नई दिल्ली में होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में कर संबंधी आंकड़ों के इस्तेमाल और कुछ महत्वपूर्ण राहत प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक में वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े आंकड़ों को सांख्यिकी मंत्रालय के साथ साझा करने के तरीके पर विचार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य देश में आर्थिक गतिविधियों का अधिक सही और समय पर आकलन करना बताया जा रहा है।
जीएसटी आंकड़ों के इस्तेमाल पर हो सकती है चर्चा
मिली जानकारी के अनुसार, कर विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल व्यापार में लाभ के स्तर का अनुमान लगाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र से जुड़ा सूचकांक तैयार करने, थोक और खुदरा व्यापार में लाभ की स्थिति समझने तथा देश में काम कर रहे कारोबारों का विस्तृत सांख्यिकीय रजिस्टर बनाने में भी इन आंकड़ों की मदद ली जा सकती है।

ऐसे रजिस्टर में अलग-अलग कारोबारों के आकार, स्थान और उनकी गतिविधियों से संबंधित जानकारी शामिल हो सकती है। इससे सरकारी संस्थाओं को देश की आर्थिक स्थिति को समझने और उससे जुड़े आंकड़े तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी साझा करने की स्थिति में उसकी सुरक्षा और इस्तेमाल के नियम भी महत्वपूर्ण होंगे।
सांख्यिकी मंत्रालय ने मांगी व्यापक जानकारी
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जीएसटी से जुड़े विभिन्न आंकड़ों तक व्यापक पहुंच की मांग की है। इसमें नियमित और वार्षिक कर विवरण से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। व्यापार में लाभ का अनुमान लगाने के लिए हर महीने की बिक्री, कुछ विशेष प्रकार की कर देनदारी और उपलब्ध कर क्रेडिट से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
📊 जीएसटी आंकड़ों से संभावित इस्तेमाल
- • व्यापार में लाभ का अनुमान
- • असंगठित क्षेत्र का सूचकांक
- • थोक और खुदरा व्यापार की स्थिति
- • कारोबारों का सांख्यिकीय रजिस्टर
- • आर्थिक गतिविधियों का आकलन
कर क्रेडिट जमा होने पर राहत का प्रस्ताव
बैठक में उन कारोबारों को भी राहत देने के तरीके पर चर्चा हो सकती है, जहां कच्चे माल और दूसरी जरूरी सेवाओं पर लगने वाला कर तैयार उत्पाद पर लगने वाले कर से अधिक होता है। ऐसी स्थिति में कारोबारियों के पास कर क्रेडिट जमा हो जाता है। इसके समाधान के लिए संयंत्र, मशीनरी और कुछ सेवाओं में जमा कर की वापसी को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव सामने आ सकता है।
दुर्लभ बीमारियों के इलाज पर भी राहत संभव
दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए भी बैठक में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है। विदेश से निजी इस्तेमाल के लिए मंगाई जाने वाली दवाओं, उपचार संबंधी वस्तुओं और विशेष चिकित्सा आहार पर लगने वाले एकीकृत कर से छूट पाने वाली बीमारियों की सूची बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
प्रस्ताव में सात दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों को शामिल किए जाने की संभावना है। इनमें जन्मजात हाइपरइंसुलिनेमिक हाइपोग्लाइसीमिया, पारिवारिक होमोजाइगस हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया, अल्फा मैनोसिडोसिस, प्राथमिक हाइपरऑक्साल्यूरिया, सिस्टिनोसिस, वंशानुगत एंजियोएडेमा और प्राथमिक प्रतिरक्षा कमी से जुड़ी बीमारियां शामिल हैं। इन बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ आयातित दवाओं पर अभी 18 प्रतिशत तक कर लग सकता है।
💊 दुर्लभ बीमारियों के मरीजों के लिए राहत
- • सात दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों पर विचार
- • आयातित दवाओं पर कर राहत की संभावना
- • विशेष चिकित्सा आहार पर भी विचार
- • महंगे इलाज का खर्च कम हो सकता है
