UPI MDR Charge 2026: केरल के व्यापारियों ने शुल्क वापसी की मांग की

केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने यूपीआई से होने वाले भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि केवल इस शुल्क को दिवाली तक टालने से व्यापारियों और ग्राहकों की समस्याएं दूर नहीं होंगी। डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाना सरकार की नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की नीति के विपरीत है। इससे छोटे व्यापारियों के खर्च बढ़ सकते हैं और ग्राहकों पर भी आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

यूपीआई शुल्क के खिलाफ व्यापारियों का विरोध

एसोसिएशन के महासचिव एस. अब्दुल नासर ने कहा कि डिजिटल भुगतान अब रोजमर्रा के कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में यूपीआई लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से छोटे और मध्यम कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। इन कारोबारियों का मुनाफा पहले से ही सीमित रहता है। यदि भुगतान स्वीकार करने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा, तो उनके कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसके साथ ही डिजिटल भुगतान पर निर्भर रहने वाले ग्राहकों को भी इसका असर झेलना पड़ सकता है।

यूपीआई शुल्क विवाद की प्रमुख बातें

  • केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग की है।
  • संगठन का कहना है कि शुल्क को दिवाली तक टालना पर्याप्त नहीं है।
  • व्यापारियों को आशंका है कि अतिरिक्त शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ सकती है।
  • प्रस्ताव में 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क शामिल है।
  • व्यापारी इस प्रस्ताव को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।

राज्यभर में व्यापारियों ने किया प्रदर्शन

इस मुद्दे पर विरोध जताने के लिए केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मंगलवार को राज्यभर में केंद्र सरकार के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए। संगठन के अनुसार, इन प्रदर्शनों में सोने और आभूषणों के कारोबार से जुड़े लगभग 4,000 व्यापारियों ने हिस्सा लिया। व्यापारियों ने मांग की कि यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को केवल कुछ समय के लिए स्थगित करने के बजाय पूरी तरह समाप्त किया जाए।

दिवाली के बाद शुल्क लागू होने की आशंका

संगठन ने यह भी कहा कि त्योहारों के मौसम तक शुल्क लागू नहीं करने का आश्वासन उसकी चिंताओं का समाधान नहीं है। दिवाली के बाद शुल्क लागू होने की संभावना से व्यापारियों में असंतोष बना हुआ है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि जब तक इस प्रस्ताव को स्थायी रूप से वापस नहीं लिया जाता, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा।

2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क का प्रस्ताव

इससे पहले नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने घोषणा की थी कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर शुल्क दिवाली के बाद लागू किया जाएगा। पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर से शुरू करने की योजना थी। अब इसके लागू होने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। हालांकि, व्यापारियों की मांग है कि इस शुल्क को केवल टालने के बजाय पूरी तरह खत्म किया जाए।

एमडीआर शुल्क का कारोबार पर संभावित असर

  • यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो संबंधित व्यापारी यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर अतिरिक्त लागत का सामना कर सकते हैं।
  • कम मुनाफे वाले छोटे कारोबारियों पर लागत बढ़ने का दबाव पड़ सकता है।
  • व्यापारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अतिरिक्त खर्च का असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।
  • शुल्क को स्थायी रूप से वापस लेने की मांग को लेकर विरोध जारी है।

डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर क्या पड़ सकता है असर?

यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने की सुविधा ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक के लिए लेनदेन को आसान बनाया है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क को लेकर व्यापारियों की चिंता बनी हुई है। आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर होने वाले फैसले का असर डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल और व्यापारियों की लागत पर पड़ सकता है।

व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें दुकानदारों और ग्राहकों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सामना न करना पड़े। हालांकि, प्रस्तावित शुल्क पर अंतिम स्थिति और उसके लागू होने की शर्तों को लेकर आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी होगा।

यूपीआई और डिजिटल भुगतान से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट देख सकते हैं।

निष्कर्ष

केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहा है। व्यापारियों को आशंका है कि इससे उनकी लागत बढ़ेगी। अब इस मुद्दे पर आगे होने वाले फैसले से शुल्क व्यवस्था और डिजिटल भुगतान के भविष्य की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन क्या मांग कर रहा है?

संगठन यूपीआई से होने वाले कुछ व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि केवल दिवाली तक इसे टालना पर्याप्त नहीं है।

2. प्रस्तावित एमडीआर शुल्क कितना है?

बताए गए प्रस्ताव के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के संबंधित व्यापारी यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर शुल्क लगाने की बात कही गई है।

3. एमडीआर शुल्क क्या होता है?

एमडीआर का पूरा नाम मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। यह व्यापारियों से भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के लिए लिया जाने वाला शुल्क होता है। इसकी लागू दर और शर्तें संबंधित व्यवस्था पर निर्भर करती हैं।

4. व्यापारियों को इस शुल्क से क्या चिंता है?

व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क से भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ सकती है। सीमित मुनाफे वाले छोटे और मध्यम कारोबारियों पर इसका अधिक दबाव पड़ने की आशंका है।

5. क्या प्रस्तावित शुल्क पूरी तरह वापस ले लिया गया है?

दिए गए विवरण के अनुसार, शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने की बात कही गई है। व्यापारियों की मांग है कि इसे स्थायी रूप से वापस लिया जाए। अंतिम स्थिति के लिए आधिकारिक घोषणा देखनी चाहिए।

अस्वीकरण

यह लेख उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। शुल्क की मौजूदा स्थिति और लागू होने की शर्तों के लिए संबंधित संस्थाओं की आधिकारिक घोषणाएं देखें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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