BRICS AI News: Digital Public Infrastructure पर नई पहल का प्रस्ताव

28 अक्टूबर 2026 की BRICS news में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर संसदीय सहयोग प्रमुख रहा। नई दिल्ली में 26 और 27 अक्टूबर को हुए 12वें BRICS Parliamentary Forum की संयुक्त घोषणा में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अनुभव साझा करने और संभावित परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाने का समर्थन किया गया। घोषणा में BRICS देशों के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी शुरू करने के प्रस्ताव और डिजिटल बदलाव से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट्स का उल्लेख है। यह प्रस्ताव है, इसे पहले से लागू हो चुकी साझा प्रणाली समझना सही नहीं होगा। भारत सरकार की प्रेस सूचना ब्यूरो पर आधिकारिक संयुक्त घोषणा पढ़ें।

डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का प्रस्ताव क्या है?

डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी DPI ऐसे डिजिटल आधारभूत साधनों को कहा जाता है जो पहचान, भुगतान, जानकारी के आदान-प्रदान या सार्वजनिक सेवाओं को उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। अलग-अलग देशों में इनके रूप और नियम अलग होते हैं। BRICS घोषणा में सदस्य देशों के अनुभवों को साझा करने और डिजिटल ढांचे से जुड़े संभावित समाधान पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।

घोषणा में DPI के लिए एक रिपॉजिटरी बनाने के प्रस्ताव का उल्लेख है। ऐसी रिपॉजिटरी अलग-अलग देशों में इस्तेमाल हो रहे तरीकों, तकनीकी मॉडल और सीख को व्यवस्थित रूप से साझा करने में मदद कर सकती है। इससे नीति बनाने वालों को समझने में मदद मिलेगी कि किस तरह के समाधान किसी परिस्थिति में काम आए और किन जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है। प्रस्ताव का जिक्र होने का मतलब यह नहीं कि सभी देशों ने एक ही प्रणाली अपना ली है।

पायलट प्रोजेक्ट्स क्यों जरूरी हैं?

किसी डिजिटल व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले छोटे पायलट प्रोजेक्ट चलाने से उसकी उपयोगिता और कमियों को समझा जा सकता है। परीक्षणों में यह देखा जा सकता है कि तकनीक सुरक्षित है या नहीं, नागरिकों के लिए उपयोग करना कितना आसान है और अलग-अलग प्रणालियों के बीच जानकारी का आदान-प्रदान सही ढंग से होता है या नहीं। परीक्षण के नतीजों के आधार पर नियम और तकनीकी डिजाइन सुधारे जा सकते हैं।

BRICS देशों की जनसंख्या, कानून, भाषा, इंटरनेट पहुंच और डिजिटल क्षमताएं एक जैसी नहीं हैं। इसलिए एक देश में सफल मॉडल दूसरे देश में बिना बदलाव के लागू करना जरूरी नहीं कि सही हो। किसी पायलट प्रोजेक्ट में स्थानीय जरूरतों, नागरिकों की सहमति, डेटा सुरक्षा और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। आधिकारिक परियोजना, बजट और समयसीमा की घोषणा होने पर ही उसके वास्तविक दायरे का स्पष्ट पता चलेगा।

संसदों में AI का उपयोग

घोषणा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आर्थिक विकास और सतत विकास में मदद देने वाली तकनीक के रूप में देखा गया। संसदों में AI का उपयोग दस्तावेजों की खोज, विधेयकों के विश्लेषण, शोध सामग्री को व्यवस्थित करने, बहुभाषी सूचना उपलब्ध कराने और नागरिकों से मिलने वाली प्रतिक्रिया समझने में मदद कर सकता है। इससे सांसदों और संसदीय कर्मचारियों को बड़ी मात्रा में जानकारी संभालने में सहायता मिल सकती है।

लेकिन AI के परिणाम हमेशा सही हों, यह जरूरी नहीं है। प्रणाली गलत जानकारी दे सकती है, किसी समूह के प्रति पक्षपात दिखा सकती है या संवेदनशील दस्तावेजों को गलत तरीके से संभाल सकती है। निर्णय लेने की जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के पास रहनी चाहिए। AI से मिली जानकारी की जांच, स्रोतों की पुष्टि और मानवीय समीक्षा आवश्यक हैं। तकनीक सहायक हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक जवाबदेही का स्थान नहीं ले सकती।

💻 BRICS Digital Plan: मुख्य तथ्य

  • प्रस्ताव: डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी
  • तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ICT
  • सुरक्षा: व्यक्तिगत जानकारी और डेटा गोपनीयता
  • स्थिति: सहयोग का प्रस्ताव, लागू होने की पुष्टि अलग से जरूरी

डेटा गोपनीयता और डिजिटल संप्रभुता

घोषणा में डेटा गोपनीयता, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और राष्ट्रीय तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने की जरूरत बताई गई। डिजिटल सेवाओं में नागरिकों की पहचान, संपर्क जानकारी, वित्तीय विवरण या सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ा रिकॉर्ड शामिल हो सकता है। यदि इन आंकड़ों की सुरक्षा कमजोर हो, तो धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और निजी जीवन में दखल का खतरा बढ़ सकता है।

डिजिटल संप्रभुता का अर्थ है कि देश अपनी तकनीकी व्यवस्था और डेटा के उपयोग से जुड़े नियमों पर नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता रखते हों। इसका अर्थ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बंद करना नहीं है। साझा काम के लिए सुरक्षित डेटा हस्तांतरण, सीमित पहुंच, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार संस्थाओं की पहचान जरूरी होती है। अलग-अलग देशों के कानूनों का सम्मान करते हुए सहयोग का ढांचा बनाना भरोसा पैदा करने के लिए जरूरी होगा।

आम नागरिकों को क्या लाभ मिल सकता है?

