अमेरिका में महंगाई से जुड़े नए आंकड़े आने के बाद सोने की कीमत में गिरावट देखने को मिली है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा इस महीने ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती उम्मीद ने सोने पर दबाव बढ़ाया है। इस कारण सोने की कीमत करीब 1.7 प्रतिशत तक नीचे चली गई। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड की कमाई भी बढ़ी।
सोने की कीमत पर ब्याज दर बढ़ने का दबाव
नए आंकड़ों में कीमतों में बढ़ोतरी बाजार के अनुमान के करीब रही, लेकिन इसके बावजूद कारोबारियों ने ब्याज दर बढ़ने की संभावना को पहले से ज्यादा माना है। अब बाजार में अगले सप्ताह होने वाली बैठक में दर बढ़ाने की करीब 70 प्रतिशत संभावना मानी जा रही है। इससे पहले यह अनुमान लगभग 60 प्रतिशत था।

पिछले कुछ सप्ताह से सोने की कीमत 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास ऊपर-नीचे हो रही है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला ले सकता है। इस सप्ताह आने वाले आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर उपभोक्ता महंगाई के आंकड़ों पर नजर बनी हुई है। आमतौर पर ब्याज दर बढ़ने से ऐसे सोने पर दबाव आता है, जिससे नियमित ब्याज नहीं मिलता।
सोने की कीमत में गिरावट की वजह
- गिरावट: सोने की कीमत करीब 1.7 प्रतिशत नीचे गई
- ब्याज दर: दर बढ़ने की उम्मीद करीब 70 प्रतिशत हुई
- डॉलर: अमेरिकी डॉलर सूचकांक में 0.3 प्रतिशत बढ़त
- बॉन्ड: बॉन्ड की कमाई में भी बढ़ोतरी हुई
- महंगाई: आने वाले आंकड़ों पर बाजार की नजर बनी हुई है
सितंबर में दर बढ़ने पर क्या होगा
UBS के रणनीतिकार जॉनी टेव्स के अनुसार, सितंबर में ब्याज दर बढ़ने पर सोने में अचानक गिरावट आ सकती है, लेकिन इससे इसकी बड़ी तेजी पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद नहीं है। वहीं अगर ब्याज दर नहीं बढ़ाई जाती है तो सोने की कीमत में ज्यादा तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद को मजबूत किया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। ब्रेंट कच्चा तेल 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। तेल की महंगाई बढ़ने से अमेरिका में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और इसी वजह से ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ी है।
इसके बावजूद कुछ जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में सोने की कीमत फिर मजबूत हो सकती है। इसकी एक वजह अमेरिकी डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश और सरकारी बॉन्ड बाजार में संभावित हस्तक्षेप को माना जा रहा है। अमेरिका के बढ़ते कर्ज और बजट घाटे को लेकर चिंता भी सोने को सहारा दे रही है।
आने वाले समय में सोने की संभावित दिशा
- अगस्त: सोने की कीमत में करीब 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई
- डॉलर: डॉलर की मजबूती को लेकर चिंता बनी हुई है
- कर्ज: अमेरिका के बढ़ते कर्ज और बजट घाटे पर चिंता
- अनुमान: सोना 4,300 से 4,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकता है
- रणनीति: कीमत गिरने पर खरीदारी और तेजी आने पर बिक्री की बात कही गई
सोने के साथ चांदी और दूसरी धातुओं में भी कमजोरी
अगस्त में सोने की कीमत में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसके पीछे यह धारणा भी रही कि अमेरिका की उधारी और कर्ज बढ़ने से लंबे समय में डॉलर की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में निवेशक अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए सोने की ओर रुख कर सकते हैं।
मुंबई स्थित बुलियन कारोबारी कंपनी की शोध प्रमुख रेनिशा चैनानी के अनुसार, अमेरिकी वित्तीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता सोने की मजबूती की एक बड़ी वजह है। उनका अनुमान है कि सोना फिलहाल 4,300 से 4,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकता है। ऐसे माहौल में कीमत गिरने पर खरीदारी और तेजी आने पर बिक्री की रणनीति अपनाई जा सकती है।
लंदन में कारोबार के दौरान हाजिर सोना 0.7 प्रतिशत गिरकर 4,367.92 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी की कीमत में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 64.53 डॉलर प्रति औंस रही। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी कमजोरी देखी गई। वहीं अमेरिकी डॉलर सूचकांक में 0.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
यह जानकारी बाजार के आंकड़ों पर आधारित है और निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना समझदारी होगी।
