अगर आपकी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी की अवधि पूरी हो चुकी है और आपने अभी तक पैसे नहीं निकाले हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक में रखा पैसा खत्म हो गया। हालांकि, मैच्योरिटी के बाद उस रकम पर पहले वाली एफडी दर से ब्याज मिलना जरूरी नहीं है। ऐसे मामले में बैंक के पास जमा रकम बनी रहती है, लेकिन उस पर मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है।
मैच्योरिटी के बाद एफडी पर कितना ब्याज मिलता है?
भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा नियमों के अनुसार, मैच्योर होने के बाद भुगतान नहीं की गई घरेलू टर्म डिपॉजिट पर आम तौर पर बचत खाते की लागू ब्याज दर या उस एफडी पर तय दर, इनमें से जो कम हो, उसके आधार पर ब्याज दिया जाता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति ने लंबे समय के लिए एफडी कर रखी है और मैच्योरिटी के बाद उसे भूल गया है, तो उसे मिलने वाला अतिरिक्त ब्याज उसकी उम्मीद से कम हो सकता है।
एफडी खोलते समय ग्राहक को यह भी देखना चाहिए कि मैच्योरिटी के बाद रकम के लिए कौन सा निर्देश दिया गया था। बैंक और एफडी के नियमों के अनुसार मैच्योरिटी की रकम ग्राहक के जुड़े हुए खाते में भेजी जा सकती है या ग्राहक के निर्देश के आधार पर एफडी को दोबारा शुरू किया जा सकता है। इसलिए मैच्योरिटी की तारीख के बाद खाते की स्थिति जांचना जरूरी है।
मैच्योरिटी के बाद 7% ब्याज हमेशा नहीं मिलेगा
अगर 5 लाख रुपये की एफडी 7 प्रतिशत ब्याज पर कराई गई थी, तो मैच्योरिटी के बाद उसी 7 प्रतिशत दर से ब्याज मिलता रहेगा, ऐसा जरूरी नहीं है। लागू नियमों और बैंक की प्रक्रिया के अनुसार मैच्योरिटी के बाद ब्याज की दर कम हो सकती है।
5 लाख रुपये की एफडी का उदाहरण समझें
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 5 लाख रुपये की एफडी 7 प्रतिशत ब्याज पर कराई थी और उसकी अवधि पूरी होने के बाद रकम बैंक के पास ही रह गई। अगर उस समय बचत खाते की ब्याज दर 3 प्रतिशत है, तो केवल इसलिए उस रकम पर 7 प्रतिशत ब्याज मिलता रहेगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा। लागू नियमों के अनुसार मैच्योरिटी के बाद मिलने वाला ब्याज कम हो सकता है।
एफडी के दोबारा शुरू होने के मामले में भी पुरानी ब्याज दर को हमेशा लागू मानना सही नहीं है। नई अवधि के लिए एफडी बनने पर आम तौर पर उस समय बैंक की लागू जमा दर के अनुसार ब्याज तय होता है। इसलिए कई साल पहले मिली एफडी दर को अगली अवधि के लिए भी पक्का मानने से निवेशक को नुकसान हो सकता है।
मैच्योरिटी के बाद बैंक से क्या जांचें?
अगर आपने मैच्योरिटी के समय किसी खास निर्देश का विकल्प चुना था, तो यह भी जांच लें कि बैंक ने उसी के अनुसार रकम का इस्तेमाल किया या नहीं। एफडी की अवधि पूरी हो चुकी है तो बैंक से मौजूदा रकम, मैच्योरिटी के बाद मिले ब्याज और आगे पैसे निकालने या दोबारा जमा करने के विकल्पों की जानकारी ली जा सकती है।
लंबे समय तक एफडी भूलने पर क्या होता है?
अगर कोई एफडी लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के पड़ी रहती है, तो वह आगे चलकर लावारिस जमा की श्रेणी में आ सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक का पैसा खत्म हो जाता है। पात्र ग्राहक या कानूनी वारिस बैंक की प्रक्रिया के अनुसार रकम का दावा कर सकते हैं।
10 साल तक दावा न करने पर क्या होता है?
