मल्टी-कैप बनाम मल्टी-एसेट फंड: 1, 3 और 5 साल का रिटर्न

म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग श्रेणियों की योजनाएं किस तरह पैसा लगाती हैं और उनका जोखिम किस प्रकार का होता है। मल्टी-कैप और मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड के नाम मिलते-जुलते लग सकते हैं, लेकिन दोनों की निवेश रणनीति अलग है। मल्टी-कैप फंड शेयर बाजार में बड़ी, मध्यम और छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं, जबकि मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड शेयरों के साथ अन्य परिसंपत्ति वर्गों में भी पैसा लगा सकते हैं।

वैल्यू रिसर्च के 16 अक्टूबर 2026 तक के श्रेणी-औसत आंकड़ों के अनुसार, एक साल और तीन साल की अवधि में मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड का प्रदर्शन बेहतर रहा। पांच साल की अवधि में मल्टी-कैप फंड आगे रहे। ये आंकड़े श्रेणी के औसत वार्षिकीकृत रिटर्न हैं, किसी एक योजना के रिटर्न या भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं।

मल्टी-कैप म्यूचुअल फंड क्या हैं?

मल्टी-कैप फंड खुले रूप वाले इक्विटी म्यूचुअल फंड होते हैं। ये बड़ी, मध्यम और छोटी बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों के अनुसार, ऐसी योजनाओं को अपनी कुल परिसंपत्तियों का कम से कम 75 प्रतिशत इक्विटी और इक्विटी से जुड़े साधनों में लगाना होता है। साथ ही, बड़ी, मध्यम और छोटी कंपनियों में से प्रत्येक श्रेणी में कम से कम 25 प्रतिशत निवेश रखना जरूरी है।

इस नियम के कारण मल्टी-कैप फंड को तीनों आकार की कंपनियों में निवेश बनाए रखना पड़ता है। बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयर भी इनके प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं। इसलिए बाजार में तेजी के साथ-साथ गिरावट के दौरान भी इनकी कीमत में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड कैसे काम करते हैं?

मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड हाइब्रिड श्रेणी की योजनाएं हैं। इन्हें कम से कम तीन परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करना होता है और प्रत्येक में न्यूनतम 10 प्रतिशत आवंटन रखना होता है। योजना के उद्देश्य के अनुसार इनमें शेयर, ऋण साधन और सोना या चांदी जैसी वस्तुएं शामिल हो सकती हैं। कुछ योजनाएं एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) या अन्य अनुमत साधनों के माध्यम से भी निवेश करती हैं।

इन फंडों का उद्देश्य निवेश को अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों में बांटना है। जब शेयर बाजार कमजोर हो, तो अन्य परिसंपत्तियों का प्रदर्शन कुल रिटर्न को सहारा दे सकता है; हालांकि, ऐसा होना तय नहीं है। जोखिम और नतीजे इस बात पर निर्भर करते हैं कि योजना किस परिसंपत्ति में कितना निवेश करती है और बाजार की परिस्थितियां कैसी रहती हैं।

मुख्य अंतर: मल्टी-कैप फंड मुख्य रूप से अलग-अलग आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड शेयरों के अलावा ऋण साधनों और सोने-चांदी जैसी परिसंपत्तियों में भी निवेश कर सकते हैं।

एक, तीन और पांच साल का रिटर्न: किस श्रेणी ने बाजी मारी?

16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध वैल्यू रिसर्च के श्रेणी-औसत आंकड़ों के अनुसार दोनों श्रेणियों का प्रदर्शन निवेश अवधि के हिसाब से अलग रहा। नीचे दिए गए आंकड़े चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के आधार पर हैं।

निवेश अवधिमल्टी-कैप फंडमल्टी-एसेट एलोकेशन फंडआगे कौन रहा?
1 साल0.32%1.84%मल्टी-एसेट एलोकेशन
3 साल12.27%12.86%मल्टी-एसेट एलोकेशन
5 साल11.03%10.66%मल्टी-कैप

स्रोत: वैल्यू रिसर्च; 16 अक्टूबर 2026 तक के श्रेणी-औसत रिटर्न। पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता।

