भारत में खाद्य तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बीच कम बारिश और सोयाबीन जैसी प्रमुख तिलहनी फसलों की पैदावार को लेकर चिंता के कारण अगले तेल वर्ष में देश का खाद्य तेल आयात बढ़ने का अनुमान है। कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, खेती का रकबा थोड़ा बढ़ने के बावजूद उत्पादन में उतनी बढ़ोतरी होना तय नहीं है।
Edible Oil Imports: आयात बढ़ने का अनुमान
उद्योग के अनुमानों के अनुसार, नवंबर से शुरू होने वाले अगले तेल वर्ष में भारत करीब 1.7 करोड़ टन खाद्य तेल आयात कर सकता है। यह मौजूदा तेल वर्ष के अनुमानित 1.65 करोड़ टन आयात से लगभग 3 प्रतिशत अधिक होगा। वर्ष 2024-25 में देश ने करीब 1.601 करोड़ टन खाद्य तेल आयात किया था।
भारत हर साल लगभग 2.6 करोड़ टन खाद्य तेल का इस्तेमाल करता है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश अपनी जरूरत का करीब 60 से 65 प्रतिशत खाद्य तेल विदेशों से मंगाता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों या आपूर्ति में बदलाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है।
खाद्य तेल आयात से जुड़ी अहम बातें
- अगले तेल वर्ष का अनुमान: 1.7 करोड़ टन आयात
- अनुमानित बढ़ोतरी: करीब 3 प्रतिशत
- मौजूदा साल का अनुमान: 1.65 करोड़ टन
- भारत की सालाना खपत: लगभग 2.6 करोड़ टन
- आयात पर निर्भरता: जरूरत का करीब 60 से 65 प्रतिशत
कम बारिश से फसल की पैदावार पर चिंता
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता के अनुसार, भारत में हर साल खाद्य तेल की मांग में करीब 8 से 10 लाख टन की बढ़ोतरी होती है। इतनी अतिरिक्त मात्रा देश में पैदा करने के लिए लगभग 25 से 30 लाख टन अधिक तिलहन की जरूरत होगी।
मेहता के मुताबिक, खरीफ मौसम में तिलहन की बुवाई का कुल क्षेत्र थोड़ा बढ़ा है, लेकिन कम बारिश से पैदावार घटने की आशंका है। रबी मौसम की फसलों को लेकर भी अनिश्चितता है। अल नीनो का संभावित असर मौसम और कृषि उत्पादन के लिए एक और जोखिम बन सकता है।
सोयाबीन और मूंगफली की खेती का हाल
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 अक्टूबर तक तिलहन की कुल बुवाई का क्षेत्र करीब 1.966 करोड़ हेक्टेयर था, जबकि एक साल पहले यह लगभग 1.963 करोड़ हेक्टेयर था। हालांकि, खेती का क्षेत्र बढ़ने से उत्पादन भी उसी अनुपात में बढ़े, यह जरूरी नहीं है। बारिश, मौसम और प्रति हेक्टेयर पैदावार का बड़ा असर रहता है।
भारत की प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन का क्षेत्र करीब 1.23 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से लगभग 14 हजार हेक्टेयर कम है। दूसरी ओर, मूंगफली का क्षेत्र करीब एक हजार हेक्टेयर बढ़कर 51 लाख हेक्टेयर हो गया। सूरजमुखी की बुवाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मांग बढ़ने के पीछे मुख्य कारण
- जनसंख्या: लोगों की संख्या बढ़ने से खपत में इजाफा
- आय: आमदनी बढ़ने से प्रति व्यक्ति इस्तेमाल में बढ़ोतरी
- शहरीकरण: शहरों में बदलती खानपान की आदतें
- प्रोसेस्ड फूड: पैक किए और तैयार खाद्य पदार्थों का अधिक इस्तेमाल
- रेस्तरां कारोबार: फूड सर्विस क्षेत्र के विस्तार से मांग में बढ़ोतरी
खाद्य तेल की खपत लगातार बढ़ रही है
क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक राहुल गुहा के अनुसार, भारत में खाद्य तेल की खपत वित्त वर्ष 2021-22 के करीब 2.28 करोड़ टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 2.57 करोड़ टन हो गई। यह लगभग 3 प्रतिशत की औसत सालाना वृद्धि को दिखाता है। वित्त वर्ष 2026-27 में खपत करीब 2.65 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है।
महंगाई और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद खाद्य तेल की मांग बनी हुई है। जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, खानपान में बदलाव, तैयार खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत और होटल-रेस्तरां क्षेत्र का विस्तार इसके प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों को मध्यम अवधि में भी मांग में करीब 3 प्रतिशत सालाना वृद्धि की उम्मीद है।
घरेलू उत्पादन बढ़ाना क्यों जरूरी है?
भारत की आयात पर निर्भरता कम करने के लिए देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। घरेलू उत्पादन मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों और विदेशों से आपूर्ति में होने वाले बदलावों का असर कम किया जा सकता है। खाद्य तेल पर राष्ट्रीय मिशन जैसी सरकारी पहल का उद्देश्य भी देश में उत्पादन बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहन देने में मदद करना है।
भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की खपत करीब 17.6 किलोग्राम रहने का अनुमान है। हालांकि, तेल की जरूरत व्यक्ति की उम्र, खानपान और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन लंबे समय में स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की बताई गई सीमाओं और व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।
खाद्य तेल और पोषण से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. भारत में खाद्य तेल का आयात क्यों बढ़ सकता है?
खाद्य तेल की घरेलू मांग बढ़ रही है, जबकि कम बारिश से सोयाबीन और अन्य तिलहनी फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं बढ़ा तो देश को विदेशों से अधिक तेल खरीदना पड़ सकता है।
2. अगले तेल वर्ष में कितना खाद्य तेल आयात होने का अनुमान है?
उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, नवंबर से शुरू होने वाले अगले तेल वर्ष में भारत करीब 1.7 करोड़ टन खाद्य तेल आयात कर सकता है। यह मौजूदा तेल वर्ष के अनुमानित 1.65 करोड़ टन से लगभग 3 प्रतिशत अधिक है।
3. भारत अपनी जरूरत का कितना खाद्य तेल आयात करता है?
भारत अपनी कुल खाद्य तेल जरूरत का करीब 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घट सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कुछ कम हो सकता है।
4. कम बारिश से तिलहन उत्पादन पर क्या असर पड़ता है?
बारिश कम होने पर फसलों की बढ़वार और दानों के विकास पर असर पड़ सकता है, जिससे प्रति हेक्टेयर पैदावार घट सकती है। ऐसे में बुवाई का क्षेत्र बढ़ने के बावजूद कुल उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाती।
5. खाद्य तेल की मांग बढ़ने के प्रमुख कारण क्या हैं?
जनसंख्या और आमदनी में बढ़ोतरी, शहरीकरण, खानपान की बदलती आदतें, तैयार खाद्य पदार्थों की खपत और होटल-रेस्तरां कारोबार का विस्तार खाद्य तेल की मांग बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।
निष्कर्ष
भारत में खाद्य तेल की मांग बढ़ने और फसल उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आयात में इजाफा हो सकता है। घरेलू तिलहन उत्पादन बढ़ाना, किसानों को बेहतर सहायता देना और मौसम के जोखिमों से निपटना आयात निर्भरता घटाने के लिए अहम होगा।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध उद्योग अनुमानों और रिपोर्ट पर आधारित है। आयात तथा उत्पादन के वास्तविक आंकड़े मौसम और बाजार की स्थिति के अनुसार बदल सकते हैं।