भारत में कोयले से गैस और दूसरे औद्योगिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने सरकार से सस्ती लंबी अवधि की फाइनेंसिंग, उत्पाद खरीदने वाले भरोसेमंद ग्राहक और परियोजनाओं की मंजूरी जल्दी देने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि इन सुविधाओं से कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं में निवेश करना आसान हो सकता है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक हर साल 10 करोड़ टन कोयले की गैसीफिकेशन क्षमता हासिल करना है।
Coal Gasification परियोजनाओं के लिए फंडिंग क्यों जरूरी है?
कोल गैसीफिकेशन में कोयले को सिंथेसिस गैस यानी सिंगैस में बदला जाता है। इस गैस से मेथनॉल, अमोनिया, खाद और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस जैसे उत्पाद बनाए जा सकते हैं। सरकार इस तकनीक के जरिए देश में उपलब्ध कोयले का बेहतर उपयोग करना और कुछ आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है।
Gasification Technologies & Research Council of India के अध्यक्ष और पूर्व कोयला सचिव अमृत लाल मीणा के अनुसार, परियोजनाओं को लंबे समय के कर्ज, भुगतान शुरू करने से पहले राहत अवधि, क्रेडिट गारंटी और सरकारी प्रोत्साहन राशि समय पर मिलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को National Infrastructure Pipeline के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा मिलने से सस्ता कर्ज जुटाने में मदद मिल सकती है।
कोल गैसीफिकेशन निवेश की मुख्य मांगें
- लंबी अवधि का कर्ज: आसान शर्तों पर वित्तीय सहायता और क्रेडिट गारंटी।
- पक्का बाजार: खाद, गैस, केमिकल और स्टील कंपनियों के साथ लंबे समय के खरीद समझौते।
- सरकारी मदद: प्रोत्साहन राशि का अनुमानित समय पर भुगतान।
- बेहतर सुविधाएं: कोयला, पानी, बिजली और परिवहन की भरोसेमंद उपलब्धता।
उत्पाद खरीदने की गारंटी से निवेश को सहारा
उद्योग ने खाद, गैस, रसायन और स्टील कंपनियों के साथ लंबे समय के खरीद समझौते करने की मांग की है। ऐसी व्यवस्था से परियोजना शुरू करने वाली कंपनियों को पहले से अंदाजा मिल सकता है कि उनके उत्पाद कौन खरीदेगा। शुरुआती परियोजनाओं के लिए खरीद की गारंटी और कीमत में उतार-चढ़ाव को संभालने वाली व्यवस्था भी मददगार हो सकती है।
कंपनियों ने कोयले की मात्रा, गुणवत्ता, कीमत और डिलीवरी का समय तय करने वाले लंबे सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट की जरूरत भी बताई है। जमीन हासिल करने और सरकारी मंजूरी की प्रक्रिया में अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल होने से काम तेजी से आगे बढ़ सकता है।
सरकार की ₹46,000 करोड़ से अधिक की योजनाएं
सरकार कोल गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए दो प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। जनवरी 2024 में मंजूर ₹8,500 करोड़ की योजना आठ परियोजनाओं को सहायता देती है। इन परियोजनाओं से हर साल करीब 1.2 करोड़ टन कोयले की गैसीफिकेशन की उम्मीद है।
मई 2026 में मंजूर नई ₹37,500 करोड़ की योजना का लक्ष्य करीब 7.5 करोड़ टन कोयले और लिग्नाइट की गैसीफिकेशन को बढ़ावा देना है। इस योजना से ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश जुटने की उम्मीद जताई गई है। ये लक्ष्य योजनाओं की घोषित रूपरेखा पर आधारित हैं, वास्तविक परिणाम परियोजनाओं की प्रगति पर निर्भर करेंगे।
