दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 2026 की तीसरी तिमाही में सोने की खरीद तेज की है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थाओं ने कुल 321 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि से 42 प्रतिशत अधिक है और 2024 की चौथी तिमाही के बाद सबसे बड़ा तिमाही आंकड़ा है। इस खरीद से पता चलता है कि कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
तीसरी तिमाही में 321 टन की खरीद
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, तीसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों की शुद्ध खरीद 321.2 टन रही। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 226.3 टन था। जनवरी से सितंबर 2026 तक कुल खरीद 675 टन तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से छह प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार पांच साल का औसत तिमाही खरीद स्तर लगभग 227 टन रहा है, इसलिए ताजा आंकड़ा उससे काफी ऊपर है।
केंद्रीय बैंक किसी एक तिमाही की कीमत देखकर ही सोना नहीं खरीदते। उनके फैसलों में विदेशी मुद्रा भंडार का संतुलन, देश की वित्तीय सुरक्षा, मुद्रा जोखिम और लंबे समय की रणनीति शामिल होती है। इसलिए यह खरीद बाजार में भरोसे और जोखिम प्रबंधन से जुड़ा संकेत भी मानी जाती है।
चीन और पोलैंड खरीद में आगे
रिपोर्ट में बताए गए सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार चीन और पोलैंड तीसरी तिमाही के प्रमुख खरीदार रहे। चीन के केंद्रीय बैंक ने लगभग 63 टन और पोलैंड के राष्ट्रीय बैंक ने लगभग 40 टन सोना जोड़ा। दोनों देशों की घोषित खरीद मिलाकर सार्वजनिक रूप से दर्ज खरीद का बड़ा हिस्सा बनती है। कजाखस्तान और उज्बेकिस्तान ने भी लगभग 14-14 टन की बढ़ोतरी की।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि सार्वजनिक रूप से घोषित खरीद और अनुमानित कुल खरीद में अंतर है। कुछ देश खरीद की जानकारी देर से देते हैं या पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करते। इसलिए किसी देश के घोषित आंकड़े को वैश्विक खरीद का पूरा चित्र नहीं समझना चाहिए। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अनुमान लगाया कि तिमाही की कुल मांग में बिना रिपोर्ट की गई गतिविधि का हिस्सा भी बड़ा रहा।
देश सोने का भंडार क्यों बढ़ाते हैं?
सोना किसी दूसरे देश की देनदारी नहीं होता। विदेशी मुद्रा या सरकारी बॉन्ड के विपरीत, सोना किसी एक सरकार या संस्था के भुगतान वादे पर निर्भर नहीं रहता। इसी कारण कई केंद्रीय बैंक इसे अपने भंडार में विविधता लाने का साधन मानते हैं। वैश्विक तनाव, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के समय सोने की यह भूमिका चर्चा में आती है।
हालांकि सोना रखने से कोई निश्चित ब्याज आय नहीं मिलती। इसे सुरक्षित रखने, बीमा कराने और जरूरत के समय बेचने की व्यवस्था भी करनी पड़ती है। इसलिए केंद्रीय बैंक आम तौर पर कई तरह की संपत्तियों का मिश्रण रखते हैं। सोना उस मिश्रण का एक हिस्सा होता है, पूरा भंडार नहीं।
भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
केंद्रीय बैंकों की खरीद सोने की वैश्विक मांग को सहारा दे सकती है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि भारत में भाव हर दिन बढ़ेंगे। घरेलू कीमतों पर डॉलर, रुपये, ब्याज दर, आयात शुल्क और स्थानीय खरीदारी का भी असर पड़ता है। केंद्रीय बैंक की खरीद को बाजार के लंबे समय के रुझान का एक संकेत समझा जा सकता है, न कि तुरंत खरीदने या बेचने का निर्देश।
व्यक्तिगत निवेशक को अपने लक्ष्य के अनुसार सोने का विकल्प चुनना चाहिए। आभूषण पहनने के लिए खरीदे जाते हैं, जबकि सिक्के, बार या बाजार आधारित योजनाओं का उद्देश्य अलग हो सकता है। हर विकल्प की लागत, बिक्री की सुविधा और जोखिम अलग है। केवल बड़े देशों की खरीद देखकर अपनी पूरी बचत सोने में लगाना उचित नहीं होगा।
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पूरी रिपोर्ट के लिए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का केंद्रीय बैंक आंकड़ा पढ़ा जा सकता है।
तीसरी तिमाही के अहम आंकड़े
- कुल खरीद: 321.2 टन
- सालाना बढ़ोतरी: 42 प्रतिशत
- जनवरी से सितंबर खरीद: 675 टन
- चीन की घोषित खरीद: करीब 63 टन
- पोलैंड की घोषित खरीद: करीब 40 टन
केंद्रीय बैंक सोना क्यों रखते हैं?
- विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता
- मुद्रा जोखिम को संतुलित करना
- लंबे समय की वित्तीय सुरक्षा
- वैश्विक अनिश्चितता से निपटने की तैयारी
- किसी एक मुद्रा पर निर्भरता कम करना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार जुलाई से सितंबर 2026 के बीच केंद्रीय बैंकों और आधिकारिक संस्थाओं ने शुद्ध रूप से लगभग 321.2 टन सोना खरीदा। यह पिछले वर्ष की समान तिमाही से 42 प्रतिशत अधिक था।
जनवरी से सितंबर 2026 तक केंद्रीय बैंकों की अनुमानित कुल शुद्ध खरीद 675 टन रही। यह पिछले वर्ष की समान अवधि से छह प्रतिशत अधिक है। आंकड़े बाद में संशोधित हो सकते हैं क्योंकि कुछ देश देर से जानकारी देते हैं।
रिपोर्ट में उपलब्ध घोषित आंकड़ों के अनुसार चीन ने तीसरी तिमाही में करीब 63 टन और पोलैंड ने करीब 40 टन सोना जोड़ा। ये सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट की गई खरीद हैं, सभी देशों की कुल गतिविधि नहीं।
बड़ी खरीद वैश्विक मांग को सहारा दे सकती है, लेकिन कीमत पर कई कारक असर डालते हैं। डॉलर, ब्याज दर, निवेशकों की खरीद, खनन आपूर्ति और स्थानीय मुद्रा की चाल भी भाव को ऊपर या नीचे कर सकती है।
किसी एक आंकड़े के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। अपना समय, जोखिम क्षमता और बचत के लक्ष्य देखें। सोने को विविध निवेश का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन पूरी पूंजी एक ही साधन में लगाना जोखिम भरा है।
निष्कर्ष
तीसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद ने सोने की रणनीतिक अहमियत को फिर सामने रखा है। यह मांग के लिए सहायक संकेत है, लेकिन भाव की दिशा तय नहीं करती। निवेशक आंकड़ों को व्यापक बाजार संदर्भ में समझें।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपनी स्थिति और जोखिम का आकलन करें।