कालका-शिमला DHMU ट्रेन का अंतिम ट्रायल सफल, मंजूरी का इंतजार

यूनेस्को विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल मार्ग पर नई DHMU ट्रेन और पैनोरमिक कोच के संचालन की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। दोनों का चौथा और अंतिम ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। अब इनके नियमित संचालन के लिए केवल कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सीआरएस की रिपोर्ट अगले 15 दिनों के भीतर रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी। मंजूरी मिलते ही दोनों सेवाओं को यात्रियों के लिए शुरू किया जा सकता है।

कालका-शिमला रेल मार्ग पर DHMU ट्रेन और पैनोरमिक कोच का अंतिम ट्रायल सफल

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पैनोरमिक कोच का परीक्षण कालका से बरोग सेक्शन के बीच किया गया, जबकि तीन कोच वाले DHMU ट्रेन सेट का ट्रायल बरोग से शिमला तक हुआ। इस दौरान सुरक्षा, ब्रेकिंग सिस्टम, पहाड़ी रास्तों पर ट्रेन का प्रदर्शन, सीटों की मजबूती, आपातकालीन उपकरणों और यात्रियों के चढ़ने-उतरने जैसी सभी जरूरी व्यवस्थाओं की विस्तार से जांच की गई।

DHMU ट्रेन और पैनोरमिक कोच की मुख्य बातें

  • रेल मार्ग: कालका-शिमला
  • ट्रायल: चौथा और अंतिम सफल
  • अंतिम मंजूरी: कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS)
  • रिपोर्ट: 15 दिनों में रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी
  • लाभ: मंजूरी मिलते ही नियमित संचालन शुरू हो सकेगा

सुरक्षा और तकनीकी मानकों की हुई जांच

ट्रायल के दौरान DHMU ट्रेन दोपहर 12:50 बजे कालका से रवाना हुई और करीब 3 बजे बरोग पहुंची। इसके बाद ट्रेन 3:26 बजे बरोग से चली और शाम 6:20 बजे शिमला पहुंची। पूरे सफर के दौरान रेलवे अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने ट्रेन के संचालन और प्रदर्शन का बारीकी से मूल्यांकन किया।

इस परीक्षण के समय कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी, अंबाला मंडल के मंडल रेल प्रबंधक विनोद भाटिया सहित रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों का कहना है कि यदि सीआरएस की रिपोर्ट में सभी मानकों को सही पाया गया तो जल्द ही व्यावसायिक संचालन की अनुमति दे दी जाएगी।

नई DHMU ट्रेन की विशेषताएं

  • कोच: 3 आधुनिक कोच
  • क्षमता: प्रत्येक कोच में लगभग 60 यात्री
  • इंजन: अलग इंजन की आवश्यकता नहीं
  • सुविधा: एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से आवागमन
  • उद्देश्य: अधिक आरामदायक और आधुनिक यात्रा

अब अंतिम मंजूरी का इंतजार

नई DHMU ट्रेन सेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अलग इंजन की जरूरत नहीं होती। यह तीन आपस में जुड़े आधुनिक कोचों से बनी है और प्रत्येक कोच में लगभग 60 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। यात्री एक कोच से दूसरे कोच में बिना ट्रेन से उतरे आसानी से जा सकते हैं, जिससे सफर अधिक सुविधाजनक होगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी कारणों से पहले तीन बार इसका ट्रायल पूरी तरह सफल नहीं हो सका था, लेकिन चौथे प्रयास में सभी जरूरी परीक्षण सफल रहे। अब उम्मीद है कि अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इस वर्ष सर्दियों के पर्यटन सीजन से पहले कालका-शिमला रेल मार्ग पर यह आधुनिक ट्रेन और पैनोरमिक कोच यात्रियों के लिए उपलब्ध हो जाएंगे।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध आधिकारिक और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। अंतिम संचालन सीआरएस और रेलवे बोर्ड की मंजूरी पर निर्भर करेगा।

Gourav Kumar Singh

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