सैमसंग इंडिया ने अपने छात्र नवाचार कार्यक्रम ‘सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026’ के चार विजेता दलों की घोषणा की है। नई दिल्ली में आयोजित ग्रैंड फिनाले में इन दलों को अपने तकनीक-आधारित विचारों को आगे बढ़ाने के लिए कुल ₹2 करोड़ की इनक्यूबेशन सहायता दी गई। विजेता दलों को आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) में मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन सहयोग भी मिलेगा, ताकि वे अपने नमूनों को उपयोगी उत्पादों में बदल सकें।
विजेता दलों में उत्तर प्रदेश के रायबरेली से क्वांटहंट, छत्तीसगढ़ के रायपुर से मॉर्फिज्म, नई दिल्ली की इनोबोटिक्स और तेलंगाना के हैदराबाद से सोमाट्रेस शामिल हैं। इस वर्ष कार्यक्रम में 28 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों के 648 शहरों से प्रविष्टियां आईं। सैमसंग के अनुसार, आधे से अधिक विचार दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों से आए, जो छोटे शहरों में युवा नवाचार की बढ़ती रुचि दिखाता है।
चार विजेता दलों को कुल ₹2 करोड़ की सहायता मिलेगी। उन्हें आईआईटी दिल्ली में विशेषज्ञ मार्गदर्शन और अपने तकनीकी नमूनों को बाजार के लिए तैयार करने में मदद दी जाएगी।
क्वांटहंट ने ‘एआई लिविंग फॉर इंडिया’ श्रेणी में जीत हासिल की। इसके दल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित साइबर सुरक्षा समाधान बनाया है, जो एन्क्रिप्शन में मौजूद कमजोरियों की पहचान करने और संगठनों को क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों के लिए तैयार होने में मदद करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा श्रेणी में मॉर्फिज्म विजेता रहा। इसके समाधान में चेहरे के हल्के भावों और व्यवहार से जुड़े संकेतों का विश्लेषण किया जाता है। इसका उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े लोगों को भावनाओं को समझने में सहायता देना है। यह तकनीक सामाजिक संवाद को आसान बनाने के प्रयास का हिस्सा है, हालांकि इसका वास्तविक उपयोग विशेषज्ञों और संबंधित लोगों की जरूरतों के अनुसार परखा जाना जरूरी होगा।
पर्यावरणीय स्थिरता श्रेणी में इनोबोटिक्स ने ‘सेंटिनल’ नाम का सौर ऊर्जा से चलने वाला एआई उपकरण बनाया। यह कैमरे, रडार और जमीन में होने वाली हलचल से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल कर मानव बस्तियों के करीब वन्यजीवों की गतिविधि पहचानने और समय रहते चेतावनी देने के लिए तैयार किया गया है। इसका मकसद मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच टकराव का जोखिम कम करना है।
- क्वांटहंट: एन्क्रिप्शन की कमजोरियां पहचानने वाला साइबर सुरक्षा समाधान।
- मॉर्फिज्म: ऑटिज्म से जुड़े लोगों को भावनाएं समझने में मदद देने वाली एआई प्रणाली।
- इनोबोटिक्स: वन्यजीवों की गतिविधि का पहले से संकेत देने वाला सौर ऊर्जा संचालित उपकरण।
- सोमाट्रेस: खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में रीढ़ के कोण और भार को मापने वाला पहनने योग्य उपकरण।
खेल और तकनीक श्रेणी का पुरस्कार सोमाट्रेस को मिला। इसके दल ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित पहनने योग्य प्रशिक्षण उपकरण तैयार किया है। यह अभ्यास के दौरान रीढ़ की स्थिति के कोण और शरीर पर पड़ने वाले भार को मापता है। इससे खिलाड़ी और प्रशिक्षक तकनीक-आधारित खेलों में चोट के संभावित जोखिम को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश कर सकते हैं।
