केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 को राज्यों के लिए ₹1,09,019 करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी की है। यह राशि राज्यों को मिलने वाली नियमित मासिक रकम से अलग है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, त्योहारों के समय राज्यों को अतिरिक्त संसाधन देने, विकास कार्यों पर खर्च तेज करने और जनकल्याण योजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह राशि जारी की गई। उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक ₹19,208 करोड़ मिले, जबकि बिहार को ₹10,845 करोड़ और मध्य प्रदेश को ₹8,010 करोड़ दिए गए। झारखंड के खाते में ₹3,660 करोड़ आए हैं। इस अतिरिक्त धन से राज्यों की खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है, लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य सरकारें राशि का उपयोग किन कामों में करती हैं।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह चालू वित्त वर्ष में कर हिस्सेदारी की दूसरी अतिरिक्त किस्त है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो ने 31 अक्टूबर 2026 को इसकी पुष्टि की। आधिकारिक राज्यवार विवरण यहां उपलब्ध है: वित्त मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति।
राज्यों को कितना पैसा मिला?
जारी की गई कुल राशि ₹1.09 लाख करोड़ से अधिक है। राज्यों के बीच इसका बंटवारा तय हिस्सेदारी के आधार पर किया गया है। उत्तर प्रदेश को ₹19,208 करोड़ मिले, जो कुल अतिरिक्त राशि का लगभग 17.6 प्रतिशत है। बिहार को ₹10,845 करोड़, मध्य प्रदेश को ₹8,010 करोड़, पश्चिम बंगाल को ₹7,866 करोड़ और महाराष्ट्र को ₹7,022 करोड़ दिए गए। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बड़ी आबादी और निर्धारित हिस्सेदारी वाले राज्यों को इस किस्त में बड़ी रकम मिली है।
झारखंड को ₹3,660 करोड़ की अतिरिक्त राशि मिली है। बिहार को ₹10,845 करोड़ दिए गए हैं। यह रकम राज्यों के बजट में उपलब्ध संसाधनों को बढ़ा सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरी राशि सीधे नागरिकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। कर हिस्सेदारी राज्य सरकार के खजाने में जाती है और राज्य इसे अपनी बजट प्राथमिकताओं, विकास योजनाओं, वेतन, बुनियादी सुविधाओं और कल्याणकारी खर्च के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
राज्यवार आवंटन में आंध्र प्रदेश को ₹4,597 करोड़, असम को ₹3,552 करोड़, छत्तीसगढ़ को ₹3,602 करोड़, गुजरात को ₹4,094 करोड़, कर्नाटक को ₹4,504 करोड़, केरलम को ₹2,597 करोड़, ओडिशा को ₹4,819 करोड़ और राजस्थान को ₹6,460 करोड़ दिए गए। तमिलनाडु को ₹4,466 करोड़, तेलंगाना को ₹2,370 करोड़ और पंजाब को ₹2,176 करोड़ मिले। सभी 28 राज्यों के आंकड़े केंद्र की आधिकारिक विज्ञप्ति में दिए गए हैं।
🏛️ अतिरिक्त कर हिस्सेदारी: प्रमुख आंकड़े
- कुल जारी राशि: ₹1,09,019 करोड़
- तारीख: 31 अक्टूबर 2026
- उत्तर प्रदेश: ₹19,208 करोड़
- बिहार: ₹10,845 करोड़
- झारखंड: ₹3,660 करोड़
- मध्य प्रदेश: ₹8,010 करोड़
- कुल राज्य: 28
Tax Devolution क्या होता है?
कर हिस्सेदारी का मतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा वसूले गए कुछ करों का एक तय हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। भारत में केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व का बंटवारा संविधान और वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर होता है। इसका उद्देश्य राज्यों को अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार खर्च करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसी जिम्मेदारियों को निभाने में राज्यों को बड़ी रकम की जरूरत होती है।
केंद्र सरकार हर महीने राज्यों को कर हिस्सेदारी की किस्त जारी करती है। कभी-कभी अतिरिक्त किस्त भी दी जाती है। 31 अक्टूबर को जारी रकम नियमित मासिक किस्त के अतिरिक्त है। इसलिए इसे राज्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की तरह देखा जा सकता है, लेकिन यह कोई नया ऋण या अलग से घोषित अनुदान नहीं है। यह राज्यों को मिलने वाली कर आय का हिस्सा है। राज्य इस राशि को अपने बजट और नियमों के अनुसार खर्च कर सकते हैं।
त्योहारों से पहले अतिरिक्त राशि क्यों जारी की गई?
