Electric Ports: Clean Energy से बदल रहे दुनिया के बड़े Port

स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ती दुनिया में अब बंदरगाह भी तेजी से बदलाव अपना रहे हैं। बिजली आधारित मशीनों और आधुनिक तकनीक के जरिए कई देशों के पोर्ट कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

बंदरगाहों पर तेजी से बढ़ रहा है स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल

दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम अब बंदरगाहों तक भी पहुंच चुके हैं। लंबे समय से जहाजों और बंदरगाहों का संचालन जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहा है, लेकिन अब कई देशों के पोर्ट अपने ज़मीनी संचालन को बिजली आधारित बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी, भले ही समुद्र में चलने वाले बड़े जहाजों को पूरी तरह स्वच्छ ईंधन पर आने में अभी समय लगे।

स्वच्छ बंदरगाहों की प्रमुख विशेषताएं

  • मुख्य उद्देश्य: कार्बन उत्सर्जन कम करना
  • नई तकनीक: बिजली और बैटरी आधारित मशीनें
  • फायदा: ईंधन की बचत और कम प्रदूषण
  • संचालन: ज़मीनी उपकरणों का तेजी से विद्युतीकरण
  • भविष्य: स्वच्छ और आधुनिक पोर्ट व्यवस्था

समुद्री माल ढुलाई को दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। इसी वजह से इसे उन उद्योगों में शामिल किया जाता है, जहां स्वच्छ ऊर्जा अपनाना आसान नहीं माना जाता। इसके बावजूद बंदरगाहों पर इस्तेमाल होने वाली मशीनों और उपकरणों में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है।

आज दुनिया के कई बड़े बंदरगाहों पर कंटेनर उठाने और उतारने वाली विशाल क्रेन अब बिजली से संचालित हो रही हैं। पहले इन मशीनों में डीजल इंजन का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब बैटरी और बिजली आधारित तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है। इसी तरह रबर के पहियों वाली मोबाइल क्रेन और अन्य माल ढुलाई उपकरण भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड तकनीक की ओर बढ़ रहे हैं।

बिजली आधारित मशीनों का बढ़ता उपयोग

विशेषज्ञों के अनुसार बंदरगाहों पर काम करने वाली मशीनें सीमित दूरी तक ही चलती हैं और उनका रास्ता पहले से तय होता है। इसलिए इन्हें बैटरी से चलाना अपेक्षाकृत आसान है। काम के बीच निर्धारित समय पर इन्हें चार्ज भी किया जा सकता है, जिससे संचालन पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।

कई बंदरगाह आर्थिक रूप से मजबूत हैं और उनके पास नई तकनीक में निवेश करने की क्षमता भी है। यही वजह है कि वे पुराने डीजल उपकरणों की जगह बिजली से चलने वाली मशीनें खरीद रहे हैं। इससे लंबे समय में ईंधन की लागत कम होती है और प्रदूषण भी घटता है। इसके अलावा शहरों के पास स्थित बंदरगाह स्थानीय लोगों के लिए स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर भी ध्यान दे रहे हैं।

बदलाव की प्रमुख पहल

  • भारत: जवाहरलाल नेहरू पोर्ट में इलेक्ट्रिक ट्रकों की योजना
  • अन्य देश: अमेरिका, चीन और सिंगापुर में बढ़ता उपयोग
  • जहाज: बंदरगाह पर सीधे बिजली आपूर्ति की सुविधा
  • टग बोट: इलेक्ट्रिक तकनीक का विस्तार
  • लाभ: कम खर्च, आसान रखरखाव और स्वच्छ वातावरण

भारत समेत कई देशों में बढ़ रही नई तकनीक

भारत में मुंबई के पास स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण भी इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। यहां ट्रकों के बड़े हिस्से को इलेक्ट्रिक बनाने की योजना पर काम चल रहा है। वहीं अमेरिका, चीन और सिंगापुर जैसे देशों के कई प्रमुख बंदरगाहों में भी बिजली आधारित उपकरणों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।

अब केवल बंदरगाहों की मशीनें ही नहीं, बल्कि किनारे पर खड़े जहाज भी बिजली का इस्तेमाल करने लगे हैं। पहले जहाज बंदरगाह पर खड़े रहने के दौरान अपने इंजन चलाकर बिजली तैयार करते थे, जिससे ईंधन की खपत और प्रदूषण बढ़ता था। अब कई देशों के पोर्ट ऐसी व्यवस्था दे रहे हैं, जहां जहाज सीधे बिजली आपूर्ति से जुड़कर अपनी जरूरत पूरी कर सकते हैं।

समुद्र में काम करने वाली छोटी टग बोट में भी बदलाव शुरू हो चुका है। इलेक्ट्रिक टग बोट कम खर्च में चलती हैं और उनका रखरखाव भी आसान माना जा रहा है। कई देशों ने इनका उपयोग शुरू कर दिया है और भविष्य में इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

समुद्री परिवहन का बदलता भविष्य

हालांकि बड़े मालवाहक जहाजों को पूरी तरह स्वच्छ ईंधन पर लाना अभी भी बड़ी चुनौती है। इसके लिए नई तकनीक, बेहतर बैटरी और वैकल्पिक ईंधन पर लगातार काम किया जा रहा है। लेकिन बंदरगाहों के ज़मीनी संचालन में हो रहा यह बदलाव दिखाता है कि समुद्री परिवहन क्षेत्र भी धीरे-धीरे स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले समय में लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन उद्योग में भी नई दिशा तय कर सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्ट और उपलब्ध विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित है। समय के साथ तकनीक और नीतियों में बदलाव संभव है।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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