भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों के लिए हवाई अड्डे पर पहचान और दस्तावेज जांच की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। 2 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने सात भारतीय हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजीयात्रा की ई-पासपोर्ट आधारित सुविधा का परीक्षण शुरू किया है। इस परीक्षण में पात्र भारतीय नागरिक अपने ई-पासपोर्ट से डिजिटल पहचान तैयार करके कुछ चुनिंदा उड़ानों और तय स्थानों पर चेहरे की पहचान के जरिए आगे बढ़ सकेंगे। इसका उद्देश्य यात्रा के कुछ चरणों को सरल बनाना है, लेकिन यह मौजूदा दस्तावेज और आव्रजन प्रक्रिया का विकल्प नहीं है।
किन हवाई अड्डों पर सुविधा का परीक्षण हो रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार यह परीक्षण दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, मुंबई, चेन्नई और अमृतसर हवाई अड्डों पर किया जा रहा है। सुविधा अभी सभी यात्रियों और सभी उड़ानों के लिए उपलब्ध नहीं है। यह पात्र भारतीय नागरिकों के लिए है जिनके पास ई-पासपोर्ट है और जो एयर इंडिया या इंडिगो की चुनिंदा उड़ानों से यात्रा कर रहे हैं। हवाई अड्डे पर जहां जरूरी तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध होगी, वहीं इस सुविधा का उपयोग किया जा सकेगा।
परीक्षण के दौरान यात्री टर्मिनल में प्रवेश, सुरक्षा जांच वाले क्षेत्र और बोर्डिंग गेट जैसे चुनिंदा स्थानों पर डिजिटल पहचान का उपयोग कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर काउंटर या हर चरण पर पासपोर्ट दिखाने की जरूरत खत्म हो जाएगी। यात्रियों को अपने यात्रा दस्तावेज साथ रखने होंगे और एयरलाइन की जांच तथा आव्रजन से जुड़ी सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
ई-पासपोर्ट से डिजिटल पहचान कैसे बनेगी?
रिपोर्ट के अनुसार पात्र यात्री को डिजीयात्रा मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-पासपोर्ट आधारित सत्यापित पहचान तैयार करनी होगी। इसके लिए पासपोर्ट के मशीन से पढ़े जाने वाले हिस्से को स्कैन किया जाएगा। इसके बाद संगत मोबाइल फोन की निकट क्षेत्र संचार सुविधा से पासपोर्ट में मौजूद चिप पढ़ी जाएगी। यात्री की तस्वीर लेकर विवरण का मिलान किया जाएगा और तैयार पहचान फोन में मौजूद डिजीयात्रा वॉलेट में सुरक्षित रखी जाएगी।
यह प्रक्रिया तभी काम करेगी जब यात्री का फोन जरूरी तकनीकी सुविधा का समर्थन करता हो और पासपोर्ट की चिप पढ़ी जा सके। यदि फोन में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है या पहचान तैयार करने में परेशानी आती है तो यात्री को सामान्य दस्तावेज जांच प्रक्रिया अपनानी होगी। इसलिए उड़ान से पहले ऐप की तैयारी करना और एयरलाइन के निर्देश पढ़ना उपयोगी रहेगा।
✈️ अंतरराष्ट्रीय डिजीयात्रा ट्रायल की जानकारी
- रिपोर्ट की तारीख: 2 नवंबर 2026
- परीक्षण वाले हवाई अड्डे: 7
- शहर: दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, मुंबई, चेन्नई और अमृतसर
- पात्र यात्री: ई-पासपोर्ट रखने वाले भारतीय नागरिक
- चुनिंदा विमान सेवाएं: एयर इंडिया और इंडिगो
- अगला लक्ष्य: 2027 तक 25 अन्य हवाई अड्डों को शामिल करने की योजना
क्या इससे इमिग्रेशन और पासपोर्ट जांच खत्म होगी?
