Bitcoin में निवेश करने वाले एक करदाता पर आयकर विभाग ने ₹88.55 लाख की अतिरिक्त आय जोड़ दी थी, जबकि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में ₹3.34 लाख का नुकसान बताया था। अब आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) की लखनऊ पीठ ने दोबारा कर आकलन की कार्रवाई रद्द कर दी है। वजह यह थी कि कर अधिकारी ने जवाब देने के लिए जरूरी समय नहीं दिया और पहले से जमा जवाब पर भी विचार नहीं किया।
Bitcoin निवेश पर ₹88.55 लाख का सवाल क्यों उठा?
मामला सूर्या प्रताप सिंह चौहान बनाम आयकर अधिकारी, अपील संख्या 642/LKW/2025 से जुड़ा है। आदेश 13 फरवरी 2026 को सुनाया गया और यह वित्त वर्ष 2017-18 के आकलन वर्ष 2018-19 का मामला था। आयकर विभाग के Insight Portal से मिली जानकारी के अनुसार, उस वित्त वर्ष में Bitcoin से जुड़े लेनदेन का कुल मूल्य करीब ₹83.78 लाख था।
करदाता ने दोबारा आकलन की सूचना के जवाब में बताया कि Bitcoin खरीदने की लागत ₹88.14 लाख और बिक्री से मिली रकम ₹84.80 लाख थी। इस हिसाब से उन्होंने ₹3.34 लाख का नुकसान दिखाया। लेकिन कर अधिकारी ने ₹88.55 लाख को आयकर कानून की धारा 69 के तहत अस्पष्ट निवेश मानते हुए जोड़ दिया। जुलाई 2025 में आयकर आयुक्त (अपील) ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।
करदाता का कहना था कि उन्होंने अपनी बचत और दादी से मिले उपहार सहित लगभग ₹9.63 लाख लगाए थे। उनके अनुसार, पहले Bitcoin बेचने से मिली रकम को दोबारा खरीद में इस्तेमाल किया गया, इसलिए बार-बार हुए लेनदेन का कुल मूल्य शुरुआती निवेश से काफी अधिक दिखा। उन्होंने अपने पक्ष में क्रिप्टो एक्सचेंज के रिकॉर्ड और बैंक विवरण भी दिए।
📊 Bitcoin Tax Case की मुख्य बातें
- शुरुआती निवेश: करदाता के अनुसार करीब ₹9.63 लाख
- बताया गया नुकसान: ₹3.34 लाख
- विवादित कर जोड़: ₹88.55 लाख
- लेनदेन की अवधि: वित्त वर्ष 2017-18
- ट्रिब्यूनल का फैसला: प्रक्रिया में गलती के कारण दोबारा आकलन रद्द
ITAT ने कर विभाग की कार्रवाई क्यों रद्द की?
25 मार्च 2022 को अधिकारी ने आयकर कानून की धारा 148A(b) के तहत नोटिस भेजकर पूछा कि दोबारा आकलन क्यों शुरू नहीं किया जाना चाहिए। जवाब देने की तारीख 31 मार्च तय की गई थी। करदाता ने 26 मार्च को अपना जवाब जमा कर दिया, लेकिन अधिकारी ने 29 मार्च को यह कहते हुए आदेश जारी कर दिया कि कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद 30 मार्च को दोबारा आकलन का नोटिस जारी किया गया।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि लागू नियमों के अनुसार करदाता को जवाब देने के लिए कम से कम सात दिन मिलने चाहिए थे, जब तक कानून के तहत अलग अवधि की अनुमति न हो। अधिकारी ने समय पूरा होने से पहले कार्रवाई की और पहले से जमा जवाब पर भी ध्यान नहीं दिया। इसी प्रक्रिया संबंधी गलती के कारण ITAT ने दोबारा आकलन को शुरुआत से ही अमान्य घोषित कर दिया।
यह फैसला इस बात का अंतिम निर्णय नहीं है कि Bitcoin निवेश के लिए धन का स्रोत करदाता ने सही तरह साबित किया था या नहीं। ट्रिब्यूनल ने बाकी अपील आधारों पर गुण-दोष के आधार पर फैसला नहीं दिया। आयकर कानून और लागू प्रावधानों की जानकारी के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
🧾 Crypto Investors को कौन से रिकॉर्ड रखने चाहिए?
