Utsav Malhotra की Career Advice: सफलता से पहले संतुलन

Noise के मुख्य परिचालन अधिकारी उत्सव मल्होत्रा का मानना है कि करियर में आगे बढ़ना किसी छोटी दौड़ या लंबी मैराथन जैसा नहीं, बल्कि टेस्ट मैच जैसा है। इसमें हालात बदलते रहते हैं, इसलिए हर समय सबसे आगे रहने के बजाय धैर्य, हुनर और टीम के साथ काम करना जरूरी है। उनकी किताब The Average Advantage युवाओं और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को करियर, काम के दबाव और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने पर सोचने का मौका देती है।

Career Advice: हर समय खुद को साबित करना जरूरी नहीं

मल्होत्रा के अनुसार, नौकरी में सफलता को केवल पद, वेतन, तारीफ या दूसरों की बनाई कसौटी से नहीं मापना चाहिए। हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि उसके लिए सफलता का अर्थ क्या है। जब इंसान केवल बाहरी उम्मीदों के पीछे भागता है, तो वह अपनी जरूरतों और खुशियों को नजरअंदाज कर सकता है।

उन्होंने माना कि वह खुद भी लंबे समय तक लगातार काम करने और दूसरों से आगे निकलने की दौड़ का हिस्सा रहे। लेकिन जब काम का दबाव स्वास्थ्य और जीवन पर असर डालने लगे, तब यह समझना जरूरी हो जाता है कि हर लक्ष्य के लिए अपनी पूरी ऊर्जा खर्च करना सही नहीं है।

🧭 करियर में संतुलन की अहम बातें

  • अपनी सफलता: दूसरों के पैमाने के बजाय अपने लक्ष्य तय करें।
  • काम का दबाव: लगातार व्यस्त रहने को कामयाबी का प्रमाण न मानें।
  • हुनर: दिखावे से ज्यादा अपनी क्षमता और काम की गुणवत्ता पर ध्यान दें।
  • सेहत: आराम और निजी जीवन के लिए भी समय रखें।
  • लंबी सोच: करियर में हर दिन शानदार प्रदर्शन करना जरूरी नहीं।

Gen Z के लिए काम और जुनून का मतलब

मल्होत्रा का कहना है कि आज के युवा काम की पुरानी परंपराओं पर सवाल उठा रहे हैं। वे केवल इसलिए किसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करना चाहते क्योंकि पहले से ऐसा होता आया है। जब उनकी अपेक्षाओं और कार्यस्थल की वास्तविकता में अंतर होता है, तो असंतोष, छुट्टियां लेने या नौकरी छोड़ने जैसे कदम सामने आ सकते हैं।

उनके मुताबिक, जुनून को खोजने का मतलब यह नहीं कि इंसान अपनी पसंद का काम चुनते ही सफल हो जाएगा। किसी काम में मेहनत करके हुनर विकसित करने और उसमें बेहतर बनने से रुचि गहरी हो सकती है। इसलिए शुरुआती असफलता को यह मानने का कारण नहीं बनाना चाहिए कि वह काम आपके लिए नहीं है।

Office Politics और Performance Review को समझना

किताब में ऑफिस की राजनीति और काम के मूल्यांकन पर भी चर्चा की गई है। मल्होत्रा के अनुसार, किसी कर्मचारी की पहचान केवल इस बात से नहीं होनी चाहिए कि वह कितना दिखाई देता है। असली महत्व उस हुनर और योगदान का है जो वह टीम और कारोबार के लिए लाता है। केवल अपनी मौजूदगी दिखाने पर ध्यान देने से लंबे समय में नुकसान हो सकता है।

प्रदर्शन का आकलन करते समय नतीजों के साथ प्रयास और काम करने के तरीके को भी देखना चाहिए। उदाहरण के लिए, कोई कर्मचारी पूरी कोशिश के बाद भी बिक्री का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता, तो यह समझना जरूरी है कि वजह उसकी कोशिश थी, उत्पाद की समस्या थी या बाजार की स्थिति। सिर्फ अंतिम आंकड़े देखकर फैसला करना अधूरा हो सकता है।