कार्यक्रम में शीर्ष 20 दलों को ₹20 लाख के अनुदान दिए गए और प्रत्येक दल के सदस्य को सैमसंग का प्रमुख श्रेणी वाला गैलेक्सी स्मार्टफोन मिला। इसके अलावा दो ‘कम्युनिटी चॉइस’ पुरस्कारों के तहत ₹1-1 लाख और एक ‘डिजिटल इम्पैक्ट’ पुरस्कार के तहत ₹50,000 दिए गए। ग्रैंड फिनाले के दौरान सभी शीर्ष 20 दलों ने निवेशकों से मुलाकात भी की।
सैमसंग साउथवेस्ट एशिया के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेबी पार्क ने कहा कि इस वर्ष के प्रतिभागियों ने अपने समुदायों की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए नई तकनीकों से समाधान तैयार किए हैं। भारत में कंपनी के 30 वर्ष पूरे होने के मौके पर उन्होंने युवा नवप्रवर्तकों को सहयोग देने पर गर्व जताया। भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रिस्नर ने कहा कि 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में युवा नवप्रवर्तकों की अहम भूमिका है।
मीटाई स्टार्टअप हब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीएस मदनगोपाल ने कहा कि अगला कदम इन विचारों को केवल नमूने तक सीमित न रखकर ऐसे समाधानों में बदलना है जिनका असर मापा जा सके। निर्णायक मंडल में सैमसंग के अधिकारियों के साथ नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन, आईआईटी दिल्ली, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल थे।
यह भारत में कार्यक्रम का पांचवां संस्करण है। सैमसंग के अनुसार, 2022 से अब तक देश में करीब 80,000 छात्र इसमें हिस्सा ले चुके हैं। कार्यक्रम को भारत में संयुक्त राष्ट्र, एफआईटीटी-आईआईटी दिल्ली, स्टार्टअप इंडिया, मीटाई स्टार्टअप हब, अटल इनोवेशन मिशन और मंथन जैसे संस्थानों का सहयोग मिला है। अधिक जानकारी के लिए सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026 के विजेताओं को कितनी राशि मिली?
चार विजेता दलों को अपने तकनीकी समाधानों को आगे विकसित करने के लिए कुल ₹2 करोड़ की इनक्यूबेशन सहायता दी गई।
इस साल के चार विजेता दल कौन हैं?
विजेता दल क्वांटहंट, मॉर्फिज्म, इनोबोटिक्स और सोमाट्रेस हैं। ये क्रमशः साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और खेल तकनीक के क्षेत्रों में समाधान विकसित कर रहे हैं।
विजेता दलों को इनक्यूबेशन सहायता कहां मिलेगी?
विजेता दलों को आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन सहायता मिलेगी, जिससे वे अपने नमूनों को बाजार में उपयोग के योग्य उत्पाद बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
कार्यक्रम में किस तरह के विचारों को शामिल किया गया?
इस वर्ष विचार चार श्रेणियों में आए: भारत के लिए एआई आधारित जीवन, स्वास्थ्य और शिक्षा, खेल एवं तकनीक, तथा पर्यावरणीय स्थिरता। इनमें सुरक्षा, भावनाओं की पहचान, वन्यजीव चेतावनी और खिलाड़ी प्रशिक्षण जैसे विषय शामिल थे।
भारत में यह कार्यक्रम कब से चल रहा है?
यह कार्यक्रम भारत में पांचवीं बार आयोजित किया गया। कंपनी के मुताबिक, 2022 से अब तक देश में लगभग 80,000 छात्र इसमें हिस्सा ले चुके हैं।
निष्कर्ष
सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो 2026 के विजेता दलों ने साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और खेल से जुड़ी समस्याओं के लिए तकनीकी समाधान पेश किए हैं। अब इन विचारों की उपयोगिता, सुरक्षा और वास्तविक प्रभाव को परखते हुए उन्हें व्यावहारिक उत्पादों में बदलना अहम होगा।
अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्रोत सामग्री पर आधारित है। अनुदान, परियोजनाओं और कार्यक्रम से जुड़े विवरणों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी देखें।
