CBDT का बड़ा बदलाव, AIS में दिखेगी विदेशी संपत्ति की जानकारी

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने टैक्स व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब करदाताओं के विदेशी निवेश और विदेशों में मौजूद वित्तीय खातों की जानकारी Annual Information Statement (AIS) में दिखाई जाएगी। इसका उद्देश्य विदेशी संपत्तियों की सही जानकारी जुटाना, टैक्स अनुपालन आसान बनाना और आयकर रिटर्न में गलत जानकारी की जांच को मजबूत करना है।

टैक्स प्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए CBDT ने नया बदलाव किया है। अब विदेशी निवेश और विदेशों में मौजूद वित्तीय खातों की जानकारी भी करदाताओं के AIS में उपलब्ध होगी, जिससे टैक्स अनुपालन और जांच प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकेगा।

AIS में विदेशी निवेश की जानकारी क्यों जोड़ी जाएगी?

CBDT के 8 जुलाई को जारी आदेश के अनुसार, आयकर विभाग के सिस्टम महानिदेशक को Automatic Exchange of Information (AEOI) व्यवस्था के तहत मिली विदेशी वित्तीय जानकारी को करदाताओं के AIS में शामिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह जानकारी विदेश से मिलने के 90 दिनों के अंदर AIS में अपलोड की जाएगी।

📄 CBDT के नए बदलाव की मुख्य बातें

  • नई जानकारी: विदेशी निवेश और वित्तीय खातों का रिकॉर्ड
  • कहां दिखेगा: Annual Information Statement (AIS)
  • आधार: Automatic Exchange of Information (AEOI)
  • समय सीमा: विदेश से जानकारी मिलने के 90 दिनों के अंदर
  • उद्देश्य: टैक्स पारदर्शिता और बेहतर अनुपालन
  • फायदा: गलत जानकारी की पहचान आसान होगी

यह जानकारी AIS के नए फॉर्म 168 में दिखाई जाएगी। AIS में करदाता की आय, जमा किए गए टैक्स और PAN से जुड़ी अन्य वित्तीय गतिविधियों का रिकॉर्ड उपलब्ध होता है। नए बदलाव के बाद इसमें विदेशी निवेश और विदेशों में रखे गए वित्तीय खातों की जानकारी भी शामिल होगी।

AEOI व्यवस्था के तहत दुनिया के कई देश आपस में अपने नागरिकों के वित्तीय खातों की जानकारी साझा करते हैं। इस प्रक्रिया में बैंक, निवेश संस्थान और बीमा कंपनियां विदेशी नागरिकों के खातों की जानकारी एकत्र कर संबंधित टैक्स विभागों को भेजती हैं। भारत को वर्तमान में 111 देशों से वित्तीय जानकारी मिलती है और भारत 86 देशों के साथ ऐसी जानकारी साझा करता है।

AEOI व्यवस्था से कैसे बढ़ेगी निगरानी?

CBDT ने यह भी कहा है कि साल 2022 से 2025 तक मिली AEOI जानकारी को तय समय और प्रारूप के अनुसार Form 26AS में भी शामिल किया जाएगा। इससे टैक्स विभाग को विदेशों में मौजूद संपत्तियों और घोषित जानकारी के बीच अंतर पहचानने में मदद मिलेगी।

🌍 विदेशी संपत्तियों वाले करदाताओं के लिए जरूरी बातें

  • विदेशी बैंक खाते: सही जानकारी देना जरूरी
  • निवेश: शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य संपत्तियां शामिल
  • बीमा: विदेशी वित्तीय उत्पादों की जानकारी देनी होगी
  • AIS जांच: गलत या अधूरी जानकारी पकड़ी जा सकती है
  • ITR दाखिल करते समय: अतिरिक्त सावधानी जरूरी
  • टैक्स विभाग: विदेशी संपत्तियों की निगरानी मजबूत होगी

विशेषज्ञों के अनुसार, जिन भारतीय करदाताओं के पास विदेश में बैंक खाते, निवेश, शेयर, म्यूचुअल फंड, बीमा या अन्य वित्तीय संपत्तियां हैं, उन्हें अब आयकर रिटर्न भरते समय अधिक सावधानी बरतनी होगी। AIS में विदेशी जानकारी आने से गलत या अधूरी जानकारी देने पर टैक्स विभाग की जांच बढ़ सकती है।

CBDT का यह कदम टैक्स प्रणाली को ज्यादा डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे करदाताओं को सही जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल करने में मदद मिलेगी और विदेशी संपत्तियों से जुड़े मामलों में निगरानी भी मजबूत होगी।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। टैक्स से जुड़े निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Gourav Kumar Singh

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