उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से आने वाले 20 वर्षीय उदितांश रघुवंशी ने IIT Guwahati में पढ़ाई के साथ खेल की एक नई राह खोजी। केमिकल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र उदितांश ने कॉलेज में भाला फेंक यानी जैवलिन थ्रो में रुचि विकसित की। अब वह संस्थान के Sports Board में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि कॉलेज का अनुभव केवल पढ़ाई और नौकरी की तैयारी तक सीमित नहीं होता।
IIT Guwahati में पढ़ाई के साथ खेल की शुरुआत
उदितांश 16 साल की उम्र में संयुक्त प्रवेश परीक्षा JEE की तैयारी के लिए उत्तर प्रदेश से कोटा गए थे। वहाँ उन्होंने नियमित पढ़ाई, समय का सही उपयोग और परीक्षा के दबाव को संभालना सीखा। वर्ष 2024 में उन्होंने JEE Main में 4,716 और JEE Advanced में 5,013 ऑल इंडिया रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने IIT Guwahati में केमिकल इंजीनियरिंग चुनी, क्योंकि इस विषय में विज्ञान के साथ व्यावहारिक सीखने का अवसर भी था।
असम के माहौल में ढलने के बाद उदितांश ने कैंपस की अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया। वह Alcheringa, E-Cell और Consulting and Analytics Club जैसी गतिविधियों से जुड़े। खेल आयोजनों को देखने के बाद उन्होंने खुद भी एथलेटिक्स आजमाया, जबकि स्कूल के समय वह प्रतियोगी खिलाड़ी नहीं रहे थे।
🏹 जैवलिन थ्रो से जुड़ा नया सफर
- छात्र: उदितांश रघुवंशी
- संस्थान: IIT Guwahati
- पढ़ाई: केमिकल इंजीनियरिंग, तीसरा वर्ष
- खेल: जैवलिन थ्रो यानी भाला फेंक
- तैयारी: ताकत बढ़ाने के लिए वेट ट्रेनिंग और नियमित अभ्यास
अभ्यास ने खेल को दिनचर्या का हिस्सा बनाया
जैवलिन थ्रो में तकनीक, सही समय, ताकत और एकाग्रता की जरूरत होती है। उदितांश ने धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वेटलिफ्टिंग शामिल की। खेल उनके लिए पढ़ाई से थोड़ा विराम लेने का तरीका भी बना। उनके अनुसार, अभ्यास के बाद वह पढ़ाई पर अधिक स्पष्टता के साथ लौट पाते थे।
खेल में आगे बढ़ने के लिए लगातार अभ्यास जरूरी था। कई बार सुधार तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन नियमित मेहनत से धीरे-धीरे फर्क पड़ता है। उदितांश ने इसी अनुभव से धैर्य और निरंतरता का महत्व समझा, जिसे उन्होंने पढ़ाई और कॉलेज की दूसरी जिम्मेदारियों में भी अपनाया।
Inter-IIT Sports Meet से मिली नई सीख
उदितांश ने Inter-IIT Sports Meet में एथलेटिक्स के जरिए IIT Guwahati का प्रतिनिधित्व किया। वह इस प्रतियोगिता से पदक नहीं जीत पाए, लेकिन उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किसी संस्थान की ओर से खेलना और प्रतियोगिता आयोजित करना कितना मेहनत भरा काम है।
खेल आयोजन के पीछे होने वाली योजना, सामान की व्यवस्था, तालमेल और फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी रुचि बढ़ी। इसी दिलचस्पी ने उन्हें संस्थान के Sports Board की ओर आकर्षित किया, जहाँ बाद में वह संयुक्त सचिव बने।
🌱 खेल से मिली अहम बातें
- धैर्य: प्रगति में समय लग सकता है।
- नियमितता: लगातार अभ्यास से कौशल बेहतर होता है।
- टीमवर्क: खेल आयोजन में कई लोगों का सहयोग जरूरी है।
- सबको मौका: खेल का माहौल नए खिलाड़ियों के लिए भी खुला होना चाहिए।
- खुली सोच: कॉलेज में नए रास्ते खोजने का अवसर मिलता है।
खिलाड़ी से आगे बढ़कर सभी छात्रों के बारे में सोचना
Sports Board की जिम्मेदारी संभालने के बाद उदितांश का नजरिया बदला। पहले उनका ध्यान अपने खेल और प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर था। बाद में उन्होंने सोचना शुरू किया कि कॉलेज में खेल का माहौल ऐसा कैसे बने, जहाँ अलग-अलग रुचि और क्षमता वाले छात्र भी आसानी से हिस्सा ले सकें।
