर नारंग: ₹93–₹95 प्रति डॉलर की संभावना
अलग-अलग विशेषज्ञों के अनुमान
कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज का कहना है कि आरबीआई के हालिया कदमों से रुपये में बड़ी गिरावट का जोखिम कम हुआ है, लेकिन इससे इसकी लंबी अवधि की दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। उनके मुताबिक, मार्च 2027 तक रुपया 95 से 96 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय ने भी मार्च 2027 तक 96 रुपये प्रति डॉलर का अनुमान बरकरार रखा है। उनका कहना है कि एफसीएनआर के जरिए आने वाली विदेशी पूंजी से निकट अवधि में रुपये को कुछ समर्थन मिल सकता है, लेकिन कुछ महीनों बाद इसका असर कम होने पर फिर से कमजोरी का दबाव बन सकता है।
वहीं, आईसीआईसीआई बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री समीर नारंग का नजरिया अपेक्षाकृत सकारात्मक है। उनका मानना है कि एशिया की कई अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपया अभी काफी स्थिर है। उनके अनुसार, मार्च 2027 तक रुपया 93 से 95 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है।
आगे क्या रह सकती है रुपये की दिशा
कुल मिलाकर, विशेषज्ञों की राय है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन केवल इसी वजह से रुपये में बड़ी मजबूती आने की संभावना नहीं है। आरबीआई की विदेशी मुद्रा प्रबंधन रणनीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां आने वाले समय में रुपये की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।