China Economy: चीन में युवाओं पर बेरोजगारी और AI का दबाव

चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती आने के कारण वहां के युवाओं के लिए नौकरी पाना और अपने करियर की शुरुआत करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। जिन युवाओं ने बचपन से अच्छी पढ़ाई करके बेहतर नौकरी और आरामदायक जीवन का सपना देखा था, उनमें से कई अब रोजगार की कमी, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कम होती कमाई से परेशान हैं।

कुछ युवाओं को अपनी पढ़ाई के अनुसार नौकरी नहीं मिल रही है, जबकि कई लोगों को नौकरी मिलने के बाद भी पहले की तुलना में कम वेतन पर काम करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में कुछ युवा अपने माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हैं, जबकि दूसरे लोग अस्थायी काम करके अपना खर्च चला रहे हैं।

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चीन में युवाओं के लिए रोजगार पाना क्यों हो रहा है मुश्किल?

चीन में नौकरी की समस्या ऐसे समय बढ़ रही है, जब कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर, अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार के कारण कंपनियां पहले की तरह नई नौकरियां नहीं दे पा रही हैं। अलीबाबा और बाइटडांस जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों में भी कर्मचारियों की संख्या घटाने की खबरें सामने आई हैं।

इसके अलावा, फिल्म निर्माण, वित्तीय सेवाओं और दूसरे क्षेत्रों में भी कंपनियां नए कर्मचारियों की भर्ती कम कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से भी रोजगार के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

चीन की सरकार कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके। हालांकि, इस तकनीक के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता भी बढ़ रही है।

खबर के अनुसार, पिछले वर्ष चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग ने बड़ी कंपनियों से इस तकनीक के संभावित प्रभाव के बारे में जानकारी मांगी थी। कुछ कंपनियों ने आशंका जताई थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण उनके मौजूदा पदों में से 30 प्रतिशत या उससे अधिक पर असर पड़ सकता है। इसके बाद अधिकारियों ने कंपनियों को तकनीक अपनाने के नाम पर कर्मचारियों की छंटनी से बचने की चेतावनी दी।

चीन में रोजगार संकट की मुख्य वजहें

  • आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी होना।
  • कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं की संख्या बढ़ना।
  • कंपनियों में नई भर्तियों के अवसर कम होना।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वचालित मशीनों का बढ़ता इस्तेमाल।
  • अच्छे वेतन वाली स्थायी नौकरियों की कमी।

बेरोजगारी का असर युवाओं की जिंदगी पर

रोजगार की कमी का असर युवाओं के निजी जीवन पर भी पड़ रहा है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना, स्थायी नौकरी पाना, शादी करना और परिवार शुरू करना उनके लिए पहले से अधिक कठिन हो गया है। चीन में अगस्त के दौरान 16 से 24 वर्ष की आयु के उन युवाओं में बेरोजगारी दर करीब 19 प्रतिशत रही, जो पढ़ाई नहीं कर रहे थे।

अमेरिका में इसी आयु वर्ग की बेरोजगारी दर लगभग 9 प्रतिशत थी। चीन में 25 से 29 वर्ष की आयु के लोगों में भी बेरोजगारी दर 7.5 प्रतिशत रही, जबकि अमेरिका में यह करीब 5.3 प्रतिशत थी। इसके साथ ही वेतन में बढ़ोतरी की रफ्तार भी धीमी बनी हुई है।

नौकरी और कमाई को लेकर बनी इस स्थिति के कारण कई युवा शादी करने और बच्चे पैदा करने के फैसले टाल रहे हैं। कुछ लोग अपनी बचत के सहारे जीवन बिता रहे हैं और नियमित नौकरी पाने की कोशिश भी कम कर रहे हैं। चीन में इस व्यवहार को आम बोलचाल में आराम से रहने और काम के दबाव से दूर रहने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।

हालांकि, परिवारों की आर्थिक मदद के कारण फिलहाल कई युवाओं का असंतोष खुलकर सामने नहीं आ रहा है। फिर भी लंबे समय तक रोजगार की कमी बनी रहने से सामाजिक स्तर पर समस्याएं बढ़ सकती हैं।