उनके लिए खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहा। वह चाहते हैं कि जो छात्र पहली बार कोई खेल आजमाना चाहते हैं या बस सक्रिय रहना चाहते हैं, उन्हें भी अवसर मिलें। उनकी सोच में खेल की व्यवस्था को बेहतर बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना खुद अच्छा खिलाड़ी बनना।
भविष्य को लेकर अभी खुले हैं विकल्प
कॉलेज के अनुभव में उदितांश के लिए दोस्तों के साथ रहना, हॉस्टल की जिंदगी, देर रात बातचीत और अलग-अलग राज्यों से आए छात्रों के साथ समय बिताना भी खास रहा है। इन अनुभवों ने उन्हें अलग संस्कृतियों और विचारों को समझने का मौका दिया।
तीसरे वर्ष में पढ़ रहे उदितांश ने अभी तय नहीं किया है कि डिग्री पूरी करने के बाद वह किस दिशा में जाएंगे। उनके अनुसार, IIT ने उन्हें यह समझने में मदद की है कि भविष्य की हर बात पहले से तय होना जरूरी नहीं। नए अवसरों के लिए खुले रहना भी सीखने का हिस्सा है।
उनके परिवार में शिक्षा का खास महत्व रहा है। उनके माता-पिता शिक्षक हैं और उनके दादा कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं। उदितांश मानते हैं कि खेल और Sports Board के अनुभव ने उनमें भी दूसरों के लिए अवसर बनाने की सोच विकसित की है।
इस कहानी से जुड़ी मूल रिपोर्ट LiveMint पर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. उदितांश रघुवंशी कौन हैं?
उदितांश रघुवंशी IIT Guwahati में केमिकल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र हैं। वह एथलेटिक्स में जैवलिन थ्रो का अभ्यास करते हैं और संस्थान के Sports Board में संयुक्त सचिव की भूमिका निभा रहे हैं।
2. उदितांश रघुवंशी किस खेल में रुचि रखते हैं?
उदितांश को जैवलिन थ्रो यानी भाला फेंक में रुचि है। इस खेल में सही तकनीक, ताकत, समय और एकाग्रता की जरूरत होती है। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए नियमित अभ्यास के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी शुरू की।
3. उदितांश ने JEE में कौन-सी रैंक हासिल की थी?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उदितांश ने 2024 में JEE Main में ऑल इंडिया रैंक 4,716 और JEE Advanced में रैंक 5,013 हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने IIT Guwahati में केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई चुनी।
4. Inter-IIT Sports Meet से उदितांश को क्या सीख मिली?
Inter-IIT Sports Meet में भाग लेने से उदितांश को संस्थान का प्रतिनिधित्व करने और खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की मेहनत समझने का मौका मिला। इसी अनुभव ने उन्हें खेल प्रशासन, तालमेल और सभी छात्रों के लिए बेहतर अवसर बनाने में रुचि दिलाई।
5. क्या उदितांश ने ग्रेजुएशन के बाद का करियर तय कर लिया है?
नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक उदितांश ने अभी यह तय नहीं किया है कि ग्रेजुएशन के बाद क्या करेंगे। वह अलग-अलग संभावनाओं के लिए खुले हैं और कॉलेज के दौरान मिले अनुभवों से अपनी रुचियों को समझ रहे हैं।
निष्कर्ष
उदितांश रघुवंशी की कहानी दिखाती है कि कॉलेज में पढ़ाई के साथ नई रुचियाँ भी विकसित हो सकती हैं। जैवलिन थ्रो और खेल प्रशासन ने उन्हें धैर्य, नियमितता और टीमवर्क सिखाया। उनका अनुभव छात्रों को नए अवसर आजमाने और दूसरों के लिए रास्ते बनाने की प्रेरणा देता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी में बदलाव या त्रुटि संभव है।
