भारत में charitable trust और अन्य registered non-profit organisations समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबों की सहायता और कई जनहित के काम करती हैं। कभी-कभी खर्च घटाने, संसाधन एक साथ करने या काम का दायरा बढ़ाने के लिए दो संस्थाएं आपस में विलय करना चाहती हैं। ऐसे विलय को लेकर केंद्र सरकार ने नए नियम अधिसूचित किए हैं। CBDT की Notification No. 139/2026, दिनांक 30 अक्टूबर 2026, के जरिए Income-tax Rules, 2026 में Rule 189A जोड़ा गया है। ये नियम 30 अक्टूबर को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ लागू हो गए।
📋 CBDT के नए Trust Merger Rules
- अधिसूचना: 139/2026, दिनांक 30 अक्टूबर 2026
- नया नियम: Income-tax Rules का Rule 189A
- पांच साल की शर्त: विलय के बाद संस्था के उद्देश्य नहीं बदलेंगे
- नया फॉर्म: Form No. 112A
- समय सीमा: विलय प्रभावी होने वाले महीने के अंत से एक महीने के भीतर सूचना
CBDT ने किन संस्थाओं के लिए नियम बदले?
ये प्रावधान उन पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्थाओं पर लागू होते हैं जो समान या मिलते-जुलते उद्देश्यों वाली दूसरी पंजीकृत संस्था में विलय करना चाहती हैं। इसमें charitable trusts और ऐसे दूसरे non-profit organisations शामिल हो सकते हैं जो संबंधित आयकर कानून के तहत पंजीकृत हैं। सरकार ने यह साफ किया है कि विलय केवल नाम या प्रबंधन बदलने का मामला नहीं होगा। इसके साथ संस्था की संपत्ति, देनदारियां, कर संबंधी जिम्मेदारियां और पहले से चल रही कानूनी प्रक्रियाएं भी जुड़ी रहेंगी।
नए Rule 189A के अनुसार नियमित रूप से पंजीकृत संस्था का विलय अस्थायी यानी provisional पंजीकरण वाली संस्था में नहीं किया जा सकता। इसी तरह provisional पंजीकरण वाली संस्था भी नियमित पंजीकृत संस्था में इस नियम के तहत विलय नहीं कर सकती। इसका मतलब है कि दोनों संस्थाओं की पंजीकरण स्थिति की जांच सबसे पहले करनी होगी। केवल समान उद्देश्य होना ही विलय के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
विलय के बाद पांच साल तक उद्देश्य बदलने पर रोक
नए नियम की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि विलय के बाद बनी संस्था अपने उद्देश्यों में पांच साल तक बदलाव नहीं कर सकेगी। यह पांच साल उस वित्त वर्ष के अंत से गिने जाएंगे जिसमें विलय हुआ है। उदाहरण के लिए, यदि विलय वित्त वर्ष 2026-27 में पूरा होता है, तो पांच साल की अवधि उस वित्त वर्ष के अंत के बाद शुरू होगी। इसलिए संस्थाओं को विलय की तारीख और वित्त वर्ष का हिसाब समझकर योजना बनानी चाहिए।
इस शर्त का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई संस्था केवल कर संबंधी लाभ लेने के लिए विलय न करे और बाद में अपने मूल सामाजिक या charitable उद्देश्य से अलग काम शुरू न कर दे। यदि एक संस्था शिक्षा के लिए बनी है और दूसरी भी समान शिक्षा संबंधी काम करती है, तो विलय के बाद संस्था को घोषित उद्देश्य की निरंतरता बनाए रखनी होगी। नियमों का सही अर्थ समझने के लिए संस्था को अपने trust deed, registration certificate और प्रस्तावित merger documents की कानूनी जांच करानी चाहिए।
⚖️ Merger से पहले जरूरी जांच
- पंजीकरण: दोनों संस्थाओं का status एक जैसा और पात्र होना चाहिए
- कर बकाया: पुराने tax demand और appeal की स्थिति जांचें
- लेखा परीक्षण: विलय की तारीख पर दोनों खातों का audit कराएं
- संपत्ति: सभी assets और liabilities का सही रिकॉर्ड रखें
- Form 112A: तय समय में डिजिटल रूप से दाखिल करें
पुराने Tax बकाये की जिम्मेदारी किसकी होगी?
नए नियमों में कर बकाये को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था दी गई है। जिस संस्था का विलय हो रहा है, उसके खिलाफ आयकर कानून के तहत कोई tax, interest, penalty, fine या दूसरी रकम बकाया है और उस मांग के खिलाफ अपील लंबित नहीं है, तो ऐसी स्थिति में विलय की शर्तें पूरी करना मुश्किल होगा। यदि कर मांग के खिलाफ अपील चल रही है, तो अपील का अंतिम फैसला आने पर देय रकम merged organisation को चुकानी होगी।
इसका सीधा अर्थ है कि कोई संस्था विलय करके पुराने कर दायित्व से बच नहीं सकती। विलय से पहले दोनों संस्थाओं को अपने आयकर रिकॉर्ड, पुराने नोटिस, आदेश, अपील और भुगतान की स्थिति की सूची बनानी चाहिए। यदि कोई मामला अदालत या अपीलीय अधिकारी के सामने लंबित है, तो उसकी पूरी जानकारी दस्तावेजों में रखनी होगी। भविष्य में कर विभाग की जांच या मांग आने पर merged organisation को संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं।
संपत्ति, देनदारी और पुराने मामलों का क्या होगा?
