विदेश में संपत्ति या आय रखने वाले कुछ पात्र करदाताओं के लिए Foreign Assets of Small Taxpayers Disclosure Scheme (FAST-DS) 2026 के तहत पुरानी घोषित न की गई विदेशी संपत्तियों और आय की जानकारी देने का मौका दिया गया है।
यह एक बार की स्वैच्छिक योजना है, जो 16 अगस्त से शुरू हुई है और इसके तहत घोषणा करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 तय की गई है। इस योजना में सबसे जरूरी बात विदेशी संपत्तियों का सही बाजार मूल्य तय करना है, क्योंकि अलग-अलग तरह की संपत्तियों के लिए मूल्य तय करने के नियम अलग हैं।
विदेशी संपत्ति का सही बाजार मूल्य कैसे तय होगा

विदेशी संपत्ति का मूल्य तय करते समय सामान्य तौर पर दो आंकड़ों को देखा जाता है। पहला वह मूल्य है जिस पर संपत्ति खरीदी गई थी और दूसरा 31 मार्च 2026 को बाजार में उस संपत्ति की संभावित बिक्री कीमत है। बाद वाले मूल्य के लिए उस देश के मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट जरूरी हो सकती है। इन दोनों में जो राशि अधिक होती है, उसे उचित बाजार मूल्य माना जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने आभूषण 20 लाख रुपये में खरीदे थे और 31 मार्च 2026 को उनकी कीमत 28 लाख रुपये थी, तो घोषणा के लिए 28 लाख रुपये का मूल्य लिया जाएगा। यदि निर्धारित तरीके से मूल्यांकन नहीं कराया गया है, तो अधिग्रहण लागत के सूचकांकित मूल्य को उचित बाजार मूल्य माना जा सकता है।
इस योजना के दायरे में विदेशी बैंक खाते, शेयर, विदेश में मौजूद मकान या जमीन, सोना, आभूषण, कीमती पत्थर, पेंटिंग, कलाकृतियां और विदेशी साझेदारी, एओपी या एलएलपी में हिस्सेदारी जैसी संपत्तियां शामिल हैं। विदेशी शेयरों का मूल्य तय करने का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि वे शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं या नहीं।
सूचीबद्ध शेयरों के मामले में 31 मार्च 2026 को दर्ज सबसे ऊंची और सबसे कम कीमत का औसत निकाला जाता है। इसके बाद इस राशि की तुलना खरीद मूल्य से की जाती है और अधिक राशि को रिपोर्ट करने के लिए लिया जाता है। अगर उस दिन शेयर में कारोबार नहीं हुआ था, तो उससे पहले जिस नजदीकी दिन कारोबार हुआ था, उस दिन की सबसे ऊंची और सबसे कम कीमत देखी जाती है।
विदेशी शेयरों का मूल्यांकन कैसे होगा
जिन विदेशी कंपनियों के शेयर सूचीबद्ध नहीं हैं, उनके लिए बाजार में सीधे उपलब्ध कीमत नहीं होती। ऐसे मामलों में निर्धारित गणना के आधार पर कंपनी की संपत्तियों और देनदारियों का मूल्य निकाला जाता है। इसमें कंपनी के पास मौजूद जमीन, मकान, आभूषण, शेयर और अन्य प्रतिभूतियों जैसी चीजों को भी ध्यान में रखा जाता है। इसके बाद प्राप्त मूल्य की तुलना शेयर की खरीद लागत से की जाती है और अधिक राशि को रिपोर्टिंग के लिए माना जाता है।
🌍 विदेशी संपत्तियों के मूल्यांकन की मुख्य बातें
- आधार: खरीद मूल्य और 31 मार्च 2026 का संभावित बाजार मूल्य
- संपत्तियां: बैंक खाते, शेयर, जमीन, मकान, सोना और आभूषण
- सूचीबद्ध शेयर: संबंधित तारीख की ऊंची और कम कीमत का औसत
- गैर-सूचीबद्ध शेयर: संपत्ति और देनदारियों के आधार पर निर्धारित मूल्य
- रिपोर्ट: जरूरत पड़ने पर मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट
विदेशी बैंक खाते के लिए अलग नियम
विदेशी बैंक खाते के मामले में नियम अलग हैं। केवल 31 मार्च 2026 को खाते में मौजूद रकम को आधार नहीं माना जाता। खाते के खुलने से लेकर 31 मार्च 2026 तक किए गए पात्र जमा को जोड़ा जाता है। हालांकि, एक ही रकम को दो बार नहीं गिना जा सकता। यदि खाते से रकम निकालने के बाद वही पैसा दोबारा खाते में जमा किया गया है, तो दोबारा की गई जमा को नई रकम नहीं माना जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर पहले निकाली गई रकम बाद में वापस खाते में जमा की गई, तो उस जमा के उस हिस्से को कुल पात्र जमा में दोबारा नहीं जोड़ा जाएगा।
विदेशी साझेदारी, एओपी या एलएलपी में हिस्सेदारी का मूल्य निकालने के लिए पहले 31 मार्च की स्थिति के अनुसार संस्था की कुल शुद्ध संपत्ति का मूल्य निकाला जाता है। इसके बाद साझेदारों की पूंजी हिस्सेदारी के आधार पर राशि बांटी जाती है। बची हुई राशि को समझौते या लाभ-वितरण अनुपात के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
एक ही रकम की दो बार गिनती से बचना जरूरी
एक संपत्ति से दूसरी संपत्ति में पैसा जाने की स्थिति में भी दोहरी गिनती से बचना जरूरी है। मसलन, अगर किसी व्यक्ति ने विदेश में मौजूद संपत्ति बेचकर मिली रकम को अपने विदेशी बैंक खाते में जमा किया है, तो उस बिक्री से मिली रकम को अलग संपत्ति या नई जमा के रूप में दोबारा नहीं गिना जाना चाहिए।
📋 घोषणा से पहले जरूरी बातें
- अंतिम तारीख: 31 दिसंबर 2026
- दस्तावेज: विदेशी संपत्ति और आय से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखें
- मूल्यांकन: निर्धारित नियमों के अनुसार सही मूल्य तय करें
- मुद्रा परिवर्तन: लागू RBI संदर्भ दर का इस्तेमाल करें
- दोहरी गिनती: एक ही रकम या संपत्ति को दोबारा शामिल न करें
- सलाह: जरूरत होने पर योग्य कर विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लें
विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपये में बदलने का नियम
विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपये में बदलने के लिए भी निर्धारित नियम लागू होते हैं। आरबीआई की सूची में शामिल मुद्राओं के लिए 31 मार्च 2026 की संबंधित आरबीआई संदर्भ दर का इस्तेमाल किया जाएगा। अन्य मुद्राओं के मामले में पहले उस रकम को संबंधित देश के केंद्रीय बैंक या नियामक बैंक की दर के आधार पर अमेरिकी डॉलर में बदला जाएगा। इसके बाद आरबीआई की संबंधित संदर्भ दर का उपयोग करके इसे भारतीय रुपये में बदला जाएगा।
योजना के तहत विदेशी संपत्तियों की जानकारी देते समय सही मूल्यांकन और दस्तावेज रखना महत्वपूर्ण है। करदाताओं को घोषणा करने से पहले योजना के आधिकारिक नियमों को ध्यान से देखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर योग्य कर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और इसे व्यक्तिगत कर सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य शैक्षिक उद्देश्य के लिए है और व्यक्तिगत कर सलाह नहीं है।