रियल एस्टेट क्षेत्र में गिरावट से बढ़ी परेशानी

चीन के जियांग्सू प्रांत की 27 वर्षीय झांग तियान इसका एक उदाहरण हैं। उनके माता-पिता चाहते हैं कि वह स्थायी नौकरी करें, शादी करें और परिवार शुरू करें। लेकिन वह और उनके पांच साल से साथी रहे युवक चेंग मिंग अभी अपने करियर को स्थिर करने में लगे हैं। झांग ने लैंडस्केप आर्किटेक्चर की पढ़ाई की थी, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि चीन के तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट क्षेत्र में अच्छे अवसर मिलेंगे।

लेकिन वर्ष 2021 में उनकी पढ़ाई पूरी होने के आसपास ही संपत्ति बाजार में गिरावट शुरू हो गई। नौकरी मिलने के लगभग छह महीने बाद ही उन्हें निकाल दिया गया। बाद में शंघाई में उन्हें प्रशासनिक सहायक की नौकरी मिली, लेकिन वहां वेतन पहले से कम था। पिछले वर्ष के अंत में उनकी यह नौकरी भी चली गई।

झांग और उनके साथी के लिए आर्थिक स्थिरता के बिना शादी और बच्चों की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल है। चेंग मिंग ने भी रियल एस्टेट से जुड़ी दो कंपनियों में नौकरी गंवाई। इसके बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर सीखने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कीं और एक छोटी तकनीकी कंपनी में बिक्री से जुड़ी नौकरी हासिल की।

लेकिन कुछ समय बाद कंपनी दिवालिया हो गई और अप्रैल में उन्हें फिर से नौकरी से हाथ धोना पड़ा। अब दोनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कौशल सीखकर तकनीकी क्षेत्र में बेहतर अवसर तलाशना चाहते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में भी रोजगार की स्थिरता को लेकर सवाल बने हुए हैं।

कंपनियों में भर्ती कम होने से बढ़ी चुनौती

चीन की अर्थव्यवस्था में स्थायी और अच्छे वेतन वाली नौकरियों की कमी एक बड़ी समस्या बन गई है। पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक विकास की रफ्तार महामारी से पहले के मुकाबले धीमी रही है। सरकार रोबोटिक्स जैसे कुछ क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही है, लेकिन इन उद्योगों में भी सभी युवाओं को नौकरी देने के लिए पर्याप्त पद उपलब्ध नहीं हैं।

इसके अलावा, कई कॉलेज से पढ़े युवा कारखानों में काम नहीं करना चाहते, क्योंकि वहां काम करने का माहौल और सामाजिक प्रतिष्ठा उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं होती। दूसरी ओर, कारखानों में भी रोबोट और स्वचालित मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे कुछ कामों के लिए कर्मचारियों की जरूरत कम हो रही है।

निजी शिक्षा जैसे कुछ क्षेत्रों पर सरकारी सख्ती का असर भी रोजगार पर पड़ा है। पहले इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवाओं को काम मिलता था, लेकिन अब वहां अवसर सीमित हुए हैं। चीन में उपभोक्ताओं की कमजोर मांग के कारण भी कंपनियों की कमाई पर दबाव है। जब कंपनियों को पर्याप्त मुनाफा नहीं मिलता, तो वे नई भर्तियां करने और कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने में सावधानी बरतती हैं।

एचएसबीसी के एशिया संबंधी मुख्य अर्थशास्त्री फ्रेड न्यूमैन के अनुसार, चीन के युवाओं के सामने रोजगार की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में बड़ी संख्या में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां कहां से आएंगी।

पढ़े-लिखे युवाओं को भी नहीं मिल रहा काम

वर्ष 2021 में कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने वाले जेरेमी ली को शुरुआत में एक फिल्म कंपनी में आसानी से नौकरी मिल गई थी। करियर में आगे बढ़ने की उम्मीद से उन्होंने मीडिया और संचार विषय में मास्टर डिग्री भी हासिल की। लेकिन जनवरी में पढ़ाई पूरी करने तक नौकरी का बाजार काफी कठिन हो चुका था।

