भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकसित करने की कोशिश तेज हो रही है। 27 अक्टूबर 2026 को भारतीय AI कंपनी Sarvam ने रक्षा मंत्रालय के Headquarters Integrated Defence Staff के साथ पांच साल के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए AI आधारित एप्लिकेशन विकसित करना और उन्हें इस्तेमाल के लिए तैयार करना है। घोषणा में कहा गया कि परियोजनाएं प्रशिक्षण, संचालन से जुड़ी जरूरतों और निर्णय लेने में मदद पर केंद्रित होंगी।
साझेदारी में क्या शामिल है?
इस समझौते के तहत Sarvam तीनों सेनाओं और रक्षा मुख्यालय के तहत आने वाले संयुक्त संगठनों के लिए AI एप्लिकेशन बनाने, विकसित करने और लागू करने में मदद करेगी। Headquarters Integrated Defence Staff अलग-अलग सेवाओं के बीच तालमेल बनाने में भूमिका निभाएगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि तकनीक लागू होने के बाद जरूरी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
यह समझौता पांच साल के लिए है, लेकिन अभी हर परियोजना की अलग समय-सीमा, बजट या तैनाती की जगह सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इसे सभी प्रणालियों के तुरंत इस्तेमाल में आ जाने की घोषणा नहीं समझना चाहिए। वास्तविक प्रगति परियोजनाओं की जरूरत, परीक्षण और संबंधित मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
🛡️ समझौते की मुख्य बातें
- अवधि: पांच साल
- साझेदार: Sarvam और रक्षा मंत्रालय का HQ IDS
- लाभार्थी: सेना, नौसेना और वायुसेना
- काम: प्रशिक्षण, निर्णय सहायता और डेटा विश्लेषण
- अभी स्पष्ट नहीं: कुल बजट और हर परियोजना की समय-सीमा
Target acquisition और data fusion का मतलब
घोषणा में लक्ष्य की पहचान और अलग-अलग स्रोतों से आए डेटा को एक साथ समझने जैसे क्षेत्रों का उल्लेख है। Target acquisition का सामान्य अर्थ संभावित लक्ष्य के बारे में जानकारी जुटाने और उसकी पहचान करने की प्रक्रिया है। Data fusion में सेंसर और अन्य प्रणालियों से मिले अलग-अलग संकेतों को जोड़कर अधिक उपयोगी तस्वीर तैयार की जाती है। ऐसे कामों में गलत जानकारी का असर गंभीर हो सकता है, इसलिए जांच और मानवीय निगरानी महत्वपूर्ण रहती है।
समझौते में foundation models, AI agents और भू-स्थानिक तथा दृश्य जानकारी समझने वाली तकनीक के उपयोग की भी संभावना शामिल है। Foundation model बड़े डेटा पर प्रशिक्षित AI प्रणाली होती है, जिसे कई तरह के कामों के लिए ढाला जा सकता है। AI agent किसी तय लक्ष्य के लिए जानकारी ढूंढने या कई चरणों वाले काम में सहायता कर सकता है। हालांकि घोषणा में हर प्रणाली की तकनीकी बनावट या उसकी वास्तविक क्षमता का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।
🇮🇳 भारत के लिए यह क्यों अहम है?
- देश में विकसित AI तकनीक को बढ़ावा मिल सकता है।
- तीनों सेनाओं की साझा जरूरतों पर काम हो सकता है।
- स्थानीय भाषा और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप सिस्टम बनाने का अवसर मिलेगा।
- सुरक्षा, परीक्षण और मानवीय निगरानी को शुरुआत से तय करना जरूरी होगा।
देश में बनी तकनीक पर जोर
भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में घरेलू तकनीक और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना चाहती है। देश में विकसित मॉडल और ढांचा इस्तेमाल करने से कुछ जरूरतों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, संवेदनशील डेटा के इस्तेमाल, तकनीकी रखरखाव और सिस्टम पर नियंत्रण जैसे विषयों पर स्थानीय संस्थाओं की भूमिका मजबूत हो सकती है। फिर भी, घरेलू तकनीक होना अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं है। हर सिस्टम की स्वतंत्र जांच और नियमित समीक्षा जरूरी होगी।
Sarvam का Chanakya विभाग इस रक्षा-संबंधी काम का नेतृत्व करेगा। कंपनी ने अपने AI तकनीकी ढांचे में Sarvam 105B foundation model का भी उल्लेख किया है। इस मॉडल की वास्तविक उपयोगिता इस बात से तय होगी कि वह संबंधित कार्यों में कितना भरोसेमंद प्रदर्शन करता है, कठिन परिस्थितियों में कैसा परिणाम देता है और सुरक्षा मानकों पर कितना खरा उतरता है। घोषणा में कोई निश्चित प्रदर्शन आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
मानवीय निगरानी क्यों जरूरी है?