एक साल में मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड का श्रेणी-औसत रिटर्न 1.84 प्रतिशत रहा, जबकि मल्टी-कैप फंड का रिटर्न 0.32 प्रतिशत था। तीन साल की अवधि में भी मल्टी-एसेट श्रेणी 12.86 प्रतिशत सीएजीआर के साथ मल्टी-कैप के 12.27 प्रतिशत से आगे रही।

पांच साल की अवधि में तस्वीर उलट गई। मल्टी-कैप फंड ने 11.03 प्रतिशत सीएजीआर दिया, जो मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड के 10.66 प्रतिशत से अधिक था। इससे पता चलता है कि किसी एक अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने वाली श्रेणी दूसरी अवधि में पीछे भी रह सकती है।

रिटर्न के आंकड़े कैसे समझें? ये पूरी श्रेणी के औसत आंकड़े हैं, किसी खास फंड का प्रदर्शन नहीं। अलग-अलग योजनाओं के रिटर्न, खर्च, निवेश रणनीति और जोखिम में अंतर हो सकता है। केवल पिछला रिटर्न देखकर निवेश का फैसला न करें।

निवेशक को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

मल्टी-कैप फंड में निवेश करने से पहले यह समझें कि तीनों बाजार पूंजीकरण श्रेणियों में अनिवार्य निवेश के कारण फंड की कीमत में कितना उतार-चढ़ाव आ सकता है। मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में तेजी के दौरान अच्छा अवसर हो सकता है, लेकिन गिरावट के समय नुकसान भी अधिक हो सकता है।

मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड उन निवेशकों के लिए समझने योग्य विकल्प हो सकते हैं जो एक ही योजना में कई परिसंपत्ति वर्गों का मिश्रण चाहते हैं। फिर भी, इन्हें जोखिम-मुक्त नहीं समझना चाहिए। योजना का परिसंपत्ति आवंटन, निवेश अवधि, खर्च अनुपात और जोखिम स्तर पढ़ना जरूरी है। फंड की आधिकारिक जानकारी और दस्तावेज़ों के लिए एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के संसाधन भी देखे जा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. मल्टी-कैप और मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

मल्टी-कैप फंड बड़ी, मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड कम से कम तीन परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करते हैं, जिनमें शेयर, ऋण साधन और सोना या चांदी शामिल हो सकते हैं।

2. एक साल के रिटर्न में कौन-सी श्रेणी आगे रही?

16 अक्टूबर 2026 तक के दिए गए श्रेणी-औसत आंकड़ों में मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड 1.84 प्रतिशत रिटर्न के साथ आगे रहे। मल्टी-कैप फंड का एक साल का श्रेणी-औसत रिटर्न 0.32 प्रतिशत था।

3. पांच साल के रिटर्न में किसने बेहतर प्रदर्शन किया?

पांच साल की अवधि में मल्टी-कैप फंड का श्रेणी-औसत सीएजीआर 11.03 प्रतिशत रहा, जबकि मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड का 10.66 प्रतिशत था। यह तुलना केवल बताई गई अवधि के ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित है।

4. क्या मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड में जोखिम नहीं होता?

नहीं। कई परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करने से जोखिम का वितरण हो सकता है, लेकिन बाजार में गिरावट या अन्य कारणों से नुकसान संभव है। जोखिम योजना के आवंटन, साधनों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है।

5. निवेश से पहले किन बातों की जांच करनी चाहिए?

अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और नुकसान सहने की क्षमता के साथ योजना का जोखिम स्तर, परिसंपत्ति आवंटन, खर्च अनुपात और आधिकारिक दस्तावेज़ देखें। जरूरत हो तो सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें।

निष्कर्ष

उपलब्ध आंकड़ों में मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड एक और तीन साल की अवधि में आगे रहे, जबकि पांच साल में मल्टी-कैप फंड ने बेहतर रिटर्न दिया। सही विकल्प निवेशक के लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि पर निर्भर करता है; केवल पुराने रिटर्न के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए।

अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। निवेश निर्णय से पहले सेबी-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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