FPI Selling: अक्टूबर में ₹31,282 करोड़ की निकासी, बाजार पर दबाव

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर के शुरुआती पांच कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार से 31,282 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। सितंबर में भी इन निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 35,857 करोड़ रुपये की निकासी की थी। लगातार हो रही इस बिकवाली के पीछे महंगाई की चिंता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिकी सरकारी बांड पर बढ़ती ब्याज दर और रुपये में कमजोरी जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं।

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विदेशी निवेशकों की बिकवाली क्यों बढ़ी?

FPI Selling के बीच भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी
FPI Selling बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव

 

विदेशी निवेशकों की बढ़ती बिकवाली ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी बांड बाजार में भी दबाव बना हुआ है। भारत में कमजोर मानसून और अल नीनो के असर से कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं।

कच्चे तेल की ऊंची कीमत भारतीय शेयर बाजार के लिए खास तौर पर चिंता का विषय है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात खर्च बढ़ता है और महंगाई पर भी दबाव आता है। इसके अलावा रुपये की कीमत पर भी असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जिससे भारतीय बाजार को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

📉 विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली

  • अक्टूबर की निकासी: 31,282 करोड़ रुपये
  • सितंबर की निकासी: 35,857 करोड़ रुपये
  • 2026 में कुल निकासी: करीब 2.91 लाख करोड़ रुपये
  • मुख्य चिंता: महंगाई, कच्चा तेल और अमेरिकी ब्याज दर
  • रुपये पर असर: कमजोर रुपये से बाजार की चिंता बढ़ी

अमेरिका और ईरान तनाव से बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार के माहौल को प्रभावित किया है। हाल में अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई से जुड़े विकल्प तैयार करने की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के साथ समझौते को लेकर अपना रुख बदलने की बात कही है। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।

अमेरिकी बांड पर बढ़ी ब्याज दर

अमेरिकी सरकारी बांड पर बढ़ती ब्याज दर भी विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है। दस साल की अमेरिकी सरकारी बांड दर 5.36 प्रतिशत तक पहुंच गई थी और इसके आसपास बनी हुई है। तीस साल की बांड दर भी ऊंचे स्तर पर है। जब अमेरिका में सुरक्षित निवेश से मिलने वाला लाभ बढ़ता है, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बाजार की ओर रुख कर सकते हैं।

महंगाई, सरकारी खर्च और बड़ी कंपनियों की बढ़ती उधारी को लेकर निवेशकों की चिंता भी बनी हुई है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बड़े निवेश के लिए कंपनियों द्वारा लिए जा रहे कर्ज पर बाजार की नजर है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की हालिया बैठक के विवरण से भी संकेत मिला है कि उसके ज्यादातर अधिकारी इस साल एक और ब्याज दर बढ़ाने की संभावना देख रहे हैं।

⚠️ बाजार पर दबाव डालने वाले कारण

  • कच्चा तेल: ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर
  • अमेरिकी बांड: दस साल की बांड दर 5.36 प्रतिशत तक
  • भूराजनीतिक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
  • महंगाई: कमजोर मानसून और अल नीनो से चिंता
  • ब्याज दर: केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख
  • बाजार जोखिम: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

2026 में विदेशी निवेशकों की निकासी 2.91 लाख करोड़ रुपये

अक्टूबर की निकासी को जोड़ने के बाद वर्ष 2026 में भारतीय शेयरों से विदेशी निवेशकों की कुल निकासी करीब 2.91 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यह आंकड़ा वर्ष 2025 में पूरे साल हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी अधिक है। विदेशी निवेशकों के लगातार कमजोर रुख का असर भारतीय बाजार के प्रदर्शन पर भी पड़ा है।

निफ्टी में लगातार आठ सप्ताह की गिरावट

निफ्टी लगातार आठ सप्ताह नीचे बंद हुआ है। यह पिछले 25 वर्षों में उसकी सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला है। वर्ष की शुरुआत से निफ्टी में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। हालांकि घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंड से आने वाले निवेश ने बाजार को कुछ सहारा दिया है। इनके समर्थन के बिना गिरावट और ज्यादा गहरी हो सकती थी।

आगे बाजार में क्या हो सकता है?

बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बांड पर ब्याज दर और रुपये की स्थिति में सुधार आने पर विदेशी निवेशकों का रुख बदल सकता है। इसके साथ ही कंपनियों के मुनाफे में सुधार और घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं। फिलहाल निवेशकों को तेजी के छोटे दौर में जल्दबाजी करने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सावधानी से निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल 1: अक्टूबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कितने रुपये निकाले?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर के शुरुआती पांच कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार से 31,282 करोड़ रुपये निकाले हैं।

सवाल 2: सितंबर में विदेशी निवेशकों ने कितनी निकासी की थी?

सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 35,857 करोड़ रुपये की निकासी की थी।

सवाल 3: 2026 में विदेशी निवेशकों की कुल निकासी कितनी हुई?

अक्टूबर की निकासी को जोड़ने के बाद वर्ष 2026 में भारतीय शेयरों से विदेशी निवेशकों की कुल निकासी करीब 2.91 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

सवाल 4: विदेशी निवेशकों की बिकवाली के प्रमुख कारण क्या हैं?

महंगाई की चिंता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिकी सरकारी बांड पर बढ़ती ब्याज दर, रुपये में कमजोरी और वैश्विक तनाव विदेशी निवेशकों की बिकवाली के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

सवाल 5: निफ्टी में कितने सप्ताह से गिरावट जारी है?

निफ्टी लगातार आठ सप्ताह नीचे बंद हुआ है। यह पिछले 25 वर्षों में उसकी सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखला है।

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अस्वीकरण: यह जानकारी केवल समाचार और सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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