भारत में त्योहारों से पहले सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाले ब्रांडों की ऑनलाइन बिक्री में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ClickPost की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष दिवाली से पहले रोजाना भेजे गए ऑर्डर पिछले साल की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक रहे, जबकि सामान की कुल बिक्री कीमत लगभग 45 प्रतिशत बढ़ी। रिपोर्ट में करीब 400 ब्रांडों की वेबसाइटों पर आए 8 करोड़ से अधिक ऑर्डरों का विश्लेषण किया गया। इससे पता चलता है कि खरीदारी की संख्या के साथ ग्राहकों के खर्च का स्तर भी बढ़ा।
D2C Diwali Orders में 27% की बढ़ोतरी कैसे हुई?
ClickPost की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल 20 सितंबर से 5 नवंबर के बीच के त्योहार खरीदारी काल की तुलना पिछले वर्ष 1 सितंबर से 17 अक्टूबर की अवधि से की गई। इन अलग-अलग तारीखों को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि दोनों वर्षों में त्योहारों का कैलेंडर एक जैसा नहीं था। रिपोर्ट ने करीब 400 सीधे ग्राहक तक पहुंचने वाले ब्रांडों की वेबसाइटों से मिले 8 करोड़ से ज्यादा ऑर्डरों को शामिल किया।
रिपोर्ट में रोजाना भेजे गए ऑर्डरों की संख्या में 27 प्रतिशत वृद्धि बताई गई। वहीं सामान की कुल बिक्री कीमत लगभग 45 प्रतिशत बढ़ी। इसका अर्थ है कि कुल बिक्री मूल्य की वृद्धि ऑर्डर संख्या से काफी तेज रही। रिपोर्ट के अनुसार कुल बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी ऑर्डर की संख्या के मुकाबले करीब 1.7 गुना तेजी से हुई।
इस अंतर का एक कारण ग्राहकों द्वारा अधिक कीमत वाले उत्पाद खरीदना बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार खरीदारी का खर्च महंगे फैशन उत्पादों, त्वचा देखभाल, स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी वस्तुओं तथा आभूषणों जैसी श्रेणियों में केंद्रित रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं ने केवल कम कीमत वाले सामान पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि कुछ श्रेणियों में अधिक मूल्य के उत्पाद भी खरीदे।
कौन-सी उत्पाद श्रेणियों में मांग मजबूत रही?
सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़े उत्पादों में ऑर्डरों की संख्या सभी शहर श्रेणियों में 33 से 39 प्रतिशत तक बढ़ी। फैशन उत्पादों के ऑर्डर छोटे शहरों में भी बढ़े। तीसरी श्रेणी के शहरों में फैशन ऑर्डर लगभग 33 प्रतिशत बढ़े, जबकि दूसरी श्रेणी के शहरों और बड़े महानगरों में करीब 29 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
आभूषण त्योहारों के दौरान उपहार देने की प्रमुख श्रेणियों में बने रहे। रिपोर्ट के अनुसार पहले से भुगतान किए गए आभूषण ऑर्डर का औसत मूल्य 7.4 प्रतिशत बढ़कर ₹5,773 हो गया। स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े उत्पादों में पहले से भुगतान किए गए ऑर्डर का औसत मूल्य 11.1 प्रतिशत बढ़कर ₹936 रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग श्रेणियों में ग्राहकों का खर्च एक समान नहीं रहा।
🛍️ दिवाली बिक्री के मुख्य आंकड़े
- ऑर्डर में वृद्धि: रोजाना 27 प्रतिशत
- कुल बिक्री मूल्य: लगभग 45 प्रतिशत अधिक
- विश्लेषण: करीब 400 ब्रांड और 8 करोड़ से ज्यादा ऑर्डर
- आभूषण ऑर्डर का औसत मूल्य: ₹5,773
- समय पर डिलीवरी: छोटे शहर 83 प्रतिशत, महानगर 78 प्रतिशत
- औसत डिलीवरी समय: तीन दिन से घटकर करीब ढाई दिन
छोटे शहरों में डिलीवरी का प्रदर्शन बेहतर क्यों रहा?