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि त्योहारों के समय राज्यों को अतिरिक्त धन देने का उद्देश्य पूंजीगत खर्च तेज करना और विकास तथा कल्याण से जुड़े खर्च को वित्त उपलब्ध कराना है। त्योहारों के आसपास बाजार में खरीदारी, परिवहन, सार्वजनिक सेवाओं और स्थानीय गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। राज्य सरकारों को इस अवधि में सड़क, बिजली, सफाई, सार्वजनिक परिवहन और अन्य सेवाओं पर खर्च करना पड़ता है। अतिरिक्त राशि से उनके पास भुगतान और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अधिक संसाधन हो सकते हैं।
पूंजीगत खर्च का मतलब ऐसी परिसंपत्तियों और सुविधाओं पर खर्च करना है जिनका लाभ लंबे समय तक मिलता है। सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल, सिंचाई व्यवस्था, जल आपूर्ति और सार्वजनिक भवन इसके उदाहरण हैं। ऐसे खर्च से निर्माण कार्यों को गति मिल सकती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, परियोजनाओं का लाभ तभी मिलेगा जब काम समय पर शुरू हो, गुणवत्ता बनी रहे और धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से किया जाए।
📌 राज्यों के लिए संभावित उपयोग
- बुनियादी ढांचा: सड़क, पुल और जल आपूर्ति परियोजनाएं
- स्वास्थ्य: अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं
- शिक्षा: स्कूल भवन और जरूरी सुविधाएं
- ग्रामीण क्षेत्र: सिंचाई और स्थानीय विकास कार्य
- कल्याण: पात्र योजनाओं के भुगतान और सेवाएं
झारखंड और बिहार के लिए इसका क्या महत्व है?
झारखंड को ₹3,660 करोड़ मिलना राज्य के बजट के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराता है। राज्य में सड़क, ग्रामीण संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और आदिवासी क्षेत्रों के विकास जैसी कई जरूरतें हैं। अतिरिक्त कर हिस्सेदारी से राज्य सरकार को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च करने की गुंजाइश मिल सकती है। लेकिन किसी खास परियोजना को कितनी राशि मिलेगी, यह राज्य सरकार के बजट और प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगा। अभी केंद्र की विज्ञप्ति में केवल राज्यवार कुल रकम बताई गई है, किसी खास योजना के लिए अलग आवंटन नहीं बताया गया है।
आम लोगों और कारोबार पर क्या असर होगा?
आम नागरिकों को इस घोषणा के बाद सीधे नकद भुगतान नहीं मिलेगा। इसका लाभ सरकारी सेवाओं और परियोजनाओं के जरिए धीरे-धीरे दिख सकता है। यदि राज्य सरकार सड़क, पुल, अस्पताल या पेयजल परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाती है तो नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं। सरकारी निर्माण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों और छोटे कारोबारों को काम मिलने की संभावना भी रहती है। लेकिन यह प्रभाव राज्य के खर्च करने के तरीके और परियोजनाओं की तैयारी पर निर्भर करेगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेश के संदर्भ को समझने के लिए पाठक भारत की अर्थव्यवस्था पर यह पुस्तक Amazon पर देख सकते हैं। खरीदने से पहले पुस्तक का संस्करण और विवरण जांचें। यह सहबद्ध लिंक है।
आगे क्या देखना जरूरी होगा?
अब यह देखना होगा कि राज्य सरकारें अतिरिक्त धन का उपयोग किस गति से करती हैं। बजट में पूंजीगत खर्च का हिस्सा, नई परियोजनाओं की मंजूरी, भुगतान की स्थिति और विकास योजनाओं की प्रगति अहम संकेत होंगे। केंद्र ने यह स्पष्ट किया है कि रकम त्योहारों से पहले जारी की गई है और इसका मकसद विकास तथा कल्याण संबंधी खर्च को समर्थन देना है। इससे आगे किसी विशेष योजना या नागरिक लाभ की घोषणा अभी नहीं की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. केंद्र सरकार ने राज्यों को कितनी अतिरिक्त राशि दी है?
केंद्र ने 31 अक्टूबर 2026 को राज्यों को ₹1,09,019 करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी जारी की है। यह रकम नियमित मासिक किस्त से अलग है और चालू वित्त वर्ष की दूसरी अतिरिक्त किस्त बताई गई है।
2. झारखंड को इस किस्त में कितनी राशि मिली?
आधिकारिक राज्यवार सूची के अनुसार झारखंड को ₹3,660 करोड़ मिले हैं। यह राशि राज्य सरकार के खजाने में जाएगी और इसे बजट प्राथमिकताओं, विकास कार्यों तथा कल्याणकारी खर्च के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. सबसे अधिक अतिरिक्त कर हिस्सेदारी किस राज्य को मिली?
उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक ₹19,208 करोड़ मिले हैं। इसके बाद बिहार को ₹10,845 करोड़ और मध्य प्रदेश को ₹8,010 करोड़ दिए गए। यह बंटवारा तय कर हिस्सेदारी व्यवस्था के आधार पर किया गया है।
4. क्या यह राशि आम लोगों के बैंक खातों में आएगी?
नहीं। यह रकम राज्य सरकारों को कर हिस्सेदारी के रूप में दी गई है। राज्य इसे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, सार्वजनिक सेवाओं और पात्र कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च कर सकते हैं।
5. अतिरिक्त कर हिस्सेदारी से रोजगार कैसे बढ़ सकता है?
यदि राज्य इस धन से सड़क, पुल, अस्पताल और अन्य निर्माण परियोजनाएं तेज करते हैं तो ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और श्रमिकों को काम मिल सकता है। वास्तविक रोजगार प्रभाव परियोजनाओं की शुरुआत और खर्च पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष: ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त कर हिस्सेदारी राज्यों को विकास और जनकल्याण पर खर्च बढ़ाने का अवसर देती है। इसका वास्तविक लाभ तभी दिखेगा जब धन समय पर, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से खर्च होगा।
अस्वीकरण: यह लेख सरकारी आंकड़ों पर आधारित समाचार जानकारी है। किसी राज्य योजना या वित्तीय निर्णय से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना जांचें।