- एक्सचेंज स्टेटमेंट: खरीद और बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखें।
- बैंक विवरण: जमा, निकासी और भुगतान का मिलान करें।
- लेनदेन का इतिहास: पहले की बिक्री से दोबारा की गई खरीद दर्ज रखें।
- धन का स्रोत: बचत या उपहार से मिले धन के प्रमाण संभालें।
- टैक्स नियम: अपने आकलन वर्ष पर लागू नियमों की पुष्टि करें।
Crypto Tax Rules निवेशकों के लिए क्या मायने रखते हैं?
यह मामला वित्त वर्ष 2017-18 से जुड़ा है, जबकि वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के लिए मौजूदा विशेष कर व्यवस्था बाद में लागू हुई। आकलन वर्ष 2023-24 से आयकर कानून की धारा 115BBH के तहत वर्चुअल डिजिटल एसेट के हस्तांतरण से हुई आय पर 30% कर का प्रावधान है। लागू अधिभार और उपकर अलग हो सकते हैं तथा कटौतियों और नुकसान के समायोजन पर भी सीमाएँ हैं।
इसलिए इस फैसले को यह समझना सही नहीं होगा कि क्रिप्टो लेनदेन पर सवाल नहीं उठाए जा सकते या बार-बार ट्रेडिंग करने से बड़े लेनदेन का मूल्य अपने आप स्पष्ट हो जाता है। निवेशकों को अपने रिकॉर्ड से दिखाना चाहिए कि असली शुरुआती पूंजी कितनी थी और उसी रकम से कितनी बार खरीद-बिक्री हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. ITAT ने Bitcoin निवेशक के खिलाफ कर जोड़ क्यों रद्द किया?
ITAT ने करदाता को जवाब देने के लिए जरूरी समय न देने और पहले से जमा जवाब पर विचार न करने के कारण दोबारा आकलन रद्द किया। यह फैसला प्रक्रिया की वैधता पर था, निवेश के स्रोत पर अंतिम निर्णय नहीं।
2. क्या इस फैसले से Bitcoin पर टैक्स नहीं लगेगा?
नहीं। यह फैसला Bitcoin या दूसरी क्रिप्टोकरेंसी को कर से छूट नहीं देता। यह केवल एक मामले में दोबारा आकलन की प्रक्रिया में हुई गलती से जुड़ा है। निवेशकों को अपने मामले में लागू कर नियमों का पालन करना चाहिए।
3. करदाता ने कितना निवेश और कितना नुकसान बताया था?
करदाता ने अपनी बचत और दादी से मिले उपहार सहित करीब ₹9.63 लाख लगाने की बात कही थी। उन्होंने Bitcoin लेनदेन पर ₹3.34 लाख का नुकसान बताया, जबकि विभाग ने ₹88.55 लाख को अस्पष्ट निवेश मानकर कर आकलन में जोड़ा था।
4. क्रिप्टो निवेशक को टैक्स जांच के लिए कौन से दस्तावेज रखने चाहिए?
निवेशकों को एक्सचेंज स्टेटमेंट, बैंक खाते का विवरण, खरीद-बिक्री की तारीखें, जमा और निकासी का रिकॉर्ड तथा धन के स्रोत के प्रमाण रखने चाहिए। इन दस्तावेजों से शुरुआती निवेश और बार-बार हुए कुल लेनदेन के बीच अंतर समझाने में मदद मिल सकती है।
5. भारत में क्रिप्टो आय पर मौजूदा कर नियम क्या कहते हैं?
आकलन वर्ष 2023-24 से लागू धारा 115BBH के तहत वर्चुअल डिजिटल एसेट के हस्तांतरण से हुई आय पर 30% कर का प्रावधान है। अधिभार और उपकर लागू हो सकते हैं, जबकि कुछ कटौतियों और नुकसान के समायोजन पर प्रतिबंध हैं।
निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि कर विभाग को दोबारा आकलन करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। हालांकि, फैसला क्रिप्टो निवेशकों को रिकॉर्ड रखने से छूट नहीं देता। खरीद, बिक्री, बैंक लेनदेन और धन के स्रोत के प्रमाण सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, इसे व्यक्तिगत कर सलाह न मानें। अपनी स्थिति के अनुसार योग्य कर विशेषज्ञ से सलाह लें।