उन्होंने पिछले वर्ष के अंत से करीब 100 नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन अब तक अपनी जरूरत के अनुसार काम नहीं ढूंढ पाए। कुछ नौकरियों में वेतन बहुत कम था और काम के लिए दूर जाना पड़ता। बीजिंग की एक बड़ी समाचार एजेंसी में कई चरणों की परीक्षा और साक्षात्कार के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। बचत खत्म होने के बाद वह अपने माता-पिता के साथ रहने लगे, जो सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों में काम करते हैं। अब भी वह हर सप्ताह नई नौकरियों के लिए आवेदन कर रहे हैं।

रोजगार की कमी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हांगकांग विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर स्टीवन बार्नेट के विश्लेषण के अनुसार, चीन के शहरी रोजगार में महामारी से पहले की वृद्धि जारी रहती तो वर्तमान स्तर से करीब 7 प्रतिशत अधिक नौकरियां होतीं। यह अंतर लगभग 3.7 करोड़ नौकरियों के बराबर बताया गया है।

कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आधिकारिक आंकड़े बेरोजगारी की पूरी तस्वीर नहीं दिखाते। छिंगहुआ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ली दाओकुई ने हाल में अनुमान लगाया कि यदि लंबे समय से नौकरी नहीं ढूंढ पा रहे लोगों को भी शामिल किया जाए, तो चीन में व्यापक बेरोजगारी दर करीब 10 प्रतिशत हो सकती है।

युवाओं के सामने रोजगार से जुड़ी प्रमुख चुनौतियां

  • पढ़ाई के अनुसार नौकरी नहीं मिलना।
  • कम वेतन पर काम करने की मजबूरी।
  • अनुभव की कमी के कारण भर्ती में कठिनाई।
  • नौकरी छूटने के बाद दोबारा रोजगार पाने में लंबा समय लगना।
  • आर्थिक अस्थिरता के कारण शादी और परिवार की योजनाएं टलना।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नौकरियों पर क्या असर पड़ रहा है?

लंबे समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चीन की अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। देश में जन्म दर घटने के कारण भविष्य में काम करने वाले लोगों की संख्या कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में मशीनों और स्वचालित तकनीक की मदद से कामकाज जारी रखना आसान हो सकता है।

लेकिन फिलहाल समस्या यह है कि यह तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि बड़ी संख्या में युवा स्थायी नौकरी की तलाश में हैं। कंपनियों के मानव संसाधन विभागों से जुड़े लोगों का कहना है कि अब अनुभवहीन कर्मचारियों को भर्ती करने में पहले जैसी दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है, क्योंकि उनके कई शुरुआती काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कराए जा सकते हैं।

कुछ कंपनियां ग्राहक सेवा, बिक्री, लेखांकन, आंकड़ों के विश्लेषण और मानव संसाधन जैसे कामों में डिजिटल कर्मचारियों का इस्तेमाल करने लगी हैं। शंघाईटेक विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में वर्ष 2022 से 2026 के बीच चीन के पांच प्रमुख भर्ती मंचों पर उपलब्ध करीब 70 करोड़ नौकरी संबंधी विज्ञापनों का विश्लेषण किया गया।

इसमें पाया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण एक से तीन वर्ष का अनुभव रखने वाले शुरुआती और मध्यम स्तर के कर्मचारियों की मांग पर सबसे अधिक असर पड़ा है। पहले कंपनियां नए कर्मचारियों को बुनियादी काम सौंपकर उन्हें प्रशिक्षण देती थीं, लेकिन अब कई काम बड़े भाषा मॉडल से कराए जा रहे हैं। इससे शुरुआती स्तर की कुछ नौकरियों की जरूरत घट रही है।

अस्थायी रोजगार पर भी तकनीक का प्रभाव

नियमित नौकरी नहीं मिलने के कारण कई युवा गाड़ी चलाने, भोजन पहुंचाने और इंटरनेट पर सीधे प्रसारण के जरिए कमाई करने जैसे अस्थायी काम अपना रहे हैं। लेकिन अब इन कामों पर भी तकनीक का असर पड़ने लगा है। चीन के नए रोजगार स्वरूप अनुसंधान केंद्र के अनुसार, बिना स्थायी पूर्णकालिक अनुबंध के लचीले काम करने वाले लोगों की संख्या वर्ष 2025 में करीब 28 करोड़ थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 32 करोड़ होने का अनुमान है। यह संख्या चीन के शहरी रोजगार का 40 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। हालांकि, चालक रहित टैक्सी और रोबोट के बढ़ते इस्तेमाल से इन क्षेत्रों में भी कुछ नौकरियां कम होने की आशंका है।

चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर आम तौर पर सकारात्मक सोच दिखाई देती है, लेकिन नौकरी खोने की चिंता भी बढ़ रही है। वर्ष 2025 में 11 हजार से अधिक विज्ञान और तकनीक क्षेत्र के कर्मचारियों पर किए गए एक सर्वेक्षण में दो-तिहाई से अधिक लोगों ने आशंका जताई कि अगले पांच वर्षों में उनकी नौकरी इस तकनीक के कारण जा सकती है।

जुलाई में चीन की बड़ी तकनीकी कंपनी बाइडू में काम करने वाली 26 वर्षीय एक महिला की नौकरी चली गई थी। वह उपयोगकर्ता इंटरफेस तैयार करने का काम करती थीं। नौकरी के आखिरी दिन के वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों बार देखे गए। इसके बाद वह अपने सामान के साथ दक्षिण-पूर्वी चीन में स्थित अपने गृह प्रांत जियांग्शी लौट गईं और माता-पिता के साथ रहने लगीं। उन्हें अभी तक नई नौकरी नहीं मिली है और वह भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

नौकरी जाने पर कर्मचारियों के अधिकार और सरकारी कदम

रोजगार की बदलती परिस्थितियों से निपटने के लिए चीन की स्थानीय सरकारें और विश्वविद्यालय युवाओं को करियर संबंधी सलाह, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े पाठ्यक्रम उपलब्ध करा रहे हैं। अधिकारियों ने कंपनियों को यह भी याद दिलाया है कि केवल नई तकनीक अपनाने के कारण कर्मचारियों को नौकरी से निकालना उचित नहीं माना जाना चाहिए।

एक मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से गुणवत्ता जांच का काम कराने के बाद एक पूर्व कर्मचारी को हटाने वाली कंपनी को करीब 38 हजार डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया गया। एक अन्य मामले में नक्शे से जुड़े आंकड़े जुटाने का काम करने वाले कर्मचारी ने नौकरी जाने के बाद शिकायत की और उसे मुआवजा मिला। इन मामलों से पता चलता है कि तकनीकी बदलाव के साथ कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर भी चर्चा बढ़ रही है।

बढ़ती उम्मीदें और युवाओं की बदलती सोच

चीन के युवाओं के सामने मौजूदा चुनौतियों की एक वजह उनकी बचपन से बनी उम्मीदें भी हैं। वर्ष 1990 और 2000 के दशक में जन्मे कई युवाओं को यह विश्वास दिलाया गया था कि अच्छी पढ़ाई और प्रतिष्ठित कॉलेज से डिग्री हासिल करने पर उन्हें बेहतर नौकरी और अपने माता-पिता से अधिक आरामदायक जीवन मिलेगा।

इस वर्ष चीन में रिकॉर्ड 1.27 करोड़ कॉलेज विद्यार्थियों के स्नातक होने का अनुमान है। आने वाले करीब दस वर्षों तक यह संख्या बढ़ती रहने की संभावना है। इससे नौकरी पाने के लिए प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। कई युवाओं को लगता है कि वर्षों तक पढ़ाई में मेहनत करने के बावजूद उन्हें वह अवसर नहीं मिल रहे, जिनकी उनसे उम्मीद की गई थी।

स्वतंत्र काम की ओर बढ़ रहे युवा

शंघाई में पली-बढ़ी 29 वर्षीय जेसिका टैंग ने बचपन से अच्छी शिक्षा हासिल करने के लिए काफी मेहनत की। उन्होंने स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करने और आगे अच्छे अवसर पाने के लिए अतिरिक्त पढ़ाई भी की। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान घर में रहने और लगातार अधिक समय तक काम करने के बाद उन्हें लगा कि जनसंपर्क एजेंसी में उनकी नौकरी उनके लिए सही नहीं है। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पिछले तीन वर्षों से स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। शुरुआत में उन्हें एक प्रेस विज्ञप्ति लिखने के लिए करीब 300 डॉलर मिल जाते थे, लेकिन अब काम की शर्तें कठिन हो गई हैं और प्रति घंटे होने वाली कमाई लगभग आधी रह गई है।

