Food Inflation: सितंबर में महंगी हुई शाकाहारी थाली

सितंबर 2026 में घर पर खाना बनाना पहले के मुकाबले महंगा हो गया है। प्याज, खाने के तेल और रसोई गैस के दाम बढ़ने से परिवारों के भोजन पर होने वाला खर्च बढ़ा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस के अनुसार, एक शाकाहारी थाली की कीमत पिछले साल के मुकाबले 10 प्रतिशत बढ़कर 30.8 रुपये हो गई, जो एक साल पहले 28.1 रुपये थी। वहीं मांसाहारी थाली की कीमत 6 प्रतिशत बढ़कर 59.5 रुपये पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसकी कीमत 56 रुपये थी।

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सितंबर में शाकाहारी थाली सबसे ज्यादा महंगी

Food Inflation के कारण सितंबर में महंगी हुई शाकाहारी थाली
Food Inflation: प्याज, तेल और गैस महंगे होने से बढ़ा रसोई खर्च

 

मासिक आधार पर भी सितंबर में शाकाहारी थाली की कीमत में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। दूसरी ओर मांसाहारी थाली 3 प्रतिशत महंगी हुई। खाने की लागत बढ़ने में प्याज की कीमतों का बड़ा योगदान रहा। सितंबर में प्याज का भाव सालाना आधार पर 89 प्रतिशत बढ़कर 53 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह करीब 28 रुपये था।

📊 थाली की कीमत में कितना बदलाव?

  • शाकाहारी थाली: सालाना आधार पर 10 प्रतिशत महंगी होकर 30.8 रुपये हुई
  • मांसाहारी थाली: सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर 59.5 रुपये हुई
  • प्याज: सितंबर में सालाना आधार पर कीमत 89 प्रतिशत बढ़ी

प्याज की कीमतों ने बढ़ाया रसोई का खर्च

प्याज के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह पुराने भंडार में कमी और उत्पादन में अनुमानित 5 से 6 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है। जून में सामान्य औसत के मुकाबले बारिश करीब 40 प्रतिशत कम रही थी। इससे खरीफ फसल की बुवाई और नई फसल की आवक में देरी हुई। त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने से अक्टूबर के शुरुआती दिनों में प्याज की कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।

नई फसल आने तक प्याज महंगा रहने की आशंका

सितंबर में महीने-दर-महीने प्याज के दाम में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पुराने भंडार कम होने और नई खरीफ फसल की आवक में देरी के कारण कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि अक्टूबर के आखिरी हिस्से में नई फसल की आवक बढ़ने पर प्याज के दाम में धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है।

चावल और खाने के तेल ने भी बढ़ाई महंगाई

चावल की कीमतों में भी सितंबर के दौरान सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। उत्पादन में 5 से 6 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है। कम खेती और पैदावार कमजोर रहने के कारण चावल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। घरेलू खपत के साथ निर्यात की मांग भी कीमतों को ऊंचा बनाए रखने में भूमिका निभा सकती है।

🛒 रसोई के खर्च पर इन चीजों का असर

  • चावल: सितंबर में सालाना आधार पर कीमत 8 प्रतिशत बढ़ी
  • खाने का तेल: पिछले साल की तुलना में कीमत 12 प्रतिशत बढ़ी
  • रसोई गैस: पिछले साल की तुलना में करीब 10 प्रतिशत महंगी रही
  • आगे का जोखिम: टमाटर, आलू और दालों के दाम बढ़ने की आशंका

खाने के तेल और रसोई गैस की कीमत भी बढ़ी

खाने के तेल की कीमत भी सितंबर में पिछले साल की तुलना में 12 प्रतिशत बढ़ी। कच्चे पाम तेल पर सीमा शुल्क कम किए जाने के बावजूद बाजार में दाम ऊंचे रहे। वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी परेशानियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण भी तेल की कीमतों पर असर पड़ा। रसोई गैस की कीमत भी पिछले साल की तुलना में करीब 10 प्रतिशत अधिक रही।

टमाटर, आलू और दालों पर भी नजर

आने वाले हफ्तों में टमाटर, आलू और दालों के दाम भी बढ़ सकते हैं। टमाटर की नई फसल आने में देरी और मौसमी मांग के कारण कीमत बढ़ने की आशंका है। आलू के मामले में महंगे भंडारण वाले पुराने माल की बिक्री से भाव पर दबाव पड़ सकता है। मौसम से जुड़ी समस्याओं के कारण अरहर जैसी दालों की कीमतों पर भी नजर बनी रहेगी।

मांसाहारी थाली की कीमत कम क्यों बढ़ी?

मांसाहारी थाली की कीमत में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी हुई, क्योंकि मुर्गे के मांस की कीमत में सितंबर के दौरान सालाना आधार पर करीब 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस थाली की कुल लागत में इसका हिस्सा काफी अधिक होता है। चूजों की कम उपलब्धता, बारिश के कारण आपूर्ति में आई परेशानी और मक्का महंगा होने से मुर्गे की आपूर्ति प्रभावित हुई।

आने वाले समय में क्या मिल सकती है राहत?

आने वाले समय में नई फसल की आवक से कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि सीमित भंडार, मौसम से जुड़ी चिंता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों के कारण घर में खाना बनाने का खर्च निकट भविष्य में ऊंचा रहने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल 1: सितंबर 2026 में शाकाहारी थाली कितनी महंगी हुई?

सितंबर 2026 में शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 30.8 रुपये हो गई।

सवाल 2: सितंबर में प्याज कितना महंगा हुआ?

सितंबर में प्याज का भाव सालाना आधार पर 89 प्रतिशत बढ़कर 53 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया।

सवाल 3: खाने के तेल की कीमत कितनी बढ़ी?

खाने के तेल की कीमत सितंबर में पिछले साल की तुलना में 12 प्रतिशत बढ़ी।

सवाल 4: मांसाहारी थाली की कीमत कितनी बढ़ी?

मांसाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर 59.5 रुपये हो गई।

सवाल 5: क्या आने वाले समय में खाने की लागत कम हो सकती है?

नई फसल की आवक बढ़ने पर कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में राहत मिल सकती है, लेकिन कई कारणों से रसोई का खर्च ऊंचा रह सकता है।

अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना है; निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों की जांच करें और विशेषज्ञ सलाह जरूर लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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