Fynd Report: Festive Shopping में ग्राहकों ने बदली पसंद

भारत में त्योहारों के दौरान ऑनलाइन फैशन खरीदारी में इस बार ग्राहकों ने कम कीमत और उपयोगिता को अधिक महत्व दिया। फाइंड की 2026 की त्योहारी बिक्री रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर के दौरान ऑनलाइन फैशन के आधे से अधिक ऑर्डर 1,000 रुपये से कम मूल्य के थे। हालांकि, महंगे उत्पादों की खरीद संख्या कम रहने के बावजूद कुल बिक्री मूल्य में उनका योगदान काफी अधिक रहा। रिपोर्ट में 65 से अधिक ब्रांडों और आठ प्रमुख ऑनलाइन बाजारों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इससे पता चलता है कि ग्राहक त्योहारों में खरीदारी तो कर रहे हैं, लेकिन खर्च करने से पहले कीमत, जरूरत और उत्पाद की उपयोगिता पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

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त्योहारी खरीदारी में क्या बदलाव आया?

फाइंड की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर-अक्टूबर 2026 के दौरान कुल ऑनलाइन फैशन ऑर्डर में 50.1 प्रतिशत ऑर्डर 1,000 रुपये से कम कीमत वाले थे। दूसरी ओर, 3,000 रुपये से अधिक कीमत वाले उत्पादों का हिस्सा कुल ऑर्डर में केवल 11.8 प्रतिशत रहा, लेकिन इन उत्पादों ने कुल बिक्री मूल्य में 41 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में ग्राहक कम कीमत वाले सामान खरीद रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहक चुनिंदा महंगे उत्पादों पर भी खर्च कर रहे हैं।

यह बदलाव बताता है कि बाजार में केवल छूट देना ही बिक्री बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं है। ग्राहक यह भी देख रहे हैं कि उत्पाद उनके रोजमर्रा के उपयोग में कितना काम आएगा। कपड़े, जूते और फैशन से जुड़े सामान खरीदते समय कीमत के साथ टिकाऊपन, डिजाइन और उपयोगिता का महत्व बढ़ा है। यह रुझान खुदरा कंपनियों के लिए अपनी उत्पाद रणनीति और कीमत तय करने में उपयोगी संकेत दे सकता है।

रिपोर्ट में मिंत्रा, फ्लिपकार्ट, अमेजन, अजियो, नायका, जियोमार्ट, टाटा क्लिक और टाटा क्लिक लग्जरी जैसे आठ ऑनलाइन बाजारों पर 65 से अधिक ब्रांडों की बिक्री का विश्लेषण शामिल है। इसमें कपड़े, जूते और फैशन से जुड़े अन्य सामानों के ऑर्डर का अध्ययन किया गया। इसलिए आंकड़े पूरे भारतीय खुदरा बाजार का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि रिपोर्ट में शामिल ऑनलाइन फैशन कारोबार की तस्वीर दिखाते हैं।

🛍️ रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े

  • 1,000 रुपये से कम के ऑर्डर: 50.1 प्रतिशत
  • 3,000 रुपये से अधिक के ऑर्डर: 11.8 प्रतिशत
  • महंगे ऑर्डर का बिक्री मूल्य में योगदान: 41 प्रतिशत से अधिक
  • अध्ययन में शामिल ब्रांड: 65 से अधिक
  • ऑनलाइन बाजार: आठ

जूते बने ऑनलाइन फैशन की सबसे बड़ी श्रेणी

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि त्योहारों के दौरान ऑनलाइन फैशन ऑर्डर में जूतों की हिस्सेदारी कपड़ों से आगे निकल गई। जूतों ने कुल ऑर्डर में 52.7 प्रतिशत और बिक्री मूल्य में 58.4 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की। पिछले वर्ष ऑर्डर में जूतों का हिस्सा लगभग 33 प्रतिशत था। इसके मुकाबले कपड़ों की हिस्सेदारी 2025 के 48 प्रतिशत से घटकर 2026 में 34.5 प्रतिशत रह गई।