कुछ युवा नियमित नौकरी के लिए लगातार प्रयास करने के बजाय अपना छोटा काम शुरू कर रहे हैं। 24 वर्षीय वांग युआनरू ने डिजाइन की पढ़ाई के बाद एक कंपनी में काम किया, लेकिन उनके अनुसार, उनके काम का श्रेय उनके अधिकारी ने खुद ले लिया। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अब दाली शहर में हस्तशिल्प बेचकर अपना खर्च चलाती हैं। उनका मानना है कि स्थायी नौकरी के अवसर कम और प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है। इसलिए उन्होंने नियमित रोजगार की तलाश जारी रखने के बजाय अपना काम करने का रास्ता चुना।

इसी तरह, चीन के उत्तर-पश्चिमी गांसू प्रांत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े मा ने भी पढ़ाई के दौरान काफी दबाव महसूस किया। उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और उनसे हमेशा बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते थे। बीजिंग के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्हें अपने साथियों के बीच तालमेल बैठाने में कठिनाई हुई। बाद में उन्होंने स्नातकोत्तर की पढ़ाई छोड़ दी और कुछ समय के लिए दाली चले गए।

वहां उन्होंने दोस्तों के साथ समय बिताया, व्यायाम किया, खाना बनाया और अपनी दिनचर्या को अधिक आरामदायक बनाया। लेकिन कुछ महीनों बाद उन्हें भविष्य की चिंता सताने लगी। माता-पिता से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर निर्भर रहने के कारण उन्हें एहसास हुआ कि वह हमेशा इस तरह जीवन नहीं बिता सकते। इसके बाद उन्होंने दाली छोड़ दिया और इंडोनेशिया की यात्रा पर निकल गए।

निष्कर्ष

चीन में धीमी आर्थिक वृद्धि, स्थायी नौकरियों की कमी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं के करियर और निजी जीवन पर असर पड़ रहा है। तकनीक भविष्य में उत्पादकता बढ़ा सकती है, लेकिन फिलहाल नियमित आय, कौशल विकास और नौकरी की सुरक्षा युवाओं के लिए बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. चीन में युवाओं के लिए नौकरी पाना मुश्किल क्यों हो रहा है?

चीन की अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार, कॉलेज से स्नातक होने वाले युवाओं की बढ़ती संख्या और कंपनियों में कम भर्ती इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वचालित मशीनों के इस्तेमाल से शुरुआती स्तर की कुछ नौकरियों की मांग भी घट रही है।

2. चीन में युवा बेरोजगारी की स्थिति कैसी है?

लेख में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में चीन में पढ़ाई नहीं कर रहे 16 से 24 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर करीब 19 प्रतिशत थी। वहीं, 25 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में यह दर लगभग 7.5 प्रतिशत बताई गई।

3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से किन नौकरियों पर असर पड़ रहा है?

ग्राहक सेवा, बिक्री, लेखांकन, आंकड़ों के विश्लेषण, मानव संसाधन और कुछ शुरुआती तकनीकी कार्यों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे कुछ नियमित काम स्वचालित हो रहे हैं और अनुभवहीन कर्मचारियों की भर्ती कम हो सकती है। हालांकि, नई तकनीक से नए कौशल और रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

4. चीन के युवा शादी और परिवार शुरू करने में देरी क्यों कर रहे हैं?

स्थायी नौकरी की कमी, कम वेतन और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के कारण कई युवा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में शादी, बच्चों की परवरिश और घर चलाने की जिम्मेदारियां उठाना कठिन लगता है, इसलिए वे इन फैसलों को टाल रहे हैं।

5. चीन में रोजगार संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

स्थानीय सरकारें और विश्वविद्यालय युवाओं को करियर सलाह, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े पाठ्यक्रम उपलब्ध करा रहे हैं। अधिकारियों ने कंपनियों को तकनीक अपनाने के नाम पर कर्मचारियों की छंटनी से बचने की चेतावनी भी दी है। कुछ मामलों में नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों को मुआवजा मिला है।

डिस्क्लेमर

यह लेख उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसमें दिए गए आंकड़े और अनुमान संबंधित स्रोतों के अनुसार हैं। निवेश या करियर संबंधी निर्णय लेने से पहले नवीनतम जानकारी की पुष्टि करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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