विदेश में नौकरी, पढ़ाई या किसी दूसरे काम के दौरान खोला गया बैंक खाता भारत लौटने के बाद कई बार ध्यान से निकल जाता है। लेकिन भारत का निवासी बनने के बाद कुछ विदेशी संपत्तियों की जानकारी आयकर रिटर्न में देना जरूरी हो सकता है।
ऐसे मामलों के लिए सरकार ने पात्र लोगों को अपनी कुछ ऐसी विदेशी संपत्तियों की जानकारी देने का एक मौका दिया है, जिनका पहले खुलासा नहीं हो पाया था। इस योजना के तहत घोषणा करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 रखी गई है।
FAST-DS योजना में विदेशी संपत्तियों का खुलासा

FAST-DS योजना 16 अगस्त 2026 से लागू हुई है। इसके तहत कुछ ऐसी विदेशी संपत्तियों और विदेशी आय की जानकारी दी जा सकती है, जिनका पहले खुलासा नहीं किया गया था। इसके अलावा ऐसी विदेशी संपत्तियां भी कुछ परिस्थितियों में इस योजना के दायरे में आ सकती हैं, जिन्हें कानूनी तरीके से खरीदा गया था, लेकिन संबंधित रिटर्न में उनकी जानकारी नहीं दी गई।
यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो विदेश में रहने के बाद भारत वापस आए हैं और उनका पुराना बैंक खाता, निवेश या दूसरी संपत्ति विदेश में अभी भी मौजूद है। विदेश से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी कई मामलों में आयकर विभाग तक भी पहुंचती है, इसलिए पुराने खाते को केवल इसलिए नजरअंदाज करना सही नहीं है क्योंकि उसमें लंबे समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है।
पुराने विदेशी बैंक खाते की जानकारी देना क्यों जरूरी
अगर किसी व्यक्ति ने विदेश में रहते समय वेतन, छात्रवृत्ति या दूसरे वैध कारणों से बैंक खाता खोला था और भारत लौटने के बाद भी वह खाता बंद नहीं किया, तो उसकी जानकारी देने की जरूरत व्यक्ति की निवासी स्थिति, पैसे के स्रोत और संबंधित नियमों पर निर्भर कर सकती है। विदेशी संपत्तियों की जानकारी रिटर्न में Schedule FA के माध्यम से दी जाती है। खाते में ब्याज मिला है या नहीं अथवा उस खाते से उस साल कोई लेन-देन हुआ है या नहीं, इससे अकेले रिपोर्ट करने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
विदेशी संपत्ति की जानकारी नहीं देने पर कुछ मामलों में Black Money Act के तहत 10 लाख रुपये तक का दंड लगाया जा सकता है। हालांकि कानून में कुछ अपवाद और निर्धारित सीमाएं भी हैं। इसलिए कोई पुराना और निष्क्रिय विदेशी खाता छोटा या महत्वहीन समझकर छोड़ने के बजाय उसकी स्थिति की जांच करना बेहतर है।
📋 FAST-DS योजना की मुख्य बातें
- योजना लागू: 16 अगस्त 2026
- घोषणा की अंतिम तारीख: 31 दिसंबर 2026
- पहली स्थिति की सीमा: 1 करोड़ रुपये तक
- दूसरी स्थिति की सीमा: 5 करोड़ रुपये तक
- विदेशी संपत्ति की जानकारी: Schedule FA के माध्यम से
- महत्वपूर्ण आधार: निवासी स्थिति, आय का स्रोत और पहले दिए गए कर की स्थिति
FAST-DS में दो अलग-अलग स्थितियों का प्रावधान
FAST-DS के तहत सभी मामलों के लिए एक जैसा भुगतान नहीं है। इसमें मुख्य रूप से दो अलग-अलग स्थितियों को देखा जाता है। पहली स्थिति में ऐसी विदेशी संपत्ति या विदेशी आय शामिल हो सकती है, जिसका पहले खुलासा नहीं किया गया और जिस पर भारत में कर नहीं दिया गया। इस श्रेणी में योग्य संपत्ति और आय का कुल मूल्य 1 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। इस स्थिति में 30 प्रतिशत कर के साथ उतनी ही राशि का अतिरिक्त भुगतान करना होता है। यानी कुल भुगतान संबंधित राशि का 60 प्रतिशत हो सकता है।
