भारत के coffee café कारोबार में Tata Starbucks ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान revenue में बढ़त दर्ज की, लेकिन कंपनी अभी भी घाटे में है। 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई वित्तीय जानकारी के अनुसार FY26 में revenue from operations 7 प्रतिशत बढ़कर ₹1,367 करोड़ हो गया, जबकि FY25 में यह ₹1,277 करोड़ था। इसी अवधि में कंपनी का net loss 27 प्रतिशत घटकर ₹99 करोड़ रहा। इससे पहले कंपनी का घाटा ₹136 करोड़ था।
Tata Starbucks भारत में Tata Consumer Products और Starbucks Corporation का 50:50 joint venture है। कंपनी देश में Starbucks ब्रांड के तहत café चलाती है। FY26 के आंकड़े बताते हैं कि कारोबार की बिक्री बढ़ी, लेकिन कुल खर्च revenue से अधिक रहा। इसलिए कंपनी ने घाटा कम किया है, पर अभी शुद्ध मुनाफे में नहीं आई है। स्थिति समझने के लिए revenue, खर्च, EBITDA और net loss को साथ में देखना जरूरी है।
कंपनी का revenue ₹1,277 करोड़ से बढ़कर ₹1,367 करोड़ हुआ। दूसरी ओर कुल खर्च ₹1,446 करोड़ से बढ़कर ₹1,514 करोड़ हुआ। फिर भी कंपनी ने लागत पर नियंत्रण और कारोबार के बेहतर प्रदर्शन के जरिए घाटा कम किया। यह सुधार सकारात्मक है, लेकिन लगातार मुनाफा कमाने के लिए आय और खर्च के बीच बेहतर संतुलन बनाना होगा।
मुख्य तथ्य
- Revenue: ₹1,367 करोड़, 7% सालाना वृद्धि।
- FY25 Revenue: ₹1,277 करोड़।
- Net Loss: ₹99 करोड़, 27% कमी।
- EBITDA: ₹234 करोड़, margin 17%।
कंपनी का EBITDA ₹234 करोड़ रहा और EBITDA margin 17 प्रतिशत बताया गया। EBITDA से कारोबार के संचालन की कमाई का संकेत मिलता है, लेकिन यह अंतिम शुद्ध मुनाफा नहीं है। इसमें ब्याज, टैक्स, depreciation और amortisation जैसे खर्चों का पूरा प्रभाव शामिल नहीं होता। इसलिए EBITDA सकारात्मक होने के बावजूद कंपनी net loss दिखा सकती है।
Tata Starbucks ने भारत में अपने café नेटवर्क को बढ़ाने की योजना बनाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2025 तक कंपनी के 54 शहरों में 390 से अधिक स्टोर थे और कर्मचारियों की संख्या लगभग 4,300 थी। कंपनी का लक्ष्य 2028 तक करीब 1,000 स्टोर तक पहुंचने का है। इसके लिए नए शहरों और मौजूदा बाजारों में सही जगह, प्रशिक्षित कर्मचारी, आपूर्ति और ग्राहक मांग की जरूरत होगी।
नए स्टोर खोलने से ब्रांड को अधिक ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। बड़े शहरों के अलावा छोटे और मध्यम शहरों में भी café संस्कृति का विस्तार हो रहा है। युवा ग्राहक, कामकाजी लोग और परिवार café को मिलने, काम करने या समय बिताने की जगह के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन हर शहर में ग्राहक की खर्च करने की क्षमता और पसंद समान नहीं होती। कंपनी को स्थानीय मांग के अनुसार स्थान और उत्पाद चुनने होंगे।
नए स्टोर खोलने पर किराया, सजावट, मशीनें, कर्मचारी, बिजली और शुरुआती प्रचार पर खर्च होता है। यदि किसी स्टोर में ग्राहक संख्या कम रहती है तो उसकी लागत निकालना कठिन हो सकता है। इसलिए केवल स्टोर की संख्या बढ़ाना सफलता का पूरा पैमाना नहीं है। प्रति स्टोर बिक्री, ग्राहक की दोबारा वापसी, औसत बिल और स्टोर से होने वाला लाभ भी देखना चाहिए।
कॉफी बीन्स और संबंधित उत्पादों की खरीद कंपनी के खर्च का बड़ा हिस्सा है। FY26 में इस मद पर खर्च 6 प्रतिशत बढ़कर ₹356 करोड़ हुआ, जबकि FY25 में यह ₹336 करोड़ था। कर्मचारी लाभ पर खर्च भी 9.8 प्रतिशत बढ़कर ₹225 करोड़ पहुंचा। café कारोबार में प्रशिक्षित कर्मचारी ग्राहक अनुभव का अहम हिस्सा होते हैं, लेकिन वेतन और कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से खर्च भी बढ़ता है।