इस बदलाव के पीछे रोजमर्रा के उपयोग और जरूरत को प्राथमिकता देना एक संभावित कारण हो सकता है। जूते त्योहारों के अलावा काम, यात्रा और दैनिक गतिविधियों में भी उपयोग किए जाते हैं। वहीं, कुछ ग्राहक कपड़ों की खरीद को टाल सकते हैं या पहले से मौजूद सामान का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि रिपोर्ट केवल खरीदारी के आंकड़े दिखाती है, यह हर ग्राहक के निर्णय का कारण अलग से साबित नहीं करती।

जूते बनाने और बेचने वाली कंपनियों के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण हो सकता है। वे अपने उत्पादों की उपलब्धता, आकार, कीमत और वितरण व्यवस्था पर अधिक ध्यान दे सकती हैं। कपड़ों के कारोबार में कंपनियों को ग्राहकों की बदलती पसंद समझनी होगी। किसी एक त्योहारी अवधि के आधार पर लंबे समय की मांग तय नहीं की जा सकती, लेकिन लगातार ऐसे आंकड़ों से बाजार की दिशा समझने में मदद मिल सकती है।

छूट बढ़ी, फिर भी ग्राहक सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के त्योहारी मौसम में औसत छूट 46 प्रतिशत रही, जबकि 2025 में यह 34 प्रतिशत थी। लगभग आधे ऑर्डर ऐसे थे जिन पर 50 प्रतिशत से अधिक छूट दी गई। इसके बावजूद ग्राहकों ने बिना सोचे-समझे खरीदारी नहीं की। कम कीमत वाले ऑर्डर की अधिक हिस्सेदारी बताती है कि छूट के साथ बजट पर नियंत्रण भी खरीदारी का अहम हिस्सा रहा।

बड़ी छूट का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि ग्राहक को उतना ही वास्तविक लाभ मिला। खरीदारी करने वालों को उत्पाद की मूल कीमत, दूसरे विक्रेताओं के दाम, वापसी की शर्तें और वारंटी जैसी बातों की जांच करनी चाहिए। त्योहारों में आकर्षक विज्ञापन और सीमित समय की पेशकश खरीदारी का दबाव बढ़ा सकती हैं। जरूरत के अनुसार खरीदना और कुल खर्च का हिसाब रखना उपभोक्ता के लिए बेहतर तरीका है।

कंपनियों के लिए अधिक छूट बिक्री बढ़ाने का साधन हो सकती है, लेकिन इससे लाभ का अंतर भी प्रभावित हो सकता है। यदि ग्राहक केवल भारी छूट के समय खरीदारी करते हैं, तो ब्रांडों को नियमित बिक्री बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए खुदरा कारोबार को कीमत, उत्पाद गुणवत्ता और ग्राहक अनुभव के बीच संतुलन बनाना होगा।

📌 ऑनलाइन खरीदारी से पहले ध्यान दें

  • केवल छूट देखकर सामान न खरीदें, जरूरत की जांच करें।
  • अलग-अलग विक्रेताओं पर कीमत की तुलना करें।
  • आकार, सामग्री और वापसी की शर्तें पढ़ें।
  • महंगे सामान के लिए वारंटी और विक्रेता की जानकारी देखें।
  • कुल बजट तय करके उसी के अनुसार खरीदारी करें।

छोटे शहरों और पूर्वी भारत में ऑनलाइन मांग

रिपोर्ट में छोटे शहरों की बढ़ती भागीदारी भी सामने आई है। टियर-दो शहरों से आने वाले ऑनलाइन फैशन ऑर्डर की हिस्सेदारी 2025 में लगभग 19 प्रतिशत थी, जो 2026 में बढ़कर करीब 35 प्रतिशत हो गई। इससे संकेत मिलता है कि ऑनलाइन खरीदारी अब बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। छोटे शहरों में इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और घर तक सामान पहुंचाने की सुविधाओं के विस्तार से ग्राहक अधिक विकल्पों तक पहुंच पा रहे हैं।

पूर्वी भारत ने भी रिपोर्ट में उल्लेखनीय हिस्सेदारी दर्ज की। कुल ऑर्डर में इस क्षेत्र का योगदान 20.8 प्रतिशत रहा और पश्चिम बंगाल देश के बड़े ऑर्डर देने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। यह रुझान पूर्वी भारत के खुदरा बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। कंपनियों को स्थानीय पसंद, मौसम, भाषा और वितरण की जरूरतों को समझकर अपनी सेवाएँ बेहतर करनी होंगी।