Rule 189A के अनुसार merging organisation की सभी संपत्तियां और देनदारियां विलय की तारीख से merged organisation की हो जाएंगी। इसमें बैंक खाते, जमीन, भवन, निवेश, दान से बनी संपत्ति, कर्मचारियों से जुड़े दायित्व, ऋण और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां शामिल हो सकती हैं। संस्था को हर संपत्ति और देनदारी का प्रमाणित विवरण तैयार करना चाहिए ताकि विलय के बाद कोई रिकॉर्ड छूट न जाए।
पुराने assessment, reassessment और अन्य आयकर कार्यवाही भी केवल विलय के कारण समाप्त नहीं होंगी। पहले संस्था के खिलाफ शुरू हुई कार्यवाही को नए संगठन के खिलाफ जारी माना जा सकता है। विलय वाले वित्त वर्ष में विलय से पहले की अवधि और उससे पहले के कर वर्षों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी भी merged organisation पर आ सकती है। इसलिए विलय से पहले लंबित मामलों की सूची बनाना और विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है।
Related persons को अनुचित लाभ नहीं मिलना चाहिए
नियम यह भी कहते हैं कि विलय के कारण merging या merged organisation से जुड़े किसी related person को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष निजी लाभ नहीं मिलना चाहिए। गैर-लाभकारी संस्था का धन और संपत्ति उसके घोषित जनहित के उद्देश्य के लिए होती है। इसलिए विलय की प्रक्रिया में किसी ट्रस्टी, प्रबंधक या संबंधित व्यक्ति को अनुचित फायदा पहुंचाने वाला लेन-देन नहीं होना चाहिए। सभी फैसलों का रिकॉर्ड, बैठक की कार्यवाही और संपत्ति हस्तांतरण के दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।
Form No. 112A कब और कैसे जमा करना होगा?
CBDT ने विलय की सूचना देने के लिए नया Form No. 112A निर्धारित किया है। merged organisation को विलय प्रभावी होने वाले महीने के अंत से एक महीने के भीतर अपने क्षेत्र के Principal Commissioner या Commissioner of Income Tax को यह सूचना देनी होगी। फॉर्म इलेक्ट्रॉनिक तरीके से Digital Signature या Electronic Verification Code के माध्यम से जमा किया जाएगा। संस्था को समय सीमा का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि देर से सूचना देने पर अनुपालन संबंधी परेशानी हो सकती है।
फॉर्म में दोनों संस्थाओं का नाम, पता, PAN, संपर्क जानकारी और विलय की तारीख जैसी जानकारी मांगी जाती है। इसके साथ trust deed की प्रतियां, पंजीकरण प्रमाणपत्र, विलय को मंजूरी देने वाला trustees या governing body का प्रस्ताव, विलय की तारीख के आसपास के audited accounts और विलय के कारण बताने वाले दस्तावेज देने होंगे। दोनों संस्थाओं के खातों का विलय की तारीख पर audit कराना भी जरूरी है।
व्यवहार में संस्था को पहले दोनों संगठनों की बैठक बुलाकर विलय का प्रस्ताव पारित करना चाहिए। इसके बाद कानूनी सलाहकार और accountant की मदद से संपत्ति, देनदारी, कर स्थिति और पंजीकरण की जांच करनी चाहिए। Form 112A दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान करना बेहतर रहेगा। केवल फॉर्म भरना पर्याप्त नहीं है; उसमें दी गई जानकारी सही और दस्तावेजों से समर्थित होनी चाहिए।
Charitable trusts और समाज सेवा करने वाली संस्थाओं पर असर
कई छोटे ट्रस्ट सीमित धन, कम कर्मचारियों और स्थानीय स्तर पर काम करने के कारण प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करते हैं। ऐसे में दो संस्थाओं का विलय उन्हें एक साथ संसाधन जुटाने, खर्च कम करने और सेवा का दायरा बढ़ाने में मदद कर सकता है। लेकिन नए नियमों के कारण अब विलय का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकेगा। संस्था को यह देखना होगा कि दोनों के उद्देश्य समान या मिलते-जुलते हैं, पंजीकरण की स्थिति पात्र है और किसी तरह का कर बकाया या कानूनी जोखिम छिपा नहीं है।
पांच साल तक उद्देश्य न बदल पाने की शर्त का मतलब है कि संस्था को भविष्य की योजना पहले से बनानी होगी। यदि किसी ट्रस्ट का उद्देश्य केवल शिक्षा है, तो विलय के बाद वह अचानक किसी असंबंधित व्यावसायिक या निजी गतिविधि को अपना मुख्य उद्देश्य नहीं बना सकता। इससे दानदाताओं और लाभार्थियों को भरोसा मिल सकता है कि संस्था का मूल काम जारी रहेगा। दूसरी ओर, संस्था के प्रबंधकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य की जरूरतों के लिए उसके उद्देश्य पर्याप्त रूप से स्पष्ट और व्यावहारिक हों।
इस विषय पर आधिकारिक अधिसूचना और नियमों की जानकारी के लिए Income Tax Department की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है। किसी भी विलय से पहले संस्था को अपने chartered accountant या कर विशेषज्ञ से लिखित सलाह लेनी चाहिए।
आगे संस्थाओं को क्या करना चाहिए?
