मध्य पूर्व और यूक्रेन में ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर नए हमलों के बाद वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। मंगलवार को एशियाई कारोबार की शुरुआत में अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती बनाए रहा। सोमवार को अमेरिकी डॉलर सूचकांक में 0.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। इसके बाद यह 102.56 के स्तर पर कारोबार करता रहा। यह सूचकांक दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है। डॉलर फिलहाल अप्रैल 2025 के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर के आसपास बना हुआ है।
वैश्विक तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत
अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलने के पीछे कई कारण हैं। अमेरिका में ब्याज दरें अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक बनी हुई हैं और वहां आर्थिक वृद्धि भी मजबूत रहने की उम्मीद है। इसके अलावा, दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे माहौल में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ सकती है। मेलबर्न स्थित पेपरस्टोन समूह के शोध प्रमुख क्रिस वेस्टन के अनुसार, अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें, अमेरिका की मजबूत आर्थिक स्थिति और सुरक्षित निवेश की मांग डॉलर को समर्थन दे रही हैं।
ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले प्रतिफल में वृद्धि ने भी डॉलर को सहारा दिया है। दूसरी ओर, फ्रांस के बॉन्ड बाजार में जारी उथल-पुथल के कारण यूरो पर दबाव देखने को मिला। सोमवार को फ्रांस और जर्मनी के सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले प्रतिफल के बीच अंतर बढ़ गया। इससे यूरो की स्थिति प्रभावित हुई। मंगलवार को यूरो की कीमत लगभग स्थिर रही और यह एक डॉलर के मुकाबले 1.1159 पर कारोबार कर रहा था। ब्रिटिश पाउंड भी ज्यादा बदलाव के बिना 1.3209 डॉलर के स्तर पर बना रहा।
डॉलर को मजबूती देने वाले प्रमुख कारण
- अमेरिका में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें।
- अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि की उम्मीद।
- वैश्विक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग।
- ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी।
- अमेरिकी सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल में वृद्धि।
येन, यूरो और दूसरी मुद्राओं का हाल
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में मामूली गिरावट आई। मंगलवार को डॉलर 0.1 प्रतिशत कमजोर होकर 158.435 येन पर आ गया। यह बदलाव जापान के थोक मूल्य संबंधी आंकड़े जारी होने के बाद देखा गया। बैंक ऑफ जापान के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर तक के एक वर्ष में थोक कीमतों में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बाजार का औसत अनुमान 7.6 प्रतिशत वृद्धि का था। वास्तविक आंकड़ा अनुमान से कम रहने के कारण बाजार में मुद्रा की चाल पर असर पड़ा।
चीनी युआन भी डॉलर के मुकाबले अपनी मजबूत स्थिति के आसपास बना रहा। विदेशों में कारोबार होने वाले युआन की कीमत एक डॉलर के मुकाबले लगभग 6.6950 रही। रिपोर्ट के अनुसार, युआन चार वर्षों के अपने मजबूत स्तरों के करीब कारोबार कर रहा था। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 0.6956 अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।
ऑस्ट्रेलिया में ब्याज दरों पर बाजार की नजर
ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक की सितंबर में हुई बैठक के विवरण से भी बाजार को संकेत मिले। बैंक ने इस वर्ष चौथी बार ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में सर्वसम्मति से फैसला लिया था। अधिकारियों ने कहा कि महंगाई उम्मीद से अधिक समय तक ऊंची बनी रह सकती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर इस वर्ष पांचवीं बार भी ब्याज दर बढ़ाने का विकल्प खुला रखा गया है। ब्याज दरों को लेकर ऐसी संभावनाएं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।
न्यूजीलैंड की मुद्रा में भी कमजोरी दर्ज की गई। मंगलवार को न्यूजीलैंड डॉलर 0.1 प्रतिशत गिरकर 0.5582 अमेरिकी डॉलर पर कारोबार कर रहा था। यह पिछले 18 महीनों के निचले स्तर के आसपास बना हुआ था। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी गिरावट देखने को मिली। बिटकॉइन की कीमत 2 प्रतिशत घटकर 81,365.56 डॉलर रह गई, जबकि ईथर में 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई और इसकी कीमत 2,422.06 डॉलर पर पहुंच गई।
