वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि अगली पीढ़ी के वस्तु एवं सेवा कर सुधारों के तहत कर दरों और प्रक्रियाओं से जुड़े करीब 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान कर लिया गया है। इन नए बदलावों का मुख्य उद्देश्य कर से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाना और कर व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करना है।
जीएसटी सुधारों में 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान

वस्तु एवं सेवा कर परिषद की 57वीं बैठक के बाद सीतारमण ने कहा कि इन सुधारों को भरोसे पर आधारित सोच के साथ आगे बढ़ाया गया है। उनका कहना है कि नई प्रक्रियाओं में किए गए बदलावों को अगले एक साल के दौरान स्थिर रूप लेने की उम्मीद है।
📊 जीएसटी सुधारों की बड़ी बातें
- 99 प्रतिशत मुद्दे: कर दरों और प्रक्रियाओं से जुड़े करीब 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान
- गिरफ्तारी की शक्ति: जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने की सिफारिश
- अभियोजन सीमा: सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव
- जुर्माना: सामान्य जुर्माने की राशि 25 हजार से घटाकर 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव
जीएसटी के तहत गिरफ्तारी और जुर्माने में बदलाव
परिषद ने वस्तु एवं सेवा कर के तहत गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने और अभियोजन की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की सिफारिश की है। इसके अलावा सामान्य जुर्माने की राशि को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
सामान की आवाजाही में जांच के नियम होंगे आसान
सीतारमण ने कहा कि सामान की आवाजाही को आसान बनाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। इसके तहत जांच, सामान रोकने और जब्ती की कार्रवाई को आपूर्तिकर्ता या सामान पहुंचने वाले राज्य के संबंधित अधिकारियों तक सीमित करने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि रास्ते में बिना किसी वजह के वाहनों को रोककर जांच नहीं की जाएगी। किसी वाहन या सामान को तभी रोका जा सकेगा, जब उसके संबंध में कोई विशेष सूचना उपलब्ध हो और कम से कम संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी से इसकी अनुमति मिली हो। सीतारमण ने साफ किया कि कोई भी सामान्य अधिकारी अपनी इच्छा से वाहन को नहीं रोक सकेगा। इससे कर विभाग की ओर से होने वाली मनमानी जांच कम होने और सामान की आवाजाही बेहतर होने की उम्मीद है।
कर नोटिस और छोटे कारोबारियों के लिए राहत
परिषद ने यह भी तय किया है कि अगर कर की मांग 10 हजार रुपये से कम है, तो उससे जुड़ी मांग का नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। कर नोटिस और उससे जुड़ी कार्रवाई के लिए एक जैसी प्रक्रिया बनाने की भी सिफारिश की गई है। इसमें संबंधित करदाता को औपचारिक नोटिस जारी होने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर देने की व्यवस्था शामिल है।
🏪 छोटे कारोबारियों के लिए अहम बदलाव
- आसान पंजीकरण: छोटे कारोबारियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी
- दूसरे राज्यों में कारोबार: व्यापारिक मंचों से बेचने वाले छोटे विक्रेताओं को राहत मिल सकती है
- करदाता की सुनवाई: औपचारिक नोटिस से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा
- कम राशि की मांग: 10 हजार रुपये से कम कर मांग पर नोटिस जारी नहीं होगा
दूसरे राज्यों में कारोबार करना हो सकता है आसान
छोटे कारोबारियों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की तैयारी है। जो छोटे विक्रेता व्यापारिक मंचों के माध्यम से सामान बेचते हैं, उन्हें अलग-अलग राज्यों में कारोबार करने के लिए हर राज्य में अलग स्थान स्थापित करने की जरूरत नहीं होगी। इससे छोटे कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों में कारोबार करना आसान हो सकता है।
कर जमा से जुड़ी समस्या की जांच करेगी समिति
कर जमा से जुड़ी छूट के मामले में भी परिषद ने चर्चा की है। कई बार आपूर्ति श्रृंखला में किसी दूसरे पक्ष की गलती के कारण सही तरीके से कर चुकाने वाले कारोबारियों को भी जमा कर की छूट नहीं मिल पाती है। इस समस्या की जांच के लिए अधिकारियों की एक समिति बनाई जाएगी। समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके बाद परिषद अंतिम फैसला लेगी।
बीमा और कर वापसी की प्रक्रिया में बदलाव
इसके अलावा कर्मचारियों के बीमा पर दिए गए वस्तु एवं सेवा कर के संबंध में नियोक्ताओं को कर छूट का लाभ देने की बात भी शामिल है। वहीं, कर वापसी के दावों की स्वीकृति की शुरुआती प्रक्रिया का समय 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है।
बिना आमने-सामने संपर्क वाली कर प्रशासन प्रणाली पर जोर
सीतारमण ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था में बिना आमने-सामने संपर्क वाली कर प्रशासन प्रणाली लागू करने की दिशा में काम कर रही है। 57वीं परिषद बैठक में कर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन प्रक्रियागत सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और इनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया एक अप्रैल 2027 से शुरू होने वाली व्यवस्था का हिस्सा होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: जीएसटी सुधारों में कितने मुद्दों का समाधान किया गया है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, कर दरों और प्रक्रियाओं से जुड़े करीब 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान कर लिया गया है।
सवाल 2: जीएसटी के तहत अभियोजन की सीमा कितनी की जाएगी?
अभियोजन की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की सिफारिश की गई है।
सवाल 3: सामान्य जीएसटी जुर्माने में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
सामान्य जुर्माने की राशि को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
सवाल 4: क्या 10 हजार रुपये से कम कर मांग पर नोटिस जारी होगा?
परिषद ने तय किया है कि 10 हजार रुपये से कम कर मांग से जुड़ा मांग का नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
सवाल 5: जीएसटी प्रक्रियागत सुधार कब से लागू होंगे?
इन प्रक्रियागत सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और क्रियान्वयन की प्रक्रिया एक अप्रैल 2027 से शुरू होने वाली व्यवस्था का हिस्सा होगी।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना है; निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों की जांच करें और विशेषज्ञ सलाह जरूर लें।