नहीं। यह सुविधा यात्रा के कुछ हवाई अड्डा चरणों में पहचान सत्यापन को आसान बनाने के लिए है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यात्रियों को अपने यात्रा दस्तावेज साथ रखने होंगे और एयरलाइन की दस्तावेज जांच, आव्रजन प्रक्रिया तथा अन्य लागू औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसलिए इसे पासपोर्ट का डिजिटल विकल्प या बिना दस्तावेज विदेश जाने की सुविधा समझना गलत होगा।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा में गंतव्य देश के प्रवेश नियम भी लागू होते हैं। वीजा, पासपोर्ट की वैधता, वापसी टिकट और अन्य दस्तावेजों की जरूरत गंतव्य देश तथा यात्रा की स्थिति पर निर्भर करती है। डिजीयात्रा की सुविधा इन नियमों को नहीं बदलती। यात्रियों को उड़ान से पहले एयरलाइन और संबंधित सरकारी विभाग की जानकारी जांचनी चाहिए।
इस परीक्षण से अधिकारियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि डिजिटल पहचान अलग-अलग हवाई अड्डों पर कितनी अच्छी तरह काम करती है। अलग-अलग टर्मिनल, कैमरे, इंटरनेट कनेक्शन और यात्रियों की संख्या के कारण तकनीकी अनुभव बदल सकता है। परीक्षण से मिले सुझावों के आधार पर आगे की योजना बनाई जा सकती है।
यात्रियों की निजता और सुरक्षा क्यों जरूरी है?
चेहरे की पहचान और पासपोर्ट की चिप से जुड़ी जानकारी संवेदनशील होती है। इसलिए यात्रियों को यह समझना चाहिए कि ऐप कौन-सी जानकारी लेता है, वह फोन में कैसे रखी जाती है और किस स्थिति में साझा होती है। किसी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें। केवल आधिकारिक ऐप स्टोर और सरकारी सूचना में बताए गए माध्यम का उपयोग करें।
मोबाइल फोन पर मजबूत स्क्रीन लॉक रखें और ऐप को केवल जरूरी अनुमतियां दें। यदि फोन खो जाए तो अपने खाते और डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए आधिकारिक सहायता से संपर्क करें। सार्वजनिक स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को अपना फोन अनलॉक करके न दें। पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों की तस्वीरें अनजान लोगों के साथ साझा करने से बचें।
डिजिटल पहचान की सुविधा का उपयोग करना वैकल्पिक हो सकता है, इसलिए यदि कोई यात्री इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहता या तकनीकी समस्या आती है तो उसे सामान्य प्रक्रिया के बारे में एयरलाइन से जानकारी लेनी चाहिए। यात्रियों को यह नहीं मानना चाहिए कि ऐप में पहचान तैयार होने के बाद हवाई अड्डे पर बाकी सभी जांच अपने आप पूरी हो जाएंगी।
2027 में 25 और हवाई अड्डों तक विस्तार की योजना
रिपोर्ट के अनुसार सरकार की योजना 2027 तक 25 अन्य भारतीय हवाई अड्डों को इस व्यवस्था में शामिल करने की है। यह विस्तार परीक्षण के अनुभव, तकनीकी उपलब्धता और यात्रियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हर हवाई अड्डे पर सुविधा किस तारीख से शुरू होगी या कौन-कौन सी उड़ानें पहले शामिल होंगी। इसलिए इसे तय समय-सारणी के बजाय प्रस्तावित विस्तार योजना के रूप में समझना चाहिए।
डिजीयात्रा फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश खड़कभावी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय पहचान ढांचों के साथ तालमेल बनाना आगे की यात्रा को सरल बनाने में मदद कर सकता है। रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ की वन आईडी पहल और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन की सार्वजनिक कुंजी निर्देशिका जैसे ढांचों का उल्लेख है। इनसे जुड़े मानकों का उद्देश्य सीमा पार यात्रा में डिजिटल दस्तावेजों की पहचान और भरोसे को बेहतर बनाना है।
यात्रा के दौरान मोबाइल की बैटरी खत्म न हो, इसके लिए लोग अपनी जरूरत के अनुसार पावर बैंक रख सकते हैं। यहां एक पोर्टेबल पावर बैंक देखें। खरीदने से पहले अपने फोन के चार्जिंग मानक और क्षमता जांचें। इस सहयोगी लिंक से खरीदारी होने पर वेबसाइट को कमीशन मिल सकता है। हवाई यात्रा में पावर बैंक ले जाने के नियम अलग होते हैं, इसलिए एयरलाइन के निर्देश अवश्य जांचें।
यात्रा से पहले यात्रियों को क्या करना चाहिए?