बड़े शहरों की भूमिका भी मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, टियर-एक शहरों ने कुल ऑर्डर में लगभग 43 प्रतिशत हिस्सेदारी रखी, लेकिन कुल बिक्री मूल्य में उनका योगदान 56 प्रतिशत रहा। इसका मतलब है कि इन शहरों में औसतन अधिक कीमत वाले उत्पादों की खरीदारी का हिस्सा बड़ा है। दूसरी ओर, छोटे शहरों में ऑर्डर संख्या बढ़ने से कंपनियों को नए ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।

ऑनलाइन बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के संकेत

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मिंत्रा और फ्लिपकार्ट की संयुक्त हिस्सेदारी 2025 के 89 प्रतिशत से घटकर 2026 में 76.8 प्रतिशत रह गई। अजियो, अमेजन और जियोमार्ट जैसे मंचों की हिस्सेदारी बढ़ी। यह बदलाव दिखाता है कि फैशन खरीदारी में ग्राहकों के पास विकल्प बढ़ रहे हैं। विक्रेता और ब्रांड अलग-अलग मंचों पर अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑनलाइन भुगतान का हिस्सा कुल ऑर्डर में 56.5 प्रतिशत रहा। इससे पता चलता है कि डिजिटल भुगतान फैशन खरीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। रिपोर्ट में कुल वापसी दर 11.8 प्रतिशत बताई गई। कपड़ों में वापसी दर 14.9 प्रतिशत रही, जबकि जूतों में यह 10.5 प्रतिशत थी। कपड़ों के आकार और फिट को लेकर ग्राहक की अपेक्षा पूरी न होने पर वापसी बढ़ सकती है। कंपनियों के लिए सही आकार की जानकारी, उत्पाद की स्पष्ट तस्वीर और विवरण देना जरूरी है।

ब्रांड और उपभोक्ताओं के लिए रिपोर्ट का महत्व

ब्रांडों के लिए इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यह है कि ग्राहक केवल प्रचार से प्रभावित नहीं होते। वे कीमत, उपयोगिता और भरोसे को साथ देखकर खरीदारी कर रहे हैं। कंपनियों को सस्ती श्रेणी में पर्याप्त विकल्प रखने के साथ ऐसे उत्पाद भी पेश करने होंगे जिनके लिए ग्राहक अधिक खर्च करने को तैयार हों। आपूर्ति और भंडार का सही प्रबंधन भी जरूरी होगा, ताकि लोकप्रिय आकार या उत्पाद समय पर उपलब्ध रहें।

उपभोक्ताओं के लिए ये आंकड़े बाजार की सामान्य दिशा समझने में मदद करते हैं, लेकिन खरीदारी का निर्णय अपनी जरूरत और बजट के आधार पर लेना चाहिए। किसी रिपोर्ट में जूतों की मांग बढ़ने का अर्थ यह नहीं कि हर ग्राहक को जूते खरीदने चाहिए। इसी तरह कम कीमत वाले ऑर्डर की अधिक हिस्सेदारी यह साबित नहीं करती कि महंगे उत्पादों की मांग खत्म हो गई है। आंकड़ों का सही अर्थ समझना जरूरी है।

खुदरा कंपनियों के लिए बदलती मांग का संकेत

त्योहारी मौसम में बिक्री बढ़ने के बावजूद ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल सकती है। कंपनियों को केवल पिछले साल की बिक्री के आधार पर इस साल का भंडार तय करने के बजाय नए आंकड़ों, शहरों की मांग और उत्पाद श्रेणी के अनुसार योजना बनानी चाहिए। यदि किसी खास आकार या डिजाइन की मांग अधिक है और वह समय पर उपलब्ध नहीं होता, तो ग्राहक दूसरे ब्रांड या मंच की ओर जा सकता है। इसके उलट जरूरत से ज्यादा सामान रखने पर छूट बढ़ानी पड़ सकती है और लाभ पर दबाव आ सकता है।

