अमेरिका में महंगाई की रफ्तार कुछ साल पहले के मुकाबले धीमी जरूर हुई है, लेकिन लंबे समय तक बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों की जेब पर अब भी दिखाई दे रहा है। मौजूदा समय में महंगाई दर करीब 3.4 प्रतिशत है, जबकि 2022 में यह 9 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई थी। हालांकि कीमतें अब पहले जैसी तेजी से नहीं बढ़ रही हैं, लेकिन 2020 के मुकाबले रोजमर्रा की कई चीजें करीब 30 प्रतिशत तक महंगी हो चुकी हैं। नई कार, बच्चों की देखभाल, मांस और घर में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुओं की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
अमेरिका में कई वर्षों की महंगाई का असर
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि लोग केवल किसी एक महीने की महंगाई को नहीं देखते, बल्कि कई वर्षों में बढ़ी कुल कीमतों को महसूस करते हैं। यही वजह है कि महंगाई की दर कम होने के बावजूद खरीदारी के समय लोगों को चीजें महंगी लगती हैं।

कुछ खाद्य वस्तुओं जैसे अंडे, मक्खन और पनीर की कीमतों में पिछले एक साल में कमी आई है, लेकिन दूसरी तरफ ईंधन की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। घर खरीदने वालों के लिए भी स्थिति आसान नहीं हुई है, क्योंकि कर्ज की ब्याज दरें 7 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई हैं और मकानों की कीमतें भी काफी बढ़ी हैं।
पिछले छह वर्षों में अमेरिका में वस्तुओं और सेवाओं की औसत कीमत लगभग 29 प्रतिशत बढ़ी है। इससे पहले के छह वर्षों में कीमतों में वृद्धि इसकी तुलना में करीब एक-तिहाई रही थी। महामारी के बाद कॉफी, सफाई का सामान, मनोरंजन सेवाओं और दूसरी घरेलू जरूरतों की कीमतें बढ़ीं। सार्वजनिक परिवहन से लेकर डाक टिकट तक कई सेवाएं पहले की तुलना में महंगी हो गई हैं।
महंगाई से बढ़ा घरेलू खर्च
- रोजमर्रा का सामान: कई घरेलू वस्तुओं की कीमतें 2020 के मुकाबले काफी बढ़ी हैं।
- घर खरीदना: ऊंची ब्याज दरों और बढ़ी कीमतों से घर खरीदना महंगा हुआ है।
- स्वास्थ्य सेवाएं: लोगों की जेब से होने वाला खर्च भी बढ़ा है।
- कर्ज का दबाव: बढ़ते कर्ज के कारण वेतन वृद्धि का बड़ा हिस्सा भुगतान में जा रहा है।
स्वास्थ्य, घर और सेवाओं की बढ़ती लागत
महंगाई का असर केवल बाजार में खरीदी जाने वाली चीजों तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का अपनी जेब से होने वाला खर्च भी 2020 से 2026 के बीच काफी बढ़ा है। घर, बच्चों की देखभाल, वाहन की मरम्मत और पालतू जानवरों से जुड़ी सेवाओं की लागत भी आम वेतन वृद्धि से ज्यादा तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही कई परिवारों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा है। इससे वेतन में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है और लोगों की वास्तविक आर्थिक राहत कम हो जाती है।
हालांकि अमेरिकी परिवार अभी भी खर्च कर रहे हैं और घरेलू खर्च में वृद्धि हुई है। शेयर बाजार में भी इस साल अच्छी बढ़त देखी गई है और बेरोजगारी दर कम बनी हुई है। इसके बावजूद लोगों का आर्थिक भरोसा उतना मजबूत नहीं है। इसका एक कारण यह है कि आम ग्राहक किसी वस्तु की मौजूदा कीमत की तुलना कई साल पहले की कीमत से करता है। लोग अक्सर पुरानी कीमतों को अपने मन में एक आधार बना लेते हैं और बाद में हुई बढ़ोतरी ज्यादा महसूस करते हैं।
मध्यावधि चुनाव पर पड़ सकता है असर
महंगाई का असर आगामी मध्यावधि चुनाव पर भी पड़ सकता है। अमेरिका में आमतौर पर लगातार बढ़ती कीमतें सत्ता में मौजूद दल के लिए चुनौती बन सकती हैं। पहले भी महंगाई चुनावी बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। अब मौजूदा सरकार से भी लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि कई जरूरी चीजों की कीमतें अब तक इतनी ऊंची क्यों हैं।
आम लोगों के लिए कार खरीदने और ईंधन भराने का खर्च काफी बढ़ चुका है। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मतदाता कीमतों को सीधे सरकार की नीतियों से जोड़ सकते हैं। आयात शुल्क जैसी नीतियों के बाद कुछ सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी को भी उपभोक्ताओं ने महसूस किया है। इसी कारण चुनाव के दौरान महंगाई और रोजमर्रा के खर्च पर राजनीतिक दलों का ध्यान बना हुआ है।
चुनाव में महंगाई क्यों अहम मुद्दा है?
