नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने यूपीआई से होने वाले कुछ डिजिटल भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने का फैसला टाल दिया है। 13 अक्टूबर 2026 को हुई यूपीआई संचालन समिति की बैठक में तय किया गया कि यह शुल्क दिवाली के बाद लागू किया जाएगा। इसके लिए नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी। पहले इसे इसी सप्ताह से लागू करने की योजना थी, लेकिन त्योहारों के दौरान कारोबारियों और ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए इसे आगे बढ़ा दिया गया।
यूपीआई पर एमडीआर शुल्क लागू करने की तारीख टली
एनपीसीआई देश में यूपीआई भुगतान प्रणाली का संचालन करती है। यह व्यवस्था लोगों को मोबाइल के जरिए एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में तुरंत पैसे भेजने और दुकानों पर भुगतान करने की सुविधा देती है। नई व्यवस्था के तहत सभी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगाने की बात नहीं है। यह शुल्क केवल कुछ चुनिंदा व्यक्ति से व्यापारी यानी पी2एम लेनदेन पर लागू होना है। एनपीसीआई ने स्पष्ट किया है कि इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू करने की योजना है, लेकिन इसकी अंतिम तारीख अलग से बताई जाएगी।
त्योहारों के दौरान शुल्क लगाने से क्यों बचा गया?
इस फैसले से पहले कई कारोबारी संगठनों, डिजिटल भुगतान कंपनियों और वित्तीय तकनीक से जुड़ी कंपनियों ने शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि त्योहारों के दौरान लोग खरीदारी पर अधिक खर्च करते हैं। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत से व्यापारियों की परेशानी बढ़ सकती है। कुछ कारोबारियों को यह भी आशंका है कि शुल्क का बोझ किसी न किसी रूप में ग्राहकों पर डाला जा सकता है। इससे खरीदारी और भुगतान से जुड़े लोगों के व्यवहार पर असर पड़ने की संभावना है।
यूपीआई शुल्क से जुड़ी प्रमुख बातें
- एमडीआर शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है।
- शुल्क दिवाली के बाद लागू करने की योजना है।
- नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।
- प्रस्तावित शुल्क सभी यूपीआई भुगतानों पर लागू नहीं होना है।
- इसका दायरा चुनिंदा व्यक्ति से व्यापारी यानी पी2एम लेनदेन तक सीमित बताया गया है।
2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा भुगतान पर कितना शुल्क?
इससे पहले सितंबर 2026 में यूपीआई संचालन समिति ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क तय किया था। इस दर के अनुसार, 2,000 रुपये के भुगतान पर 8 रुपये और 10,000 रुपये के भुगतान पर 40 रुपये शुल्क बनता है। हालांकि, यह व्यवस्था सभी यूपीआई भुगतानों पर समान रूप से लागू नहीं होगी। शुल्क किन लेनदेन पर लगेगा और उससे जुड़ी शर्तें क्या होंगी, यह लागू होने वाली अंतिम व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
एमडीआर शुल्क क्या होता है?
एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के लिए लिया जाता है। इसमें भुगतान से जुड़ी सेवाओं की लागत शामिल हो सकती है। यदि किसी व्यापारी को भुगतान स्वीकार करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है, तो उसकी कुल कारोबारी लागत बढ़ सकती है। इसी वजह से छोटे दुकानदारों और अन्य व्यापारियों के बीच इस फैसले को लेकर चिंता है। सरकार को भी आशंका है कि त्योहारों के समय बढ़ती महंगाई के बीच अतिरिक्त लागत का असर व्यापार और ग्राहकों पर पड़ सकता है।
0.4 प्रतिशत शुल्क के उदाहरण
- 2,000 रुपये का भुगतान: 8 रुपये शुल्क।
- 5,000 रुपये का भुगतान: 20 रुपये शुल्क।
- 10,000 रुपये का भुगतान: 40 रुपये शुल्क।
ये उदाहरण 0.4 प्रतिशत की दर से गणना पर आधारित हैं। वास्तविक शुल्क केवल उन लेनदेन पर निर्भर करेगा, जो अंतिम नियमों के दायरे में आएंगे।
वित्त मंत्री के बयान के बाद भी जारी रही चर्चा
वित्त मंत्री ने 8 अक्टूबर को कहा था कि यूपीआई पर एमडीआर शुल्क से जुड़े मामले पर भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्ष विचार करेंगे। इसके बाद शुल्क लागू करने की तारीख को लेकर चर्चा जारी रही। इससे पहले खबरें आई थीं कि इसे जनवरी 2027 तक टालने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, 13 अक्टूबर को हुई बैठक के बाद सामने आए फैसले के अनुसार, शुल्क दिवाली के बाद लागू करने की योजना है। जनवरी 2027 को लेकर किसी अंतिम फैसले की पुष्टि इस घोषणा से नहीं होती।
यूपीआई पर शुल्क लागू करना क्यों चुनौतीपूर्ण है?