ऑनलाइन खरीदारी में उत्पाद का विवरण और सही तस्वीर भी महत्वपूर्ण हैं। कपड़ों और जूतों में आकार, फिट और सामग्री की स्पष्ट जानकारी देने से गलत खरीद और वापसी कम हो सकती है। रिपोर्ट में कपड़ों की वापसी दर जूतों से अधिक बताई गई है, इसलिए कपड़ों के विक्रेताओं के लिए आकार संबंधी जानकारी बेहतर करना उपयोगी कदम हो सकता है। ग्राहक समीक्षाओं और खरीदारी के बाद मिलने वाली प्रतिक्रिया से भी ब्रांड अपनी सूची में सुधार कर सकते हैं।

छोटे शहरों में ऑर्डर की हिस्सेदारी बढ़ने से वितरण नेटवर्क की जरूरत भी बदलती है। कंपनियों को ऐसे क्षेत्रों में सामान की उपलब्धता, स्थानीय वितरण साझेदार और वापसी की सुविधा पर ध्यान देना होगा। ग्राहक को सामान समय पर और सही स्थिति में मिलना भी कीमत जितना ही महत्वपूर्ण है। इस तरह रिपोर्ट केवल खरीदारी की पसंद नहीं, बल्कि खुदरा कंपनियों की आपूर्ति और ग्राहक सेवा के लिए भी संकेत देती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. फाइंड की त्योहारी रिपोर्ट में कितने ऑर्डर 1,000 रुपये से कम थे?

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान ऑनलाइन फैशन के कुल ऑर्डर में 50.1 प्रतिशत ऑर्डर 1,000 रुपये से कम मूल्य के थे। इससे पता चलता है कि ग्राहकों ने कम कीमत वाले विकल्पों को अधिक प्राथमिकता दी।

2. क्या महंगे फैशन उत्पादों की मांग पूरी तरह कम हो गई?

नहीं। 3,000 रुपये से अधिक कीमत वाले उत्पाद कुल ऑर्डर में केवल 11.8 प्रतिशत थे, लेकिन उन्होंने कुल बिक्री मूल्य में 41 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। इसका मतलब है कि कुछ ग्राहक चुनिंदा महंगे उत्पादों पर खर्च कर रहे हैं।

3. ऑनलाइन फैशन में किस श्रेणी की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही?

रिपोर्ट में जूतों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। जूतों ने कुल ऑनलाइन फैशन ऑर्डर में 52.7 प्रतिशत और बिक्री मूल्य में 58.4 प्रतिशत योगदान दिया। कपड़ों की ऑर्डर हिस्सेदारी घटकर 34.5 प्रतिशत रह गई।

4. छोटे शहरों से ऑनलाइन खरीदारी कितनी बढ़ी?

रिपोर्ट के अनुसार, टियर-दो शहरों की ऑनलाइन फैशन ऑर्डर हिस्सेदारी 2025 के लगभग 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में करीब 35 प्रतिशत हो गई। यह छोटे शहरों में डिजिटल खरीदारी के बढ़ते उपयोग का संकेत है।

5. क्या रिपोर्ट पूरे भारतीय खुदरा बाजार का प्रतिनिधित्व करती है?

यह रिपोर्ट 65 से अधिक ब्रांडों और आठ ऑनलाइन बाजारों पर उपलब्ध फैशन बिक्री के आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए इसे पूरे भारतीय खुदरा बाजार का संपूर्ण सर्वेक्षण नहीं मानना चाहिए। यह ऑनलाइन फैशन खरीदारी के रुझान दिखाती है।

निष्कर्ष

त्योहारी खरीदारी के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ग्राहक अब कीमत और उपयोगिता को अधिक महत्व दे रहे हैं। छोटे शहरों की भागीदारी और जूतों की बढ़ती मांग ब्रांडों के लिए नए अवसर हैं, लेकिन टिकाऊ सफलता ग्राहक के भरोसे पर निर्भर करेगी।

अस्वीकरण: यह लेख फाइंड की प्रकाशित रिपोर्ट और उपलब्ध विवरण पर आधारित है। आंकड़े रिपोर्ट में शामिल मंचों तक सीमित हैं।

आधिकारिक स्रोत: फाइंड की त्योहारी बिक्री रिपोर्ट 2026। संबंधित खबरों के लिए दिवाली से पहले डी2सी बिक्री और ऑनलाइन त्योहारी बिक्री में सुस्ती पढ़ें।

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Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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