इस साल अल नीनो का असर अभी अपने चरम पर नहीं पहुंचा है और आने वाले समय में दुनिया के कई हिस्सों में तेज गर्मी तथा बारिश के असामान्य पैटर्न देखने को मिल सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन के नए अनुमान के अनुसार, फरवरी 2027 तक अल नीनो के बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। एजेंसी ने इसे पिछले कई दशकों की सबसे मजबूत घटनाओं में से एक बताया है।
अल नीनो का असर अभी और बढ़ने की आशंका
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार अल नीनो की ताकत काफी अधिक हो सकती है। ऐसे मजबूत अल नीनो के दौरान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है और बारिश के तरीके में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसका सीधा असर खेती और खाद्य उत्पादन पर पड़ सकता है। गन्ने, गेहूं, मक्का और दूसरी फसलों की पैदावार प्रभावित होने से दुनिया के बाजारों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का असर पहले से ही दिखाई देने लगा है। मौसम में बदलाव की आशंकाओं के कारण कई वस्तुओं की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। मक्का की कीमत जून के अंत के निचले स्तर से करीब 33 प्रतिशत बढ़ चुकी है। इसके पीछे काला सागर क्षेत्र से आपूर्ति में आने वाली रुकावट के साथ-साथ दक्षिण अमेरिका में मक्का उत्पादन घटने की चिंता भी बताई जा रही है। अगर वहां उत्पादन कम हुआ तो दुनिया में उपलब्ध मक्का का भंडार और घट सकता है।
अल नीनो से जुड़ी बड़ी चिंताएं
- दुनिया के कई हिस्सों में तेज गर्मी बढ़ सकती है।
- बारिश के सामान्य पैटर्न में बदलाव हो सकता है।
- मक्का, गेहूं और गन्ने जैसी फसलों पर असर पड़ सकता है।
- खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
गन्ने की फसल पर भी बढ़ा खतरा
एशिया और दक्षिण अमेरिका में गन्ने की फसल पर भी इस मौसम घटना का असर पड़ सकता है। भारत में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि ब्राजील में इसके विपरीत अधिक बारिश की स्थिति बन सकती है। दोनों परिस्थितियां गन्ने की फसल के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं। इसी चिंता के कारण चीनी की कीमत जुलाई के अंत के स्तर से करीब 23 प्रतिशत ऊपर पहुंच गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस साल अल नीनो जितना मजबूत होगा, फसलों और मौसम पर इसका असर उतना ही अधिक होने की संभावना है। पुराने आंकड़ों से भी पता चलता है कि मजबूत अल नीनो के दौरान मौसम पर निर्भर वस्तुओं के बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिलती है। इसका असर किसानों, खाद्य कंपनियों, कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
प्रशांत महासागर के तापमान ने बढ़ाई चिंता
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार जुलाई और अगस्त की शुरुआत में प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में पानी का तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस से अधिक ऊपर था। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार सामान्य औसत से 2 डिग्री सेल्सियस ऊपर का तापमान भी बहुत मजबूत या गंभीर अल नीनो की स्थिति मानी जा सकती है। ऐसे में इस बार की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
अल नीनो का संभावित असर
- फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की संभावना जताई गई है।
- तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है।
- खेती और खाद्य उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- चीनी और मक्का जैसी वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
कितनी गर्मी और कितना नुकसान होगा, अब इस पर नजर
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की प्रमुख सेलेस्टे साउलो ने कहा कि अब सवाल यह नहीं है कि अल नीनो और मजबूत होगा या नहीं, बल्कि यह है कि इसके कारण कितनी गर्मी और कितना नुकसान देखने को मिलेगा। आने वाले महीनों में मौसम में बदलाव, फसल उत्पादन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर इसका असर लगातार नजर में रहेगा।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध मौसम अनुमानों और विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित है। मौसम और बाजार से जुड़ी परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं।