व्यापार पर असर और जरूरी बातें
- लागत: कॉफी, कर्मचारी और किराया।
- प्रतिस्पर्धा: नए और पुराने café ब्रांड।
- विस्तार: नए स्टोर को लाभ में लाना।
- लक्ष्य: 2028 तक करीब 1,000 स्टोर।
किराया, बिजली, विज्ञापन, माल ढुलाई और प्रशासनिक खर्च भी café कारोबार को प्रभावित करते हैं। कंपनी ने हर एक रुपये के operating revenue को कमाने के लिए ₹1.11 खर्च किए। कंपनी का standalone return on capital employed (ROCE) -2.6 प्रतिशत रहा। यह संकेत है कि पूंजी के इस्तेमाल से अभी सकारात्मक operating return हासिल करना चुनौतीपूर्ण है। घाटा घटने के बावजूद इन संकेतकों पर आगे ध्यान देना होगा।
भारत में café बाजार में Café Coffee Day, Blue Tokai, Third Wave Coffee Roasters, Rage Coffee और कई स्थानीय ब्रांड सक्रिय हैं। कुछ ब्रांड specialty coffee पर ध्यान देते हैं, जबकि कुछ कम कीमत और तेज सेवा के जरिए ग्राहक जुटाते हैं। Starbucks को अपनी प्रीमियम पहचान बनाए रखते हुए ग्राहकों को बार-बार आने का कारण देना होगा। प्रतिस्पर्धा से ग्राहकों को नए उत्पाद और ऑफर मिल सकते हैं, लेकिन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव भी रह सकता है।
नए café खुलने से barista, store manager, delivery, supply chain और maintenance से जुड़े रोजगार बन सकते हैं। कॉफी बीन्स, दूध, बेकरी उत्पाद और पैकेजिंग की मांग से स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को भी कारोबार मिल सकता है। आगे कंपनी के लिए समान स्टोर बिक्री, खर्च, ग्राहक संख्या और लाभप्रदता अहम होंगे। अधिक जानकारी के लिए Tata Starbucks FY26 की रिपोर्ट पढ़ें। घर पर कॉफी बनाने के उपकरण के लिए Coffee Maker विकल्प देखें। Amazon से योग्य खरीद पर वेबसाइट को कमीशन मिल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Tata Starbucks का FY26 revenue कितना रहा?
Tata Starbucks का FY26 revenue from operations ₹1,367 करोड़ रहा। FY25 में यह ₹1,277 करोड़ था। इस तरह कंपनी ने सालाना आधार पर 7 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की।
2. Starbucks India का घाटा कितना कम हुआ?
कंपनी का net loss FY26 में घटकर ₹99 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹136 करोड़ था। इसका अर्थ है कि घाटे में करीब 27 प्रतिशत की कमी आई।
3. Starbucks India का 2028 तक क्या लक्ष्य है?
कंपनी का लक्ष्य 2028 तक भारत में अपने स्टोर नेटवर्क को करीब 1,000 तक पहुंचाना है। इसके लिए नए शहरों और मौजूदा बाजारों में विस्तार की जरूरत होगी।
4. Starbucks के खर्च में कौन-सी चीजें शामिल हैं?
कंपनी के प्रमुख खर्चों में कॉफी बीन्स, संबंधित उत्पाद, कर्मचारियों का वेतन, स्टोर का किराया, बिजली, विज्ञापन, माल ढुलाई और प्रशासन शामिल हैं।
5. क्या Starbucks India अब मुनाफे में है?
नहीं। FY26 में कंपनी ने ₹99 करोड़ का net loss दर्ज किया। हालांकि घाटा पिछले वित्त वर्ष से कम हुआ है और EBITDA सकारात्मक रहा। शुद्ध मुनाफे के लिए खर्च पर नियंत्रण जरूरी है।
निष्कर्ष
Tata Starbucks की FY26 बिक्री बढ़ी और घाटा कम हुआ, लेकिन कंपनी अभी लाभ में नहीं आई है। आगे सफलता स्टोर विस्तार, ग्राहक मांग, लागत नियंत्रण और हर स्टोर से बेहतर कमाई पर निर्भर करेगी।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश या कानूनी सलाह नहीं। निर्णय से पहले आधिकारिक दस्तावेज और विशेषज्ञ की सलाह देखें।