यूपीआई पर शुल्क लागू करना कार्ड से भुगतान करने की तुलना में अधिक जटिल माना जा रहा है। कार्ड भुगतान के लिए देशभर में लाखों मशीनें और भुगतान केंद्र मौजूद हैं, जबकि यूपीआई का इस्तेमाल छोटे शहरों, कस्बों और गांवों तक फैला हुआ है। बड़ी संख्या में दुकानदार मोबाइल फोन और क्यूआर कोड के जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं। ऐसे में शुल्क से जुड़े नियमों को अलग-अलग तरह के कारोबारियों और लेनदेन पर लागू करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
कार्ड भुगतान और यूपीआई के नियमों में अंतर
कार्ड भुगतान में कारोबार की श्रेणी के आधार पर शुल्क तय करने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। वहीं, यूपीआई के अलग-अलग प्रकार के लेनदेन के लिए अलग नियम और दरें हो सकती हैं। उपयोगिता बिलों के भुगतान, कर्ज की किस्तों और शेयर बाजार से जुड़े कुछ भुगतानों में भी अलग व्यवस्था देखने को मिलती है। इनमें से कुछ लेनदेन ऐसे हैं, जिनके लिए कार्ड से भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं होती या उस पर नियामकीय प्रतिबंध लागू होते हैं।
यूपीआई से पहले किन माध्यमों से होते थे डिजिटल भुगतान?
यूपीआई के लोकप्रिय होने से पहले लोग ऐसे कई भुगतान इंटरनेट बैंकिंग, आईएमपीएस, एनईएफटी और आरटीजीएस के जरिए करते थे। इन माध्यमों पर कुछ मामलों में शुल्क लिया जाता था और भुगतान करने वाले तथा रकम प्राप्त करने वाले पक्ष पर अलग-अलग लागत भी लग सकती थी। यूपीआई ने रोजमर्रा के डिजिटल भुगतानों को आसान बनाया है। इसलिए इस पर नए शुल्क लागू करने से पहले कारोबारियों, भुगतान कंपनियों और ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है।
ग्राहकों और कारोबारियों पर क्या असर पड़ सकता है?
फिलहाल, चुनिंदा यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। दिवाली के बाद इसकी नई तारीख घोषित की जाएगी। व्यापारियों और ग्राहकों को अंतिम नियमों की घोषणा का इंतजार करना चाहिए, क्योंकि शुल्क का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन से भुगतान इसके दायरे में आते हैं और इसे लागू करने की शर्तें क्या होती हैं।
यूपीआई और डिजिटल भुगतान से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए एनपीसीआई की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है। अंतिम नियमों की जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन भुगतानों पर शुल्क लगेगा और व्यापारियों के लिए इसकी शर्तें क्या होंगी।
निष्कर्ष
यूपीआई के चुनिंदा भुगतानों पर एमडीआर शुल्क लागू करने की तारीख दिवाली के बाद तक टाल दी गई है। इससे कारोबारियों और भुगतान कंपनियों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि, ग्राहकों और व्यापारियों पर वास्तविक असर अंतिम नियमों, शुल्क के दायरे और उसे लागू करने की शर्तों पर निर्भर करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. यूपीआई पर एमडीआर शुल्क कब लागू होगा?
13 अक्टूबर 2026 को सामने आए फैसले के अनुसार, चुनिंदा यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर शुल्क दिवाली के बाद लागू करने की योजना है। इसकी नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। इसलिए अंतिम तारीख और लागू होने वाली शर्तों के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी है।
2. क्या सभी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगेगा?
दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित एमडीआर शुल्क सभी यूपीआई भुगतानों पर लागू नहीं होगा। इसका दायरा चुनिंदा व्यक्ति से व्यापारी यानी पी2एम लेनदेन तक सीमित बताया गया है। किन भुगतानों पर शुल्क लगेगा, यह अंतिम नियमों और संबंधित शर्तों से स्पष्ट होगा।
3. एमडीआर शुल्क क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से भुगतान प्रक्रिया के लिए लिया जा सकता है। यह भुगतान सेवाओं की लागत से जुड़ा होता है। शुल्क लागू होने पर संबंधित व्यापारी की भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ सकती है।
4. 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क के हिसाब से 10,000 रुपये पर कितना शुल्क बनेगा?
यदि किसी पात्र लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होता है, तो 10,000 रुपये के भुगतान पर गणना के अनुसार 40 रुपये शुल्क बनेगा। हालांकि, यह केवल उदाहरण है। वास्तविक शुल्क इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित भुगतान अंतिम नियमों के दायरे में आता है या नहीं।
5. क्या यूपीआई शुल्क का असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है?
इसका असर अंतिम नियमों और व्यापारियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। यदि व्यापारियों की भुगतान लागत बढ़ती है, तो कुछ कारोबारियों को कीमतों या अपनी कारोबारी नीतियों में बदलाव करने पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, ग्राहकों से अतिरिक्त रकम ली जाएगी या नहीं, यह अभी तय मानकर नहीं चलना चाहिए।
अस्वीकरण
यह लेख उपलब्ध जानकारी पर आधारित है और केवल सामान्य जानकारी के लिए है। शुल्क लागू होने की अंतिम तारीख और शर्तों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से करें।