📊 बेहतर Performance Review कैसे हो

  • काम और नतीजे: लक्ष्य के साथ किए गए प्रयास को भी समझें।
  • टीम की भूमिका: उत्पाद और योजना की जिम्मेदारी केवल एक कर्मचारी की नहीं होती।
  • सही मापदंड: आंकड़ों के साथ काम की गुणवत्ता और व्यवहार पर भी ध्यान दें।
  • दिखावे से बचें: केवल वरिष्ठों के सामने नजर आने से बेहतर प्रदर्शन साबित नहीं होता।
  • साझा लक्ष्य: संगठन की सफलता के लिए विभागों को मिलकर काम करना चाहिए।

टीम में नेतृत्व और साथियों से तालमेल

मल्होत्रा मानते हैं कि प्रबंधन केवल वरिष्ठ अधिकारियों से निर्देश लेने या अपनी टीम को निर्देश देने तक सीमित नहीं है। सहकर्मियों के साथ तालमेल रखना भी जरूरी है। कई बार किसी खास काम में दूसरे व्यक्ति के पास ज्यादा अनुभव या विशेषज्ञता होती है, इसलिए उसे नेतृत्व करने देना बेहतर होता है।

हर परिस्थिति में खुद को नेता साबित करना जरूरी नहीं। टीम का लक्ष्य व्यक्ति विशेष की प्रतिष्ठा से बड़ा होना चाहिए। अगर किसी परियोजना में डिजाइन विशेषज्ञ बेहतर निर्णय ले सकता है, तो बाकी लोगों को उसकी समझ पर भरोसा करना चाहिए। अलग-अलग लोगों की ताकत का सही उपयोग टीम को बेहतर नतीजे दे सकता है।

किताब The Average Advantage के बारे में अधिक जानकारी के लिए पाठक प्रकाशक Rupa Publications की वेबसाइट देख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. The Average Advantage किताब किस बारे में है?

यह किताब करियर में संतुलन, काम के दबाव, ऑफिस की राजनीति और टीम के साथ काम करने जैसे विषयों पर बात करती है। इसका संदेश है कि सफलता के लिए लगातार खुद को थकाना जरूरी नहीं, बल्कि अपनी क्षमता और सीमाओं को समझना भी अहम है।

2. उत्सव मल्होत्रा करियर की तुलना टेस्ट मैच से क्यों करते हैं?

टेस्ट मैच में परिस्थितियां बदलती रहती हैं और हर समय आक्रामक खेलना सही नहीं होता। इसी तरह करियर में भी कभी तेजी से काम करना पड़ता है, तो कभी धैर्य रखना और दूसरों से सीखना जरूरी होता है। लंबे समय की सोच महत्वपूर्ण है।

3. क्या जुनून के पीछे चलने से सफलता मिलती है?

मल्होत्रा के विचार में केवल पसंद का काम चुन लेना सफलता की गारंटी नहीं है। मेहनत, अभ्यास और कौशल बढ़ाने से व्यक्ति किसी काम में बेहतर बन सकता है। समय के साथ उस काम में रुचि और आत्मविश्वास भी बढ़ सकते हैं।

4. कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कैसे होना चाहिए?

मूल्यांकन में लक्ष्य के नतीजों के साथ कर्मचारी के प्रयास, काम की गुणवत्ता और उपलब्ध संसाधनों को भी देखना चाहिए। कभी-कभी खराब नतीजे किसी उत्पाद या बाजार की समस्या से आते हैं। इसलिए निष्पक्ष समीक्षा में व्यक्तिगत और संगठनात्मक जिम्मेदारी दोनों शामिल होनी चाहिए।

5. कार्यस्थल पर टीमवर्क क्यों जरूरी है?

टीमवर्क अलग-अलग लोगों के हुनर और अनुभव को एक साझा लक्ष्य के लिए जोड़ता है। हर व्यक्ति हर विषय का विशेषज्ञ नहीं हो सकता। जरूरत के अनुसार सही व्यक्ति को नेतृत्व देना, सहकर्मियों की बात सुनना और जिम्मेदारी साझा करना बेहतर परिणाम पाने में मदद करता है।

निष्कर्ष

उत्सव मल्होत्रा की सलाह है कि करियर को लगातार दौड़ने की जगह लंबे सफर की तरह देखें। अपने हुनर को बेहतर बनाएं, टीम से सीखें और सेहत की अनदेखी न करें। स्थायी सफलता केवल पद या पहचान से नहीं, संतुलित काम और समझदारी से भी बनती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध प्रकाशित सामग्री पर आधारित है। विचार संबंधित व्यक्ति के हैं। करियर से जुड़े निर्णय अपनी परिस्थितियों और जरूरतों को समझकर लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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