- रोजमर्रा का खर्च: ईंधन और जरूरी सामान की कीमत सीधे परिवारों के बजट को प्रभावित करती है।
- कम आय वाले परिवार: इन परिवारों की कमाई का बड़ा हिस्सा जरूरी खर्च में जाता है।
- सरकारी नीतियां: मतदाता कीमतों को सरकार की नीतियों से जोड़ सकते हैं।
- मतदाताओं का भरोसा: कई वर्षों में बढ़ी कीमतें आर्थिक भरोसे पर असर डाल सकती हैं।
महंगाई दर और बढ़ी कीमतों के बीच अंतर
हालांकि दोनों प्रमुख दल कीमतों को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। सत्तारूढ़ पक्ष इस बात पर जोर दे रहा है कि मौजूदा महंगाई दर कुछ वर्ष पहले की तुलना में काफी कम है, जबकि विपक्ष और कई मतदाता रोजमर्रा की वस्तुओं की ऊंची कीमतों को ज्यादा महत्वपूर्ण मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार चुनाव पर महंगाई का असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि समाज के किस वर्ग पर बढ़ते खर्च का सबसे ज्यादा दबाव है। कम आय वाले परिवार आमतौर पर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा ईंधन और जरूरी सामान पर खर्च करते हैं, इसलिए उनके लिए कीमतों में थोड़ी वृद्धि भी ज्यादा असर डाल सकती है। इस वजह से आने वाले मध्यावधि चुनाव में केवल महंगाई की मौजूदा दर ही नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों में बढ़ी कुल कीमतें भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती हैं।
अमेरिका की आर्थिक और महंगाई संबंधी जानकारी के लिए अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अमेरिका में मौजूदा महंगाई दर कितनी है?
मौजूदा समय में अमेरिका में महंगाई दर करीब 3.4 प्रतिशत बताई गई है।
2022 में अमेरिका की महंगाई दर कितनी पहुंच गई थी?
2022 में अमेरिका की महंगाई दर 9 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई थी।
2020 के मुकाबले अमेरिका में कीमतें कितनी बढ़ी हैं?
2020 के मुकाबले रोजमर्रा की कई चीजें करीब 30 प्रतिशत तक महंगी हो चुकी हैं।
अमेरिका में महंगाई का आम परिवारों पर क्या असर पड़ा है?
घर, स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों की देखभाल, वाहन की मरम्मत, ईंधन और जरूरी सामान की बढ़ी लागत ने परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ाया है।
क्या महंगाई आगामी मध्यावधि चुनाव को प्रभावित कर सकती है?
हां, महंगाई और रोजमर्रा की ऊंची कीमतें मतदाताओं के आर्थिक फैसलों और चुनावी बहस को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती हैं।
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य समाचार संदर्भ के लिए है। आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं।