यात्रा से पहले पासपोर्ट की वैधता, वीजा, टिकट और एयरलाइन के निर्देश जांचें। यदि आप परीक्षण में शामिल उड़ान और हवाई अड्डे से जा रहे हैं तो देखें कि आप पात्र हैं या नहीं। ऐप को समय रहते अपडेट करें और ई-पासपोर्ट की चिप पढ़ने की प्रक्रिया समझें। यात्रा के दिन फोन चार्ज रखें, लेकिन पासपोर्ट और अन्य मूल दस्तावेज भी साथ रखें।
यदि ऐप काम न करे तो घबराने की जरूरत नहीं है। एयरलाइन के काउंटर या हवाई अड्डे के कर्मचारियों से सामान्य जांच प्रक्रिया के बारे में पूछें। बोर्डिंग समय से पहले पहुंचें ताकि तकनीकी परेशानी होने पर भी दस्तावेज जांच पूरी करने के लिए पर्याप्त समय रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. अंतरराष्ट्रीय डिजीयात्रा ट्रायल किन यात्रियों के लिए है?
रिपोर्ट के अनुसार यह सुविधा पात्र भारतीय नागरिकों के लिए है जिनके पास ई-पासपोर्ट है और जो एयर इंडिया या इंडिगो की चुनिंदा उड़ानों से यात्रा कर रहे हैं। हर यात्री और हर उड़ान फिलहाल इस परीक्षण में शामिल नहीं है।
2. किन सात हवाई अड्डों पर परीक्षण शुरू हुआ है?
परीक्षण दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, मुंबई, चेन्नई और अमृतसर हवाई अड्डों पर किया जा रहा है। सुविधा उन्हीं तय स्थानों पर उपलब्ध होगी जहां जरूरी तकनीकी व्यवस्था मौजूद है। यात्रा से पहले एयरलाइन से पुष्टि करना बेहतर है।
3. क्या डिजीयात्रा से पासपोर्ट साथ रखना जरूरी नहीं रहेगा?
नहीं। यात्रियों को अपना पासपोर्ट और दूसरे जरूरी यात्रा दस्तावेज साथ रखने होंगे। एयरलाइन की जांच, आव्रजन और गंतव्य देश के प्रवेश नियम पहले की तरह लागू रहेंगे। यह सुविधा केवल कुछ हवाई अड्डा चरणों में पहचान सत्यापन आसान बनाती है।
4. ई-पासपोर्ट से पहचान तैयार करने के लिए क्या चाहिए?
यात्री को डिजीयात्रा ऐप, ई-पासपोर्ट और पासपोर्ट की चिप पढ़ने में सक्षम मोबाइल फोन की जरूरत होगी। प्रक्रिया में पासपोर्ट विवरण स्कैन करना, चिप पढ़ना और तस्वीर के जरिए पहचान मिलाना शामिल है। ऐप में दिए गए आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
5. क्या 2027 तक सभी हवाई अड्डों पर यह सुविधा मिलेगी?
रिपोर्ट में 2027 तक 25 अन्य हवाई अड्डों को शामिल करने की योजना बताई गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उसी तारीख तक देश के सभी हवाई अड्डों पर सुविधा निश्चित रूप से शुरू हो जाएगी। विस्तार की आधिकारिक समय-सारणी का इंतजार करना होगा।
निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजीयात्रा का परीक्षण हवाई अड्डे की पहचान प्रक्रिया को आसान बना सकता है। फिलहाल सुविधा सात हवाई अड्डों और पात्र यात्रियों तक सीमित है। पासपोर्ट, वीजा और अन्य जरूरी दस्तावेज साथ रखना अब भी अनिवार्य है।
अस्वीकरण: यह लेख समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। यात्रा से पहले एयरलाइन और सरकारी विभाग की ताजा सूचना अवश्य जांचें।