शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर की कमजोरी से रुपये को समर्थन मिला। कारोबार की शुरुआत में रुपया 95.26 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.38 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और एशियाई मुद्राओं में मजबूती के चलते शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत शुरुआत करने में सफल रहा। बाजार की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम और तेल की कीमतों पर बनी हुई है।
आज रुपये में मजबूती की क्या है वजह?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और एशियाई मुद्राओं में मजबूती के कारण रुपये को सहारा मिला है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और बाजार में डॉलर की उपलब्धता बेहतर करने के लिए उठाए गए कदमों से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
💱 आज रुपये की चाल
- शुरुआती स्तर: 95.26 प्रति डॉलर
- पिछला बंद भाव: 95.38 प्रति डॉलर
- मुख्य वजह: डॉलर इंडेक्स में कमजोरी
- समर्थन: कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
- RBI का असर: विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के कदम
- बाजार का रुख: निवेशकों का भरोसा मजबूत
ब्रोकरेज फर्म फिनरेक्स के अनुसार, रुपया फिलहाल 95.28 के आसपास स्थिर रह सकता है। उनका मानना है कि निर्यातक डॉलर में किसी भी तेजी का फायदा उठाकर बिक्री बढ़ा सकते हैं, जबकि आयातक डॉलर में गिरावट आने पर खरीदारी कर सकते हैं। इससे रुपये में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।
एशियाई मुद्राओं की बात करें तो जापानी येन सबसे मजबूत रही और इसमें लगभग 0.28 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा चीनी युआन, मलेशियाई रिंगिट, फिलीपीन पेसो, थाई बाहत और सिंगापुर डॉलर भी मजबूत हुए। दूसरी ओर इंडोनेशियाई रुपिया सबसे ज्यादा कमजोर रही, जबकि ताइवान डॉलर में भी गिरावट देखी गई। दक्षिण कोरियाई वॉन में मामूली कमजोरी रही।
आगे रुपये की चाल पर किन बातों का रहेगा असर?
📊 रुपये पर नजर रखने वाले प्रमुख फैक्टर
- डॉलर इंडेक्स: कमजोरी से रुपये को समर्थन
- कच्चा तेल: कीमतों में नरमी सकारात्मक
- एशियाई मुद्राएं: अधिकांश में मजबूती
- RBI: विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के प्रयास
- जोखिम: पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव
- नजर: तेल की कीमतें और वैश्विक बाजार
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर की कमजोरी फिलहाल रुपये के लिए सकारात्मक है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब भी बाजार के लिए जोखिम बना हुआ है। यदि भू-राजनीतिक हालात बिगड़ते हैं या तेल की कीमतों में फिर तेजी आती है, तो इसका असर रुपये की चाल पर भी पड़ सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। विदेशी मुद्रा बाजार में निवेश या ट्रेडिंग से पहले वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

