FCNR योजना में निजी बैंक जमा आंकड़े छिपा रहे, सरकारी बैंकों ने किया खुलासा

भारतीय रिजर्व बैंक की FCNR योजना का उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा बढ़ाना है। योजना लागू होने के बाद सरकारी और निजी बैंकों की रणनीति अलग-अलग नजर आ रही है, जबकि आने वाले महीनों में निवेश की रफ्तार तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विदेशी मुद्रा में जमा बढ़ाने के लिए शुरू की गई FCNR योजना को लागू हुए करीब 45 दिन हो चुके हैं। इसके बावजूद देश के बड़े निजी बैंक अब तक यह बताने से बच रहे हैं कि इस योजना के तहत उन्होंने कितनी राशि जुटाई है। दूसरी ओर कई सरकारी बैंक अपने जुटाए गए धन और तय किए गए लक्ष्य दोनों की जानकारी सार्वजनिक कर चुके हैं।

FCNR योजना में निजी और सरकारी बैंकों की अलग रणनीति

बाजार से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि अब तक इस योजना के माध्यम से 12 से 15 अरब डॉलर के बीच राशि आई है। वहीं योजना की अवधि पूरी होने तक कुल निवेश 40 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यह योजना 30 सितंबर तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीयों से अधिक निवेश आकर्षित करना है।

एचडीएफसी बैंक के प्रबंधन का कहना है कि हाल के दिनों में बैंक को अच्छी मात्रा में जमा राशि मिली है, लेकिन फिलहाल वह इसके सटीक आंकड़े साझा नहीं करेगा। बैंक का कहना है कि योजना समाप्त होने के बाद पूरी जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है। बैंक सीधे जमा, अपनी ओर से दी जाने वाली वित्तीय सुविधा और विदेशी साझेदार बैंकों के सहयोग से इस योजना पर काम कर रहा है।

FCNR योजना की प्रमुख बातें

  • योजना: FCNR विदेशी मुद्रा जमा योजना
  • अनुमानित निवेश: 12 से 15 अरब डॉलर
  • संभावित लक्ष्य: 40 अरब डॉलर
  • अंतिम तिथि: 30 सितंबर
  • उद्देश्य: एनआरआई से विदेशी मुद्रा निवेश बढ़ाना

निजी बैंकों ने आंकड़े साझा करने से बनाई दूरी

आईसीआईसीआई बैंक का भी कहना है कि योजना में वास्तविक तेजी तब आई जब रिजर्व बैंक ने सभी जरूरी दिशा-निर्देश स्पष्ट कर दिए। बैंक के अनुसार दूसरी तिमाही में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं एक्सिस बैंक ने भी माना कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की ओर से अच्छी रुचि दिखाई जा रही है, लेकिन उसने भी अब तक कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।

कुछ दिन पहले खबर सामने आई थी कि एक विदेशी बैंक अपने ग्राहकों को इस योजना के तहत कई गुना तक अतिरिक्त वित्तीय सुविधा उपलब्ध करा रहा है। एक्सिस बैंक का कहना है कि वह इस योजना के जरिए अपने कारोबार का विस्तार करना चाहता है और अतिरिक्त धन मिलने के बाद आगे की रणनीति तय करेगा।

इसके उलट सरकारी बैंकों ने अपने लक्ष्य और अब तक जुटाई गई राशि दोनों का खुलासा किया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने सितंबर तक 1.5 से 2 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा है और अब तक 10 करोड़ डॉलर से अधिक जमा कर चुका है। पंजाब नेशनल बैंक ने 41.9 करोड़ डॉलर से अधिक की राशि जुटाने की जानकारी दी है और कुल 2.5 अरब डॉलर का लक्ष्य तय किया है। इसके अलावा बैंक विदेशी बाजार से अतिरिक्त धन जुटाने की भी तैयारी कर रहा है।

सरकारी बैंकों की अब तक की प्रगति

  • यूनियन बैंक: 10 करोड़ डॉलर से अधिक जमा
  • पंजाब नेशनल बैंक: 41.9 करोड़ डॉलर से अधिक जुटाए
  • इंडियन बैंक: लगभग 15 करोड़ डॉलर जमा
  • अन्य बैंक: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने भी लक्ष्य तय किए
  • फोकस: विदेशी मुद्रा जमा में बढ़ोतरी

आगे निवेश बढ़ने की उम्मीद

इंडियन बैंक ने लगभग 15 करोड़ डॉलर जुटाने की जानकारी दी है और योजना पूरी होने तक 1.5 से 2 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद जताई है। वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने भी अपने लक्ष्य तय किए हैं और आने वाले महीनों में जमा बढ़ने की संभावना व्यक्त की है।

मध्यम आकार के निजी बैंकों में फेडरल बैंक और यस बैंक ने बताया है कि उन्हें इस योजना के तहत निवेश मिलना शुरू हो गया है, लेकिन उन्होंने वास्तविक आंकड़े साझा नहीं किए। आरबीएल बैंक ऐसा निजी बैंक है जिसने अब तक करीब 15 करोड़ डॉलर जुटाने की जानकारी दी है, हालांकि उसने कुल लक्ष्य का खुलासा नहीं किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में इस योजना की रफ्तार उम्मीद से धीमी रही। इसकी वजह विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच कर संबंधी सवाल, कुछ नियमों को लेकर असमंजस और बाद में जारी किए गए दिशा-निर्देश रहे। इसके बाद सरकार और रिजर्व बैंक ने बैंकों के साथ बैठक कर योजना को अधिक प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में इस योजना के तहत निवेश की गति बढ़ सकती है, लेकिन वर्ष 2013 जैसी रिकॉर्ड आमद की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है। फिर भी यदि बैंकों की जागरूकता मुहिम तेज होती है और विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भागीदारी बढ़ती है, तो योजना से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह मजबूत हो सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। निवेश या बैंकिंग संबंधी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि अवश्य करें।

Gourav Kumar Singh

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