- • जरूरी उपचार के लिए राहत की उम्मीद
आयातित इलाज पर खर्च घटने की उम्मीद
यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो महंगे आयातित इलाज पर निर्भर मरीजों के खर्च में कमी आ सकती है। खासकर उन मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है, जिनमें जरूरी उपचार देश में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। सरकार पहले ही इन सात बीमारियों के लिए कुछ दवाओं और विशेष चिकित्सा खाद्य पदार्थों पर लगने वाला मूल सीमा शुल्क हटाने का फैसला कर चुकी है।
निर्यातकों के लिए कर वापसी प्रक्रिया हो सकती है तेज
निर्यातकों के लिए कर वापसी की प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा जा सकता है। इसके तहत जोखिम की जांच पूरी होने के बाद पात्र दावों की 90 प्रतिशत तक रकम सात से दस दिनों के भीतर अस्थायी रूप से लौटाने की व्यवस्था पर विचार हो सकता है। आवेदन मिलने के बाद उसे स्वीकार करने के लिए भी निश्चित समय सीमा तय किए जाने की संभावना है।
पिछले साल के जीएसटी बदलाव की भी समीक्षा
परिषद पिछले साल कर दरों में किए गए बदलाव का आम उपभोक्ताओं को मिले लाभ की भी समीक्षा कर सकती है। पिछले साल जीएसटी व्यवस्था में बदलाव करते हुए पहले की चार दरों वाली संरचना को सरल बनाकर पांच प्रतिशत, 18 प्रतिशत और विशेष 40 प्रतिशत दर की व्यवस्था की गई थी।
दवाओं की कीमतों पर भी उठे सवाल
एक अध्ययन में यह भी सामने आया था कि कई दवाओं को करमुक्त या पांच प्रतिशत वाली श्रेणी में लाए जाने के बावजूद कुछ समय के दौरान दवाओं की औसत कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इससे यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि कर दरों में कटौती का पूरा लाभ वास्तव में उपभोक्ताओं तक कितना पहुंचा।
कर विवादों को जल्द निपटाने पर चर्चा संभव
बैठक में कर विवादों को जल्द निपटाने, लंबे मुकदमों को कम करने और कारोबारियों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी चर्चा हो सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि करदाता विवाद को लंबे समय तक अदालत या विभागीय प्रक्रिया में ले जाने के बजाय स्वेच्छा से उसका समाधान करता है, तो ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे विवाद जल्दी खत्म हों और कर व्यवस्था में लोगों का भरोसा बढ़े।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों
जीएसटी परिषद की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है?
बैठक में जीएसटी आंकड़ों के इस्तेमाल, कर क्रेडिट की वापसी, दुर्लभ बीमारियों के इलाज पर राहत, निर्यातकों के रिफंड और कर विवादों को जल्द निपटाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
जीएसटी आंकड़ों का इस्तेमाल किस काम में हो सकता है?
जीएसटी से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल व्यापार में लाभ का अनुमान लगाने, असंगठित क्षेत्र का सूचकांक तैयार करने और कारोबारों का सांख्यिकीय रजिस्टर बनाने में किया जा सकता है।
दुर्लभ बीमारियों के मरीजों को क्या राहत मिल सकती है?
दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ आयातित दवाओं, उपचार संबंधी वस्तुओं और विशेष चिकित्सा आहार पर एकीकृत कर से छूट देने वाली सूची का विस्तार किया जा सकता है।
निर्यातकों के लिए क्या प्रस्ताव रखा जा सकता है?
जोखिम की जांच पूरी होने के बाद पात्र दावों की 90 प्रतिशत तक रकम सात से दस दिनों के भीतर अस्थायी रूप से लौटाने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
क्या जीएसटी दरों में बदलाव का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचा?
इसकी समीक्षा बैठक में की जा सकती है। एक अध्ययन में कुछ दवाओं पर कर राहत के बावजूद औसत कीमतों में बढ़ोतरी की बात सामने आई थी, जिससे उपभोक्ताओं तक लाभ पहुंचने का सवाल उठा।