प्रमुख मुद्राओं और क्रिप्टोकरेंसी की स्थिति
- यूरो: 1.1159 अमेरिकी डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर।
- ब्रिटिश पाउंड: 1.3209 अमेरिकी डॉलर के स्तर पर कारोबार।
- जापानी येन: डॉलर 158.435 येन पर पहुंचा।
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर: 0.6956 अमेरिकी डॉलर पर कमजोर।
- न्यूजीलैंड डॉलर: 0.5582 अमेरिकी डॉलर पर कारोबार।
- बिटकॉइन: 81,365.56 डॉलर तक गिरावट।
- ईथर: 2,422.06 डॉलर पर पहुंचा।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के वायदा भाव 0.9 प्रतिशत गिरकर 105.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। इससे पहले सोमवार को सऊदी अरब और यूक्रेन में ऊर्जा से जुड़े ढांचे पर हमलों की खबरों के बाद तेल की कीमतों में 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। मंगलवार की गिरावट को पिछले दिन की तेजी के बाद कीमतों में आई आंशिक कमी के रूप में देखा गया।
ऊर्जा बाजार का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर
कुल मिलाकर, ऊर्जा ढांचे पर हमलों, वैश्विक तनाव, ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि से जुड़ी उम्मीदों का असर विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों पर पड़ रहा है। अमेरिकी डॉलर को फिलहाल ऊंची ब्याज दरों और सुरक्षित निवेश की मांग से समर्थन मिल रहा है, जबकि दूसरी प्रमुख मुद्राओं और क्रिप्टोकरेंसी में अलग-अलग स्तर की कमजोरी दिखाई दे रही है। आने वाले समय में ऊर्जा की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रमों में होने वाले बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
वैश्विक तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, कई प्रमुख मुद्राओं और क्रिप्टोकरेंसी में कमजोरी दिखाई दे रही है। कच्चे तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर आने वाले समय में बाजार की नजर बनी रह सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. अमेरिकी डॉलर मजबूत क्यों हो रहा है?
अमेरिका में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें, अर्थव्यवस्था में वृद्धि की उम्मीद और वैश्विक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग डॉलर को समर्थन दे रही है। ऊर्जा की कीमतों और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल में बढ़ोतरी भी इसकी मजबूती के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
2. अमेरिकी डॉलर सूचकांक क्या दर्शाता है?
अमेरिकी डॉलर सूचकांक दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाता है। इसमें बदलाव से पता चलता है कि डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो रहा है या कमजोर। हालांकि, यह किसी एक मुद्रा के मुकाबले डॉलर की पूरी स्थिति नहीं बताता।
3. वैश्विक तनाव से विदेशी मुद्रा बाजार पर क्या असर पड़ता है?
वैश्विक तनाव बढ़ने पर निवेशक अक्सर सुरक्षित माने जाने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे अमेरिकी डॉलर जैसी मुद्राओं की मांग बढ़ सकती है। हालांकि, बाजार की दिशा ब्याज दरों, आर्थिक आंकड़ों और संबंधित देशों की नीतियों पर भी निर्भर करती है।
4. कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव क्यों हो रहा है?
ऊर्जा ढांचे पर हमलों और भू-राजनीतिक तनाव से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इससे कीमतों में तेजी आ सकती है। इसके विपरीत, मांग, आपूर्ति और बाजार में मुनाफावसूली के कारण कीमतों में गिरावट भी देखी जा सकती है।
5. डॉलर की मजबूती का आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
डॉलर मजबूत होने पर भारत जैसे देशों के लिए आयात महंगा हो सकता है, खासकर जब कच्चा तेल और अन्य वस्तुएं डॉलर में खरीदी जाती हैं। इससे ईंधन लागत और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। वास्तविक असर रुपये की चाल, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। मुद्रा, क्रिप्टोकरेंसी और कमोडिटी बाजार में जोखिम होता है। निवेश से पहले नवीनतम आंकड़ों की पुष्टि करें और विशेषज्ञ की सलाह लें।