जो संस्थाएं विलय पर विचार कर रही हैं, उन्हें सबसे पहले दोनों पक्षों के registration certificates और trust deeds की तुलना करनी चाहिए। इसके बाद आयकर रिटर्न, audit reports, tax demands, pending appeals, बैंक खातों, संपत्तियों और देनदारियों का मिलान करना चाहिए। यदि किसी संस्था का पंजीकरण provisional है और दूसरी का नियमित, तो नए नियम के तहत विलय की पात्रता पर विशेष ध्यान देना होगा।
इसके बाद trustees या governing body की बैठक में प्रस्ताव पारित कर विलय के कारण लिखित रूप में दर्ज करने चाहिए। सभी सदस्यों को यह समझना चाहिए कि merged organisation को पुराने संगठन की कानूनी और कर संबंधी जिम्मेदारियां भी उठानी होंगी। Form 112A की समय सीमा, डिजिटल हस्ताक्षर और जरूरी annexures पहले से तैयार रखने से अंतिम समय की गलती कम हो सकती है।
नए नियम गैर-लाभकारी संस्थाओं के विलय को रोकते नहीं हैं, बल्कि उसके लिए स्पष्ट शर्तें तय करते हैं। जिन संस्थाओं के उद्देश्य समान हैं और जिनके खाते तथा कानूनी रिकॉर्ड व्यवस्थित हैं, वे सही प्रक्रिया अपनाकर विलय कर सकती हैं। लेकिन नियमों की अनदेखी करने से कर विवाद, पंजीकरण संबंधी परेशानी और पुराने दायित्वों को लेकर जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए विलय को केवल प्रशासनिक बदलाव न मानकर कानूनी और वित्तीय प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए।
संस्था प्रबंधन और नियमों की समझ बढ़ाने के लिए Corporate Governance in India पुस्तक भी देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. CBDT के नए merger rules कब से लागू हुए हैं?
CBDT ने Notification No. 139/2026 को 30 अक्टूबर 2026 को जारी किया। अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो गई। इसलिए पात्र गैर-लाभकारी संस्थाओं को 30 अक्टूबर से नए Rule 189A की शर्तों का ध्यान रखना होगा।
2. क्या provisional और regular registered trust का विलय हो सकता है?
नए Rule 189A के अनुसार provisional पंजीकरण वाली संस्था का नियमित पंजीकृत संस्था में या इसके उलट विलय इस प्रावधान के तहत स्वीकार्य नहीं है। दोनों संस्थाओं को विलय की योजना बनाने से पहले अपनी पंजीकरण स्थिति की जांच करनी चाहिए।
3. विलय के बाद संस्था कितने समय तक उद्देश्य नहीं बदल सकती?
विलय के बाद merged organisation अपने उद्देश्यों में उस वित्त वर्ष के अंत से पांच साल तक बदलाव नहीं कर सकती जिसमें विलय हुआ है। इसलिए विलय से पहले संस्था को अपने भविष्य के सामाजिक और जनहित कार्यों की योजना स्पष्ट करनी चाहिए।
4. Form 112A जमा करने की समय सीमा क्या है?
विलय प्रभावी होने वाले महीने के अंत से एक महीने के भीतर Form 112A संबंधित Principal Commissioner या Commissioner को देना होगा। इसे Digital Signature या Electronic Verification Code के जरिए ऑनलाइन दाखिल करना जरूरी है।
5. क्या विलय के बाद पुराने tax demand समाप्त हो जाएंगे?
नहीं, पुराने कर दायित्व केवल विलय से समाप्त नहीं होते। लंबित अपील का अंतिम फैसला आने पर देय रकम merged organisation को चुकानी पड़ सकती है। पुराने assessment और दूसरी कार्यवाही भी नए संगठन के खिलाफ जारी रह सकती हैं।
निष्कर्ष
CBDT के नए नियम गैर-लाभकारी संस्थाओं के विलय को अधिक जवाबदेह बनाते हैं। पांच साल तक उद्देश्य बनाए रखना, पुराने कर दायित्व स्वीकारना और Form 112A जमा करना जरूरी होगा। इसलिए ट्रस्टों को विलय से पहले कानूनी और लेखा जांच पूरी करनी चाहिए।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी विलय या कर निर्णय से पहले अधिसूचना पढ़ें और योग्य कर विशेषज्ञ से सलाह लें।