सरकारी योजनाओं की जरूरी जानकारी
- पहली योजना: ₹8,500 करोड़, जनवरी 2024 में मंजूर।
- पहली योजना का दायरा: आठ परियोजनाएं और करीब 1.2 करोड़ टन सालाना लक्ष्य।
- नई योजना: ₹37,500 करोड़, मई 2026 में मंजूर।
- नई योजना का लक्ष्य: लगभग 7.5 करोड़ टन कोयला और लिग्नाइट।
- संभावित निवेश: ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़।
परियोजना की लागत और तकनीक पर भी ध्यान
Coal India और Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) की संयुक्त कंपनी Bharat Coal Gasification and Chemicals Ltd के प्रबंध निदेशक पीयूष कुमार ने कहा कि परियोजनाओं को सफल बनाने के लिए लागत पर नियंत्रण, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण की क्षमता तथा मजबूत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जरूरी होंगे।
उन्होंने कोयले की धुलाई और उसमें राख की अधिक मात्रा जैसे मुद्दों को भी नीति बनाते समय ध्यान में रखने की जरूरत बताई। इन कारणों से परियोजना की लागत और उससे मिलने वाला लाभ बदल सकता है। कोयला क्षेत्र की योजनाओं और घोषणाओं के लिए पाठक कोयला मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. कोल गैसीफिकेशन क्या है?
इस प्रक्रिया में कोयले को सिंथेसिस गैस में बदला जाता है। इस गैस का इस्तेमाल मेथनॉल, अमोनिया, खाद, रसायन और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस जैसे उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। इससे घरेलू कोयले का उपयोग नए औद्योगिक कामों में हो सकता है।
2. उद्योग सरकार से क्या चाहता है?
उद्योग सस्ता और लंबी अवधि का कर्ज, सरकारी प्रोत्साहन समय पर मिलने, उत्पाद खरीदने वाले भरोसेमंद ग्राहकों और परियोजनाओं की मंजूरी जल्दी देने की मांग कर रहा है। साथ ही कोयला, पानी, बिजली और परिवहन जैसी जरूरी सुविधाएं भी चाहिए।
3. सरकार का 2030 तक क्या लक्ष्य है?
सरकार का घोषित लक्ष्य 2030 तक हर साल 10 करोड़ टन कोयले की गैसीफिकेशन करना है। इसे हासिल करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन योजनाओं और औद्योगिक परियोजनाओं को समर्थन दिया जा रहा है। लक्ष्य पूरा होना परियोजनाओं के समय पर तैयार होने पर निर्भर करेगा।
4. नई प्रोत्साहन योजना कितने रुपये की है?
मई 2026 में मंजूर नई योजना ₹37,500 करोड़ की है। इसका लक्ष्य लगभग 7.5 करोड़ टन कोयले और लिग्नाइट की गैसीफिकेशन को प्रोत्साहित करना है। इससे ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक निवेश जुटने की उम्मीद है।
5. लंबी अवधि के खरीद समझौते क्यों जरूरी हैं?
ऐसे समझौतों से कंपनियों को अपने उत्पादों के संभावित खरीदार और बिक्री की बेहतर जानकारी मिलती है। इससे आय का अनुमान लगाने और कर्ज चुकाने की योजना बनाने में आसानी हो सकती है। निवेशक परियोजना के जोखिम को समझने के लिए भी इन समझौतों को महत्व देते हैं।
निष्कर्ष
कोल गैसीफिकेशन में निवेश बढ़ाने के लिए केवल सरकारी प्रोत्साहन काफी नहीं होंगे। सस्ता कर्ज, भरोसेमंद ग्राहक, नियमित कोयला आपूर्ति और समय पर मंजूरी भी जरूरी हैं। इन जरूरतों पर काम होने से परियोजनाओं को आगे बढ़ने और घरेलू संसाधनों से औद्योगिक उत्पाद बनाने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है। योजनाओं और निवेश के आंकड़ों में बदलाव संभव है। निवेश से जुड़ा निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।
