भारत में कई सॉफ्टवेयर इंजीनियर अब ऐसे करियर की ओर बढ़ना चाहते हैं, जिसमें तकनीक के साथ ग्राहकों की असली समस्याओं को समझकर उनका समाधान तैयार करना भी शामिल हो। Scaler की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 58 प्रतिशत इंजीनियर Forward-Deployed Engineer (FDE) की भूमिका में जाना चाहते हैं, लेकिन लगभग 90 प्रतिशत को इस काम के लिए कौशल बढ़ाने का स्पष्ट रास्ता नहीं पता है।
FDE Jobs की मांग क्यों बढ़ रही है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की करीब 88 प्रतिशत कंपनियों को उम्मीद है कि 2030 तक Forward-Deployed Engineers की मांग बढ़ेगी। वहीं, लगभग 80 प्रतिशत बहुराष्ट्रीय कंपनियां अगले 12 महीनों में ऐसे कर्मचारियों को भर्ती करने की योजना बना रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों को ऐसे इंजीनियर चाहिए जो तकनीक को सीधे कारोबारी जरूरतों से जोड़ सकें।
Forward-Deployed Engineer यानी FDE ऐसा तकनीकी पेशेवर होता है जो ग्राहक के साथ मिलकर उसकी समस्या समझता है और सॉफ्टवेयर या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से उपयोगी समाधान तैयार करता है। इस भूमिका में केवल कोड लिखना ही नहीं, बल्कि बातचीत करना, जरूरत पहचानना और समाधान को वास्तविक काम में लागू करना भी अहम होता है।
📌 FDE Career की मुख्य बातें
- इंजीनियरों की रुचि: करीब 58 प्रतिशत FDE भूमिका अपनाना चाहते हैं
- सीखने में चुनौती: लगभग 90 प्रतिशत को स्पष्ट upskilling path की जानकारी नहीं
- कंपनियों की उम्मीद: 88 प्रतिशत भारतीय कंपनियां 2030 तक मांग बढ़ने की आशा करती हैं
- मौजूदा स्थिति: करीब 1 प्रतिशत इंजीनियरों के पास ही स्पष्ट रूप से FDE पद है
कौशल सीखने का रास्ता अब भी स्पष्ट नहीं
रिपोर्ट में शामिल आधे से अधिक इंजीनियरों ने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि FDE बनने की शुरुआत कैसे करें। कई लोगों के लिए इस पद की जिम्मेदारियां और करियर का रास्ता अभी अच्छी तरह तय नहीं है। ऐसे में कंपनियों और प्रशिक्षण संस्थानों के सामने कौशल सिखाने के व्यवस्थित अवसर तैयार करने की चुनौती है।
यह रिपोर्ट Scaler और CyberMedia Research ने मिलकर तैयार की। इसमें आठ बड़े शहरों और कुछ छोटे शहरों के 1,000 सॉफ्टवेयर इंजीनियरों तथा कंपनियों के 200 तकनीकी निर्णय लेने वाले अधिकारियों की राय शामिल की गई। इसलिए इसके आंकड़े सर्वे में शामिल लोगों के जवाबों पर आधारित हैं।
FDE बनने के लिए किन क्षमताओं की जरूरत होगी?
FDE की भूमिका में आगे बढ़ने के इच्छुक इंजीनियरों को अपनी तकनीकी जानकारी के साथ समस्या हल करने, ग्राहक से बात करने और किसी समाधान को लागू करने की क्षमता पर भी काम करना होगा। AI और डेटा टूल्स की समझ उपयोगी हो सकती है, लेकिन केवल कोई एक कोर्स पूरा करना नौकरी मिलने की गारंटी नहीं है। सीखने के साथ वास्तविक प्रोजेक्ट पर अभ्यास करना भी जरूरी है।
🧭 तैयारी कैसे करें?
- तकनीकी आधार: प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेयर और AI की बुनियादी समझ मजबूत करें
- प्रोजेक्ट अभ्यास: ऐसी परियोजनाएं बनाएं जो किसी वास्तविक समस्या को हल करें
- ग्राहक की जरूरत: समस्या को ध्यान से समझने और साफ तरीके से समझाने की आदत डालें
- निरंतर सीखना: नौकरी के विवरण देखकर जरूरी कौशल पहचानें और उन्हें चरणबद्ध तरीके से सीखें
भारत के इंजीनियरों के लिए नया अवसर
Scaler की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि FDE भूमिकाओं में रुचि और कंपनियों की संभावित मांग के बीच एक अंतर है। यदि प्रशिक्षण देने वाले संस्थान और नियोक्ता इस अंतर को कम करने के लिए स्पष्ट सीखने के रास्ते बनाते हैं, तो इंजीनियरों को नए तरह के काम के लिए तैयार होने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आने वाले वर्षों में वास्तविक भर्ती कितनी होगी, यह कंपनियों की योजनाओं और तकनीकी जरूरतों पर निर्भर करेगा।
तकनीकी करियर और प्रशिक्षण से जुड़ी जानकारी के लिए Scaler की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है। नौकरी, वेतन या भर्ती की कोई गारंटी नहीं है; आवेदन से पहले कंपनी की आधिकारिक जानकारी जांचें।