रक्षा क्षेत्र में AI जानकारी को तेजी से व्यवस्थित करने और निर्णय लेने वालों की मदद करने में उपयोगी हो सकता है। लेकिन सैन्य निर्णयों का असर लोगों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों पर पड़ता है। इसलिए AI से मिली सलाह को अंतिम निर्णय मान लेना उचित नहीं होगा। प्रशिक्षित अधिकारी, स्पष्ट अनुमति व्यवस्था, लॉग और जांच की प्रक्रिया जरूरी हैं। Sarvam की घोषणा मानवीय निगरानी का उल्लेख करती है, लेकिन हर एप्लिकेशन में लागू होने वाले नियम अभी विस्तार से सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
इस समझौते का असर धीरे-धीरे सामने आएगा। अगले चरणों में परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी परीक्षण, डेटा की गुणवत्ता, अलग-अलग प्रणालियों के साथ तालमेल और कर्मचारियों का प्रशिक्षण महत्वपूर्ण होगा। किसी भी AI व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले सीमित परिस्थितियों में उसकी गलतियों और सीमाओं को समझना चाहिए।
निष्कर्ष
Sarvam और रक्षा मंत्रालय की पांच साल की साझेदारी भारत में रक्षा AI क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका वास्तविक लाभ परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा जांच, जिम्मेदार उपयोग और मानवीय निगरानी पर निर्भर करेगा। फिलहाल इसे सहयोग का ढांचा समझना चाहिए, न कि सभी AI प्रणालियों की तैनाती पूरी होने की घोषणा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Sarvam और रक्षा मंत्रालय का समझौता कितने साल का है?
यह समझौता पांच साल के लिए किया गया है। इसके तहत Sarvam भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की जरूरतों के अनुसार AI एप्लिकेशन विकसित करने में मदद करेगी। अलग-अलग परियोजनाओं की समय-सीमा और बजट अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
2. इस साझेदारी से किन सेनाओं को फायदा हो सकता है?
समझौते में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के साथ रक्षा मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले संयुक्त संगठनों का उल्लेख है। तकनीक का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी परियोजना चुनी जाती है और उसका परीक्षण सफल रहता है।
3. रक्षा क्षेत्र में AI का उपयोग किन कामों में होगा?
घोषणा में प्रशिक्षण, निर्णय सहायता, लक्ष्य की पहचान और अलग-अलग स्रोतों से मिले डेटा को जोड़ने जैसे काम शामिल हैं। हर एप्लिकेशन का उद्देश्य अलग हो सकता है। अभी किसी खास प्रणाली की तैनाती की तारीख या पूरी तकनीकी जानकारी साझा नहीं की गई है।
4. क्या AI सैन्य फैसले खुद लेगा?
घोषणा में मानवीय निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया गया है। इसका अर्थ है कि महत्वपूर्ण फैसलों में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका बनी रहनी चाहिए। किन परिस्थितियों में कौन-सी मंजूरी जरूरी होगी, इसका विस्तृत नियम हर परियोजना के लिए स्पष्ट होना बाकी है।
5. Sarvam का Chanakya विभाग क्या करेगा?
Chanakya, Sarvam का राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा पर केंद्रित विभाग है। यह इस साझेदारी के तहत रक्षा-संबंधी AI कार्यों का नेतृत्व करेगा। कंपनी के अनुसार, इसमें उसके AI तकनीकी ढांचे और Sarvam 105B foundation model का उपयोग किया जा सकता है।
स्रोत: Express Computer की रिपोर्ट
अस्वीकरण: यह लेख प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित है। रक्षा परियोजनाओं की समय-सीमा, बजट और सुरक्षा नियमों में बदलाव हो सकता है।