अगर भविष्य में देशों के बीच डिजिटल अनुभव साझा करने से उपयोगी सेवाएं विकसित होती हैं, तो नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं तक आसान पहुंच, कम कागजी प्रक्रिया और बेहतर सूचना प्रणाली जैसे लाभ मिल सकते हैं। छोटे व्यवसायों को डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के बेहतर उपयोग से फायदा हो सकता है। लेकिन ऐसे लाभ तभी संभव हैं जब व्यवस्था भरोसेमंद हो और ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्गों, दिव्यांग लोगों तथा कम इंटरनेट पहुंच वाले नागरिकों को भी ध्यान में रखे।

डिजिटल सेवा का विकल्प केवल ऑनलाइन माध्यम तक सीमित नहीं होना चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास स्मार्टफोन, स्थिर इंटरनेट या डिजिटल कौशल नहीं है। सहायता केंद्र, सरल भाषा, स्थानीय भाषाओं में जानकारी और शिकायत निवारण की व्यवस्था जरूरी है। यदि तकनीक किसी व्यक्ति को सेवा से बाहर कर देती है, तो उसका सार्वजनिक उद्देश्य कमजोर हो जाता है। समावेशन डिजिटल विकास का अहम हिस्सा है।

आगे किन चुनौतियों पर ध्यान देना होगा?

पहली चुनौती अलग-अलग देशों की प्रणालियों को सुरक्षित और उपयोगी तरीके से जोड़ने की है। दूसरी चुनौती डेटा की गुणवत्ता और निजता की सुरक्षा है। तीसरी चुनौती साइबर हमलों से बचाव और तकनीकी विफलता की स्थिति में सेवा जारी रखने की है। इसके अलावा तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों पर निर्भरता, लागत, प्रशिक्षण और जवाबदेही जैसे सवाल भी उठेंगे। इन मुद्दों को शुरुआत में हल करना बड़े नुकसान से बचा सकता है।

संसदीय संस्थाओं की भूमिका केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है। उन्हें यह देखना होगा कि डिजिटल परियोजनाओं पर सार्वजनिक धन कैसे खर्च होता है, डेटा किसके पास रहता है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कौन जिम्मेदार है। पारदर्शी खरीद प्रक्रिया, स्वतंत्र समीक्षा और नियमित रिपोर्टिंग सार्वजनिक भरोसे को मजबूत कर सकती है। प्रस्ताव को व्यावहारिक रूप देने के लिए इन बातों पर स्पष्टता जरूरी होगी।

Frequently Asked Questions (FAQ)

1. BRICS डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी क्या है?

यह BRICS देशों के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे से जुड़े अनुभव और समाधान साझा करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य देशों को उपयोगी तरीकों से सीखने में मदद देना हो सकता है। घोषणा में प्रस्ताव का उल्लेख है, लेकिन इसे पूरी तरह लागू प्रणाली नहीं माना जाना चाहिए।

2. BRICS संसदों में AI का उपयोग कैसे हो सकता है?

AI शोध सामग्री खोजने, दस्तावेजों का विश्लेषण करने, बहुभाषी जानकारी व्यवस्थित करने और नागरिकों की प्रतिक्रिया समझने में मदद कर सकता है। इसके परिणामों की मानवीय जांच जरूरी है, क्योंकि तकनीक गलत उत्तर दे सकती है या पक्षपात दिखा सकती है।

3. डिजिटल संप्रभुता का क्या मतलब है?

डिजिटल संप्रभुता का अर्थ है कि देश अपनी तकनीकी व्यवस्था और डेटा के उपयोग से जुड़े नियमों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखें। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ भी गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, डेटा तक पहुंच और जवाबदेही के स्पष्ट नियम जरूरी हैं।

4. क्या BRICS देशों ने साझा AI प्रणाली शुरू कर दी है?

संयुक्त घोषणा में AI सहयोग और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्तावों का समर्थन है। इससे यह साबित नहीं होता कि सभी देशों ने एक साझा AI प्रणाली शुरू कर दी है। किसी लॉन्च की पुष्टि के लिए आधिकारिक घोषणा और विवरण देखना चाहिए।

5. डिजिटल सेवाओं में नागरिकों की सुरक्षा कैसे होगी?

सुरक्षा के लिए सीमित डेटा संग्रह, सुरक्षित भंडारण, स्पष्ट सहमति, साइबर सुरक्षा परीक्षण, शिकायत निवारण और स्वतंत्र निगरानी जरूरी हैं। सेवाओं को सरल भाषा और अलग-अलग जरूरतों के अनुरूप बनाना भी महत्वपूर्ण है, ताकि तकनीक लोगों को सेवा से बाहर न करे।

निष्कर्ष

BRICS की संयुक्त घोषणा ने AI, डेटा गोपनीयता और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग की संभावनाएं सामने रखीं। वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब प्रस्ताव सुरक्षित, समावेशी और पारदर्शी परियोजनाओं में बदलें और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो।

Disclaimer: यह लेख आधिकारिक संयुक्त घोषणा और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। नवीनतम स्थिति के लिए आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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