सेबी ने वारी एनर्जीज के प्रमोटर शेयरों को फैमिली ट्रस्ट में ट्रांसफर करने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह फैसला उत्तराधिकार योजना और पारिवारिक संपत्ति प्रबंधन को आसान बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
भारतीय शेयर बाजार के नियामक सेबी (SEBI) ने वारी एनर्जीज लिमिटेड (Waaree Energies) के प्रमोटर शेयरों को एक फैमिली ट्रस्ट में ट्रांसफर करने की योजना को बड़ी राहत दी है।
SEBI ने फैमिली ट्रस्ट को शेयर ट्रांसफर की दी मंजूरी
सेबी ने कहा कि इस ट्रांसफर के लिए कंपनी को अनिवार्य ओपन ऑफर (Open Offer) लाने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि यह कोई व्यावसायिक सौदा नहीं बल्कि परिवार के भीतर उत्तराधिकार (Succession Planning) और संपत्ति के बेहतर प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। इस प्रक्रिया से कंपनी के नियंत्रण या आम निवेशकों के हितों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
इस मंजूरी के तहत सीटी दोशी फैमिली ट्रस्ट (CT Doshi Family Trust) प्रमोटर चिमनलाल त्रिभुवनदास दोशी की करीब 44.88 प्रतिशत प्रत्यक्ष हिस्सेदारी अपने नाम करेगा। इसके अलावा, वारी सस्टेनेबल फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड में लगभग पूरी हिस्सेदारी हासिल करने के जरिए ट्रस्ट को कंपनी में करीब 18.34 प्रतिशत अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी भी मिलेगी।
📌 शेयर ट्रांसफर की प्रमुख बातें
- नियामक: SEBI
- कंपनी: Waaree Energies Ltd.
- ट्रस्ट: CT Doshi Family Trust
- प्रत्यक्ष हिस्सेदारी: 44.88%
- अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी: 18.34%
- ओपन ऑफर: आवश्यक नहीं
सामान्य परिस्थितियों में इतनी बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने पर सेबी के नियमों के अनुसार ओपन ऑफर देना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में सेबी ने इसे पारिवारिक पुनर्गठन माना है।
सेबी ने अपने आदेश में कहा कि इस ट्रांसफर के बाद भी कंपनी की कुल प्रमोटर हिस्सेदारी 64.22 प्रतिशत ही रहेगी और आम निवेशकों की हिस्सेदारी 35.78 प्रतिशत बनी रहेगी।
कंपनी के नियंत्रण में नहीं होगा बदलाव
कंपनी के प्रबंधन, नियंत्रण या फैसले लेने की व्यवस्था में भी कोई बदलाव नहीं होगा। ट्रस्ट के लाभार्थी केवल प्रमोटर परिवार के सदस्य होंगे, जिनमें चिमनलाल दोशी के बच्चे, उनके जीवनसाथी और परिवार की अगली पीढ़ी शामिल है।
सेबी के नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रमोटर का नाम कम से कम तीन साल तक स्टॉक एक्सचेंज के रिकॉर्ड में प्रमोटर के रूप में दर्ज होना चाहिए। हालांकि, वारी एनर्जीज की लिस्टिंग अक्टूबर 2024 में हुई थी, इसलिए यह शर्त पूरी तरह लागू नहीं हो सकती थी। इसके बावजूद सेबी ने माना कि कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में वर्ष 2021 और 2023 से ही प्रमोटर की जानकारी दी जा चुकी थी। साथ ही, 91 वर्षीय चिमनलाल दोशी की उम्र को देखते हुए यह कदम उत्तराधिकार योजना के लिए जरूरी माना गया।
📊 SEBI के फैसले की मुख्य शर्तें
- प्रमोटर हिस्सेदारी: 64.22% बनी रहेगी
- पब्लिक शेयरहोल्डिंग: 35.78%
- नियंत्रण: कोई बदलाव नहीं
- छूट की वैधता: आदेश की तारीख से 1 वर्ष
- रिपोर्टिंग: ट्रांसफर के 21 दिनों के भीतर SEBI को रिपोर्ट
सेबी के टेकओवर पैनल ने भी पाया कि इस ट्रांसफर से कंपनी के वास्तविक नियंत्रण में कोई बदलाव नहीं होगा और सार्वजनिक शेयरधारकों के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। इसी आधार पर सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्श्नेय ने छूट देने की मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए तीन साल वाली शर्त का पालन मूल उद्देश्य के अनुसार माना जा सकता है और इस ट्रांसफर से आम निवेशकों के हित प्रभावित नहीं होंगे।
एक वर्ष के भीतर पूरी करनी होगी प्रक्रिया
सेबी की यह छूट आदेश जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक मान्य रहेगी। इस अवधि के भीतर फैमिली ट्रस्ट को शेयर ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ट्रांसफर पूरा होने के 21 दिनों के भीतर सेबी को इसकी रिपोर्ट भी जमा करनी होगी और आगे भी सभी जरूरी खुलासों तथा नियामकीय नियमों का पालन करना होगा।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक दस्तावेज और विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

