रिटायरमेंट के लिए EPF और VPF सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाते हैं। VPF में कर्मचारी अपनी इच्छा से अतिरिक्त योगदान कर सकता है, लेकिन निवेश से पहले टैक्स नियमों को समझना जरूरी है।
अगर आप रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित निवेश की योजना बना रहे हैं तो कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) अच्छे विकल्प माने जाते हैं। EPF में कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान अनिवार्य होता है, जबकि VPF में कर्मचारी अपनी इच्छा से EPF के अलावा अतिरिक्त पैसा जमा कर सकता है। इससे लंबे समय में बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करने में मदद मिल सकती है।
VPF क्या है और इसमें कैसे होता है निवेश?
VPF में कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 100% तक अतिरिक्त योगदान कर सकता है। इसमें मिलने वाला ब्याज EPF के बराबर ही होता है। वित्त वर्ष 2025-26 में EPF और VPF पर 8.25% सालाना ब्याज मिल रहा है। हालांकि, VPF में कंपनी की तरफ से अतिरिक्त योगदान नहीं किया जाता है। कंपनी केवल EPF के तय योगदान में ही हिस्सा देती है।
💰 VPF निवेश की मुख्य बातें
- योगदान: बेसिक सैलरी और DA का 100% तक
- ब्याज दर: EPF के बराबर
- वित्त वर्ष 2025-26 ब्याज: 8.25% सालाना
- कंपनी योगदान: अतिरिक्त योगदान नहीं
- सुरक्षा: सरकार समर्थित निवेश विकल्प
VPF में निवेश करने वाले कर्मचारियों के लिए टैक्स से जुड़े कुछ नियम हैं। पहले VPF पर मिलने वाला पूरा ब्याज टैक्स फ्री होता था, लेकिन सरकार ने 2022 से ज्यादा योगदान करने वालों के लिए नियम बदल दिए हैं।
VPF पर टैक्स नियम क्या हैं?
अगर किसी कर्मचारी का EPF और VPF में कुल सालाना योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो 2.5 लाख रुपये से अधिक राशि पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आएगा। यह ब्याज कर्मचारी की आय में जुड़ जाएगा और उस पर लागू टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा।
अगर किसी कर्मचारी के EPF में कंपनी की ओर से योगदान नहीं किया जाता है, तो यह सीमा 5 लाख रुपये तक हो सकती है। ऐसे मामलों में 5 लाख रुपये से ज्यादा योगदान पर मिलने वाला ब्याज टैक्स योग्य होगा।
📌 VPF टैक्स और निकासी नियम
- टैक्स फ्री सीमा: ₹2.5 लाख तक योगदान
- विशेष स्थिति: कंपनी योगदान नहीं होने पर सीमा ₹5 लाख
- 80C लाभ: पुराने टैक्स सिस्टम में ₹1.5 लाख तक
- निकासी: 5 साल बाद टैक्स फ्री
- समय से पहले निकासी: टैक्स नियम लागू हो सकते हैं
VPF में निवेश कैसे शुरू करें?
VPF में निवेश शुरू करने के लिए कर्मचारी को अपनी कंपनी के HR या पेरोल विभाग से संपर्क करना होता है। कर्मचारी को एक फॉर्म देकर यह बताना होता है कि वह हर महीने कितनी राशि या कितने प्रतिशत सैलरी VPF में जमा करना चाहता है। इसे सीधे EPFO पोर्टल से शुरू नहीं किया जा सकता है।
VPF में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर पुराने टैक्स सिस्टम के तहत इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिल सकती है। इसके अलावा अगर VPF की राशि को पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद निकाला जाता है तो उस पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन पांच साल से पहले निकासी करने पर टैक्स नियम लागू हो सकते हैं।
क्या VPF में निवेश करना फायदेमंद है?
VPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें EPF जैसी ही ब्याज दर मिलती है और यह सरकार समर्थित सुरक्षित निवेश विकल्प है। हालांकि, निवेश करने से पहले कर्मचारियों को अपनी आय, टैक्स स्थिति और लंबे समय के वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए।
Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और टैक्स नियमों की जांच जरूर करें।