दूसरी स्थिति उन लोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है जिन्होंने विदेश में रहते हुए वैध और पहले से कर चुकाई गई आय से संपत्ति बनाई थी। इसमें वह संपत्ति भी शामिल हो सकती है जिसे किसी व्यक्ति ने भारत का निवासी बनने से पहले गैर-निवासी रहते हुए खरीदा था, लेकिन बाद में भारत में निवासी बनने के बाद उसकी जानकारी रिटर्न में नहीं दी गई। इस श्रेणी में योग्य विदेशी संपत्तियों का कुल मूल्य 5 करोड़ रुपये तक हो सकता है और निर्धारित शुल्क 1 लाख रुपये है।
विदेशी खाते पर भुगतान तय करने से पहले ये बातें देखें
इसलिए किसी पुराने विदेशी बैंक खाते को देखकर सीधे यह मान लेना सही नहीं होगा कि उस पर 60 प्रतिशत भुगतान करना पड़ेगा। यह तय करने के लिए यह देखना जरूरी है कि पैसा कहां से आया था, संपत्ति खरीदते समय व्यक्ति की निवासी स्थिति क्या थी और उस आय पर पहले कर दिया गया था या नहीं।
🔎 विदेशी संपत्ति की जांच के जरूरी आधार
- पैसे का स्रोत: आय या बचत कहां से आई
- निवासी स्थिति: संपत्ति खरीदते समय व्यक्ति की स्थिति क्या थी
- कर भुगतान: संबंधित आय पर पहले कर दिया गया था या नहीं
- संपत्ति का मूल्य: संबंधित नियमों के तहत कुल मूल्य कितना है
- दस्तावेज: बैंक रिकॉर्ड और आय से जुड़े प्रमाण उपलब्ध हैं या नहीं
विदेश में कमाई और भारत में रिपोर्टिंग का अंतर
उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने विदेश में गैर-निवासी रहते हुए नौकरी से कमाई की और उस कमाई से बचत करके विदेशी बैंक खाते में पैसा रखा, तो उसका मामला उस व्यक्ति से अलग हो सकता है जिसने ऐसी विदेशी आय जमा की थी जिसकी भारत में पहले जानकारी नहीं दी गई थी। इसलिए दोनों मामलों को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता।
संपत्ति की कीमत तय करते समय केवल 31 मार्च 2026 को खाते में मौजूद रकम देखना पर्याप्त नहीं हो सकता। पुराने बैंक रिकॉर्ड, आय से जुड़े दस्तावेज और पैसे के स्रोत से संबंधित प्रमाण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन दस्तावेजों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि संपत्ति कब और किस स्रोत से बनाई गई थी।
घोषणा करने से पहले दस्तावेजों की जांच जरूरी
अगर कोई व्यक्ति योजना की सभी शर्तों को पूरा करता है, सही तरीके से घोषणा करता है और जरूरी भुगतान करता है, तो घोषित संपत्ति या आय के संबंध में आगे के कर, दंड और अभियोजन से राहत मिल सकती है। हालांकि यह राहत योजना में दी गई शर्तों के अनुसार ही लागू होगी।
जिस व्यक्ति के पास विदेश का कोई पुराना बैंक खाता, निवेश या दूसरी संपत्ति है और जिसकी जानकारी पहले रिटर्न में छूट गई थी, उसे 31 दिसंबर 2026 की समयसीमा को ध्यान में रखना चाहिए। सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि संपत्ति क्या है, उसका मूल्य कितना है, पैसा किस स्रोत से आया था और क्या उस पर पहले कर दिया जा चुका है। इसके बाद ही यह तय किया जाना चाहिए कि इस योजना का लाभ लिया जा सकता है या नहीं।
Disclaimer: यह जानकारी केवल समाचार उद्देश्य के लिए है। कर संबंधी निर्णय से पहले योग्य कर विशेषज्ञ से सलाह लें।
