भारतीय शेयर बाजार में मजबूत घरेलू लिक्विडिटी और निवेशकों के बढ़ते भरोसे के चलते अप्रैल 2026 से इक्विटी के जरिए फंड जुटाने की रफ्तार तेज हो गई है।
भारतीय शेयर बाजार में अप्रैल 2026 से अब तक इक्विटी के जरिए फंड जुटाने का आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह ऑफर फॉर सेल (OFS), ब्लॉक डील, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) और आईपीओ (IPO) गतिविधियों में तेज़ी है। बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ने और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी के चलते कंपनियां और प्रमोटर पूंजी जुटाने के लिए तेजी से पूंजी बाजार का रुख कर रहे हैं।
अप्रैल 2026 के बाद इक्विटी फंड जुटाने में तेज़ी
साल 2026 की शुरुआत में बाजार में कमजोरी देखने को मिली थी, लेकिन अप्रैल के बाद स्थिति तेजी से सुधरी। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयरों में इससे भी ज्यादा तेजी देखने को मिली। बेहतर बाजार माहौल के कारण कंपनियों को फंड जुटाने का अनुकूल अवसर मिला है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य बोर्ड आईपीओ लाने में तीन से छह महीने तक का समय लग सकता है, जबकि क्यूआईपी, ब्लॉक डील और ओएफएस जैसे विकल्पों के जरिए कुछ ही दिनों में पूंजी जुटाई जा सकती है। यही वजह है कि कई कंपनियां इन माध्यमों को प्राथमिकता दे रही हैं। लगातार बढ़ रहे एसआईपी निवेश और घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास पर्याप्त नकदी होने से भी फंड जुटाने की गतिविधियां तेज हुई हैं।
📈 अप्रैल 2026 के बाद फंड जुटाने की बड़ी तस्वीर
- कुल इक्विटी फंड जुटाना: 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- मुख्य माध्यम: OFS, QIP, Block Deal और IPO
- बाजार समर्थन: मजबूत घरेलू लिक्विडिटी
- निवेशकों का रुख: पूंजी बाजार में बढ़ता भरोसा
- मुख्य कारण: बाजार में तेजी और संस्थागत निवेश
सरकार और कंपनियों ने उठाया बाजार का फायदा
प्राइम डेटाबेस के अनुसार, केंद्र सरकार ने भी बाजार की इस तेजी का फायदा उठाते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की छह कंपनियों में ओएफएस के जरिए लगभग 18,700 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC) और आईआरएफसी शामिल हैं।
अप्रैल से अब तक ब्लॉक और बल्क डील के जरिए 55,000 करोड़ रुपये से अधिक के सौदे हो चुके हैं। इस अवधि की प्रमुख डील्स में अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन की लगभग 7,486 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील, बिलियनब्रेन्स गैरेज की 5,700 करोड़ रुपये की डील, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस की 5,300 करोड़ रुपये से अधिक की डील और अडानी एंटरप्राइजेज की करीब 4,790 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील शामिल हैं।
💰 QIP, IPO और Block Deal की प्रमुख गतिविधियां
- Block/Bulk Deal: 55,000 करोड़ रुपये से अधिक
- QIP (अप्रैल-जून): 23,400 करोड़ रुपये
- जून QIP: 16,500 करोड़ रुपये
- जुलाई QIP: अडानी एंटरप्राइजेज का 15,000 करोड़ रुपये
- IPO गतिविधि: मुख्य बोर्ड और SME दोनों में तेजी
IPO बाजार में लौटी रफ्तार
क्यूआईपी के जरिए भी अप्रैल से जून के बीच कंपनियों ने कुल 23,400 करोड़ रुपये जुटाए। जून महीने में अकेले नौ कंपनियों ने लगभग 16,500 करोड़ रुपये का फंड जुटाया। जुलाई में अडानी एंटरप्राइजेज ने 15,000 करोड़ रुपये का क्यूआईपी लॉन्च किया है।
आईपीओ बाजार में भी फिर से तेजी लौट रही है। हाल ही में एनएसई और जियो ने अपने ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए हैं। वहीं, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, जेप्टो और मणिपाल हेल्थ जैसी कंपनियों के आईपीओ भी आने वाले महीनों में बाजार में आ सकते हैं। जून में मुख्य बोर्ड के सात आईपीओ के जरिए 2,718 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि एसएमई प्लेटफॉर्म पर मई और जून में कुल 41 आईपीओ के जरिए करीब 1,680 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती को दिखाती है। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि हाल के महीनों में तेज उछाल के बाद अब निवेश करते समय कंपनियों के कारोबार, मुनाफे और मूल्यांकन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक कंपनियों के वित्तीय नतीजों और कमाई पर निर्भर करेगी।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।