भारत और जापान के बीच मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना को लेकर विवाद उस समय चर्चा में आ गया, जब जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी माकिहारा ने परियोजना की धीमी प्रगति के लिए पूरी तरह भारत को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि भारत सरकार ने इस बयान को उनकी व्यक्तिगत राय बताते हुए तथ्यों से अलग करार दिया।
भारत ने पूर्व जापानी मंत्री के आरोपों को किया खारिज
जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) से जुड़े पूर्व कैबिनेट मंत्री हिदेकी माकिहारा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना की प्रगति नहीं होने के लिए 100 प्रतिशत भारत जिम्मेदार है। उन्होंने दावा किया कि परियोजना पर काम करने वाले जापानी कर्मचारियों की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए यह कहना जरूरी है।
शुक्रवार, 17 जुलाई को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री की टिप्पणी उनकी व्यक्तिगत राय है और यह तथ्यों से काफी अलग है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रमुख बातें
- परियोजना: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR)
- साझेदार: भारत और जापान
- जापान की हिस्सेदारी: कुल लागत का लगभग 81 प्रतिशत वित्तपोषण
- पहला चरण: अगले वर्ष संचालन शुरू करने का लक्ष्य
- शुरुआती ट्रेन: भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन
- भविष्य की योजना: 2030 के शुरुआती वर्षों में जापान की E10 सीरीज
भारत ने परियोजना की प्रगति पर दिया अपडेट
विदेश मंत्रालय के अनुसार, परियोजना के तहत जापान भविष्य में अपनी E10 सीरीज की बुलेट ट्रेन उपलब्ध कराएगा, लेकिन यह ट्रेन अभी विकसित की जा रही है और इसके 2030 के शुरुआती वर्षों में उपलब्ध होने की संभावना है। पहले चरण में भारत की हाई-स्पीड ट्रेन से परिचालन शुरू करने पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि परियोजना के लिए सिग्नलिंग उपकरणों का ऑर्डर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दिया जा चुका है। सरकार के मुताबिक इस संदर्भ में जापान की ओर से कोई अलग प्रस्ताव नहीं मिला और परियोजना का उद्देश्य जल्द से जल्द हाई-स्पीड रेल सेवा शुरू करना है।
विवाद की मुख्य वजह
- पूर्व मंत्री का आरोप: परियोजना में देरी के लिए भारत जिम्मेदार
- भारत का जवाब: टिप्पणी व्यक्तिगत राय, तथ्य अलग
- इंजीनियर की टिप्पणी: जापानी तकनीक के उपयोग पर सवाल
- सिग्नलिंग सिस्टम: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था
- रोलिंग स्टॉक: पहले चरण में भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन
- परियोजना की स्थिति: भारत के अनुसार कार्य तय योजना के अनुसार जारी
जापानी विशेषज्ञ ने भी उठाए थे सवाल
जापानी रेलवे इंजीनियर इसाओ त्सुजिमुरा ने एक लेख में दावा किया कि परियोजना की शुरुआत जापानी शिंकानसेन तकनीक के साथ होनी थी, लेकिन बाद में भारत ने स्थानीय हाई-स्पीड ट्रेनों और यूरोपीय सिग्नलिंग सिस्टम की ओर रुख किया। उनका कहना था कि इससे जापानी रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग सिस्टम के उपयोग की संभावना काफी कम हो गई।
त्सुजिमुरा ने यह भी लिखा कि 2015 के सहयोग समझौते में परियोजना को जापानी शिंकानसेन तकनीक के साथ विकसित करने की बात कही गई थी। वहीं माकिहारा ने अपने बयान में आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान भारतीय पक्ष ने अपने हितों को प्राथमिकता दी और कई बार पहले की सहमति से पीछे हट गया।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। आधिकारिक निर्णय और भविष्य के बदलाव संबंधित सरकारी घोषणाओं के अनुसार होंगे।