अगर कोई एफडी लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के पड़ी रहती है, तो वह आगे चलकर लावारिस जमा की श्रेणी में आ सकती है। रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार किसी जमा खाते में रकम 10 साल या उससे अधिक समय तक बिना दावे के रहने पर उसे डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में भेजा जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक का पैसा खत्म हो जाता है।
ऐसी रकम को वापस पाने के लिए बैंक में दावा किया जा सकता है। बैंकों को अपनी वेबसाइट पर लावारिस जमा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने और ग्राहकों या उनके कानूनी वारिसों का पता लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने होते हैं। अगर मूल खाताधारक की मृत्यु हो चुकी है, तो नामित व्यक्ति, कानूनी वारिस या अन्य पात्र व्यक्ति को बैंक की प्रक्रिया के अनुसार जरूरी दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।
एफडी की मैच्योरिटी पर क्या करना चाहिए?
इसलिए हर एफडी की मैच्योरिटी तारीख, जमा रकम, बैंक का नाम और मैच्योरिटी के बाद दिए गए निर्देशों का रिकॉर्ड रखना उपयोगी है। समय-समय पर जांच करने से यह पता चल सकता है कि रकम बचत खाते में पहुंची है, नई एफडी में लगाई गई है या मैच्योरिटी के बाद कम दर से ब्याज कमा रही है। एफडी की अवधि पूरी होना निवेश का अंतिम चरण नहीं है, बल्कि इसी समय यह तय करना जरूरी होता है कि आगे उस रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाना है।
5 FAQs
1. क्या एफडी मैच्योर होने के बाद पैसा खत्म हो जाता है?
नहीं। एफडी की मैच्योरिटी के बाद पैसा खत्म नहीं होता। अगर रकम का भुगतान नहीं हुआ है, तो वह बैंक के पास बनी रह सकती है। हालांकि, मैच्योरिटी के बाद उस पर पहले वाली एफडी दर से ब्याज मिलना जरूरी नहीं है।
2. मैच्योरिटी के बाद एफडी पर कितना ब्याज मिलता है?
आरबीआई के मौजूदा नियमों के अनुसार, मैच्योर होने के बाद भुगतान नहीं की गई घरेलू टर्म डिपॉजिट पर आम तौर पर बचत खाते की लागू दर या एफडी पर तय दर, इनमें से जो कम हो, उसके आधार पर ब्याज दिया जाता है।
3. क्या एफडी मैच्योर होने के बाद अपने आप दोबारा शुरू हो जाती है?
यह बैंक की शर्तों और ग्राहक द्वारा दिए गए मैच्योरिटी निर्देश पर निर्भर करता है। रकम ग्राहक के जुड़े खाते में भेजी जा सकती है या निर्देश के अनुसार एफडी को दोबारा शुरू किया जा सकता है।
4. 10 साल तक एफडी पर दावा न करने पर क्या होता है?
आरबीआई के नियमों के अनुसार 10 साल या उससे अधिक समय तक बिना दावे वाली कुछ जमा रकम डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में भेजी जा सकती है। हालांकि, पात्र ग्राहक या कानूनी वारिस बैंक के माध्यम से रकम का दावा कर सकते हैं।
5. एफडी मैच्योर होने पर ग्राहक को क्या करना चाहिए?
ग्राहक को मैच्योरिटी की तारीख, रकम, बैंक की प्रक्रिया और पहले दिए गए निर्देश की जांच करनी चाहिए। इसके बाद बैंक से यह पता करना चाहिए कि रकम बचत खाते में गई है, नई एफडी में लगी है या मैच्योरिटी के बाद किसी अन्य दर से ब्याज कमा रही है।
Conclusion
एफडी की मैच्योरिटी के बाद पैसा खत्म नहीं होता, लेकिन उस रकम पर पुरानी एफडी ब्याज दर हमेशा लागू रहे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए मैच्योरिटी की तारीख के बाद बैंक खाते और एफडी की स्थिति की जांच करना जरूरी है। लंबे समय तक बिना दावे वाली रकम के मामले में भी ग्राहक या पात्र कानूनी वारिस बैंक की प्रक्रिया के जरिए दावा कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। बैंक की एफडी की शर्तें और लागू नियम समय के साथ बदल सकते हैं। किसी विशेष मामले में अपने बैंक से मौजूदा नियम और अपनी एफडी की स्थिति की पुष्टि करें।

