भारत में BESS का बड़ा बूम! ये 3 कंपनियां लगा रही हैं बड़ा दांव

भारत में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। सौर और पवन ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के साथ बिजली को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय इस्तेमाल करने के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार की नीतियों, बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण और बैटरी की घटती लागत के कारण इस क्षेत्र में निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है।

भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। इस क्षेत्र में कई कंपनियां बड़े निवेश के जरिए अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं और आने वाले वर्षों में इसमें तेज वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत में BESS सेक्टर क्यों तेजी से बढ़ रहा है?

इसी संभावित बढ़त को देखते हुए कई कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। इनमें वारी एनर्जीज, पेस डिजिटेक और जेएसडब्ल्यू एनर्जी प्रमुख नाम हैं, जो अपनी बैटरी स्टोरेज क्षमता का तेजी से विस्तार कर रही हैं।

🔋 BESS सेक्टर की प्रमुख बातें

  • मुख्य वजह: सौर और पवन ऊर्जा का बढ़ता उपयोग
  • सरकारी समर्थन: नीतियां और ग्रिड आधुनिकीकरण
  • मांग: बिजली भंडारण की जरूरत बढ़ी
  • लाभ: जरूरत के समय ऊर्जा उपलब्ध
  • निवेश: बड़ी कंपनियां क्षमता बढ़ा रही हैं
  • भविष्य: स्वच्छ ऊर्जा का अहम हिस्सा बनने की उम्मीद

वारी एनर्जीज देश की प्रमुख सोलर कंपनियों में शामिल है। कंपनी 20 गीगावॉट-घंटे (GWh) क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट विकसित कर रही है। इसका पहला चरण चालू वित्त वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि बाकी क्षमता अगले वित्त वर्ष में तैयार होगी। इस परियोजना पर करीब 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य डेटा सेंटर, बिजली वितरण कंपनियों, उद्योगों और घरेलू ग्राहकों को बैटरी स्टोरेज समाधान उपलब्ध कराना है। अप्रैल 2026 तक कंपनी के पास लगभग 53,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक था। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का राजस्व और मुनाफा दोनों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई।

पेस डिजिटेक ने भी बैटरी स्टोरेज कारोबार में तेजी से विस्तार किया है। कंपनी ने 2.5 GWh क्षमता का विनिर्माण संयंत्र शुरू किया है और इसे जुलाई 2026 तक 5 GWh तथा अक्टूबर 2026 तक 10 GWh तक बढ़ाने की योजना बनाई है। कंपनी का दावा है कि उसने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में रिकॉर्ड 178 बैटरी स्टोरेज कंटेनर तैयार किए। इसी अवधि में उसका राजस्व लगभग 8.3 प्रतिशत और शुद्ध लाभ करीब 10 प्रतिशत बढ़ा।

किन कंपनियों पर निवेशकों की नजर?

📊 BESS सेक्टर की प्रमुख कंपनियां

कंपनी मुख्य योजना क्षमता
वारी एनर्जीज बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट 20 GWh
पेस डिजिटेक मैन्युफैक्चरिंग विस्तार 10 GWh (लक्ष्य)
जेएसडब्ल्यू एनर्जी बैटरी व पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज 29.6 GWh

जेएसडब्ल्यू एनर्जी भी ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी के पास कुल 29.6 GWh की स्टोरेज क्षमता है, जिसमें बैटरी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज दोनों शामिल हैं। कंपनी ने पुणे में 5 GWh क्षमता की बैटरी असेंबली यूनिट शुरू कर दी है और यहां से व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी के राजस्व में 39 प्रतिशत और शुद्ध लाभ में 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा। हालांकि निवेश से पहले निवेशकों को किसी भी कंपनी की वित्तीय स्थिति, ऑर्डर बुक, तकनीकी क्षमता और वैल्यूएशन का अच्छी तरह आकलन करना चाहिए। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है, इसे निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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