एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को ज्यादा हलचल नहीं दिखी। निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। पिछले सप्ताह तेल की कीमतों में अच्छी बढ़त दर्ज हुई थी और ईरान युद्ध को खत्म करने की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं होने से महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंता बनी हुई है।
पश्चिम एशिया तनाव से बाजार की नजर तेल पर
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच शांति वार्ता को लेकर भी अभी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz से तेल टैंकरों की आवाजाही भी रुकी हुई है। ईरान ने शनिवार को अमेरिका से हार स्वीकार करने को कहा, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष जारी रहने के दौरान लोगों से पेट्रोल की ऊंची कीमतों के लिए तैयार रहने को कहा।

दक्षिणी लेबनान में शनिवार को इजरायली हमलों में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हाल के हफ्तों में यह सबसे घातक हमलों में से एक था। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की चिंता बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
कच्चे तेल की कीमतों में पिछले सप्ताह बड़ी तेजी देखने को मिली। Brent crude सोमवार को करीब 88.50 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा। इसमें पिछले सप्ताह करीब 6 प्रतिशत की बढ़त हुई थी। अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 0.3 प्रतिशत घटकर 82.12 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि पिछले सप्ताह इसमें 5.4 प्रतिशत की तेजी आई थी।
AMP के मुख्य अर्थशास्त्री शेन ओलिवर के अनुसार, ईरान और Hormuz से जुड़ी स्थिति का अभी कोई समाधान नहीं हुआ है। उनके अनुमान के मुताबिक, तेल की कीमतें 70 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रह सकती हैं। अगर कीमत 100 डॉलर से ऊपर जाती है तो अमेरिका स्थिति को शांत करने की कोशिश कर सकता है।
🛢️ तेल बाजार पर पश्चिम एशिया तनाव का असर
- Brent crude: करीब 88.50 डॉलर प्रति बैरल
- पिछले सप्ताह Brent: करीब 6 प्रतिशत तेजी
- अमेरिकी कच्चा तेल: 82.12 डॉलर प्रति बैरल
- पिछले सप्ताह अमेरिकी तेल: 5.4 प्रतिशत तेजी
- मुख्य चिंता: Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति
- संभावित दायरा: 70 से 100 डॉलर प्रति बैरल
एशियाई बाजारों में सीमित कारोबार
एशियाई बाजारों में सोमवार को जापान का Nikkei करीब 0.4 प्रतिशत ऊपर रहा। ऑस्ट्रेलिया के संसाधन आधारित शेयरों में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई। जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का व्यापक सूचकांक लगभग स्थिर रहा। दक्षिण कोरिया का बाजार सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहा।
निवेशकों की नजर अब चीन के जुलाई के आर्थिक आंकड़ों पर है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में वैश्विक AI मांग के कारण निर्यात में तेजी देखने को मिली थी। अनुमान है कि औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 5.3 प्रतिशत से घटकर 4.8 प्रतिशत रह सकती है। खुदरा बिक्री में करीब 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।
अमेरिकी बाजार और ब्याज दरों पर नजर
यूरोप में EUROSTOXX 50 के वायदा कारोबार में 0.2 प्रतिशत की बढ़त रही। अमेरिका में S&P 500 के वायदा भाव 0.1 प्रतिशत ऊपर रहे, जबकि Nasdaq के वायदा में 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। S&P 500 पिछले सप्ताह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था।
शेयर बाजारों में हाल की तेजी की एक बड़ी वजह यह है कि अगले महीने अमेरिकी Federal Reserve द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम हुई है। कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद बाजार में अब दर बढ़ने की संभावना करीब 69 प्रतिशत मानी जा रही है।
📊 इस सप्ताह बाजार के अहम संकेत
- अमेरिकी ब्याज दर: बढ़ोतरी की संभावना में कमी
- अमेरिकी खुदरा बिक्री: नौ महीने में पहली बार गिरावट
- उपभोक्ता भरोसा: अनुमान से ज्यादा कमजोर
- अमेरिकी PMI: इस सप्ताह महत्वपूर्ण आंकड़ा
- कंपनियों के नतीजे: Home Depot, Target और Walmart पर नजर
- मुख्य जोखिम: युद्ध, तेल कीमतें और महंगाई
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर
जुलाई में अमेरिका की खुदरा बिक्री नौ महीने में पहली बार घटी। उपभोक्ताओं का भरोसा भी अनुमान से ज्यादा कमजोर हुआ। महंगाई से जुड़े कुछ नरम आंकड़ों ने भी तुरंत ब्याज दर बढ़ाने की जरूरत को कम किया है।
इस सप्ताह अमेरिका के अगस्त S&P Purchasing Managers’ Index यानी PMI के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि साल के बीच में कारोबार में आई तेजी आगे भी जारी रहती है या नहीं। इस सप्ताह कुछ बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे भी आने हैं, जिनमें Home Depot, Target और Walmart शामिल हैं। निवेशक इन कंपनियों के नतीजों से अमेरिकी उपभोक्ताओं की स्थिति का अंदाजा लगाने की कोशिश करेंगे।
बॉन्ड, डॉलर और सोने में हलचल
अमेरिकी बॉन्ड बाजार में सोमवार को सरकारी बॉन्ड की पैदावार में थोड़ी गिरावट आई। दो साल की Treasury yield 2 आधार अंक घटकर 4.156 प्रतिशत रही। 10 साल की yield भी 1 आधार अंक गिरकर 4.684 प्रतिशत पर आ गई।
कमजोर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर डॉलर पर भी पड़ा। यूरो 0.1 प्रतिशत बढ़कर 1.1578 डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, डॉलर जापानी येन के मुकाबले 0.1 प्रतिशत कमजोर होकर 159.15 येन पर रहा।
सोने की कीमत सोमवार को करीब 4,381 डॉलर प्रति औंस पर बनी रही। पिछले सप्ताह इसमें 0.8 प्रतिशत की बढ़त हुई थी। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में तनाव, तेल की कीमतें, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदें और आने वाले आर्थिक आंकड़े इस सप्ताह वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