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में डिलीवरी की समयबद्धता महानगरों से बेहतर रही। इन शहरों में 83 प्रतिशत त्योहार ऑर्डर समय पर पहुंचे, जबकि पहली श्रेणी के महानगरों में यह आंकड़ा 78 प्रतिशत था। तीसरी श्रेणी के शहरों में समय पर डिलीवरी का अनुपात पिछले वर्ष के 74 प्रतिशत से बढ़कर इस बार 83 प्रतिशत हो गया।
यह बदलाव छोटे शहरों में आपूर्ति व्यवस्था के बेहतर होने का संकेत देता है। पहले कई ब्रांडों के लिए महानगरों से बाहर सामान पहुंचाना अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता था। लेकिन स्थानीय वितरण केंद्र, बेहतर परिवहन योजना और पार्सल की स्थिति पर नजर रखने वाली प्रणालियों से दूरी और समय की समस्या कम हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में औसत डिलीवरी समय तीन दिन से घटकर लगभग ढाई दिन रह गया।
हालांकि, इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि हर छोटे शहर में हर ऑर्डर महानगरों से जल्दी पहुंचा। रिपोर्ट औसत अनुपात दिखाती है। किसी विशेष ग्राहक का अनुभव उसके पते, विक्रेता के गोदाम, चुनी गई सेवा और स्थानीय वितरण क्षमता पर निर्भर करेगा। फिर भी छोटे शहरों में समय पर डिलीवरी का बेहतर आंकड़ा ई-कॉमर्स कारोबार के विस्तार के लिए सकारात्मक संकेत है।
विफल डिलीवरी और वापस लौटे पार्सल में कमी
रिपोर्ट के अनुसार सामान पहुंचाने की पहली कोशिश में असफल रहने वाले ऑर्डरों का हिस्सा पिछले साल के 22 प्रतिशत से घटकर 21 प्रतिशत हुआ। बिना ग्राहक तक पहुंचे विक्रेता के पास लौटने वाले पार्सलों का अनुपात भी 11 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रहा। बदलाव एक प्रतिशत अंक का है, लेकिन बड़े ऑर्डर आधार पर इसका असर महत्वपूर्ण हो सकता है।
किसी पार्सल का ग्राहक तक न पहुंचना विक्रेता और वितरण कंपनी दोनों के लिए अतिरिक्त खर्च पैदा करता है। दोबारा डिलीवरी की कोशिश, ग्राहक से संपर्क, माल की वापसी और दोबारा भंडारण में समय और संसाधन लगते हैं। इसलिए असफल डिलीवरी और लौटे पार्सल कम होना कारोबार की लागत और ग्राहक अनुभव दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।
रिपोर्ट में ब्रांडों की अपनी वेबसाइटों और ऐप पर स्थानीय स्तर पर तेजी से सामान पहुंचाने वाली सेवाओं का हिस्सा भी बढ़ा। ऐसे ऑर्डरों का अनुपात पिछले साल के 2.6 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत हो गया। इसका अर्थ है कि कुछ ब्रांड अपने ग्राहक को सीधे और कम समय में सामान पहुंचाने के विकल्प बढ़ा रहे हैं।
📦 ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए संकेत
- ग्राहक खर्च: अधिक मूल्य वाले सामान की मांग बढ़ी
- छोटे शहर: समय पर डिलीवरी का अनुपात बेहतर रहा
- लौटते पार्सल: अनुपात 11 से घटकर 10 प्रतिशत
- स्थानीय डिलीवरी: ब्रांड के अपने मंच पर 5 प्रतिशत तक पहुंची
- मुख्य जरूरत: सही पैकिंग, समय पर भेजना और ग्राहक को जानकारी देना
छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए रिपोर्ट का मतलब
छोटे ब्रांडों के लिए त्योहारों का मौसम बिक्री बढ़ाने का अवसर होता है, लेकिन अधिक ऑर्डर मिलने के साथ संचालन की कठिनाइयां भी बढ़ती हैं। यदि विक्रेता के पास पर्याप्त पैकिंग सामग्री, सही आकार के डिब्बे, स्टॉक की जानकारी और समय पर पार्सल उठाने की व्यवस्था नहीं है तो ऑर्डर बढ़ने के बावजूद ग्राहक को सामान देर से मिल सकता है। ऐसे में बिक्री का अच्छा आंकड़ा ग्राहक संतुष्टि में नहीं बदल पाता।
व्यवसायों को मांग का अनुमान लगाकर लोकप्रिय उत्पादों का पर्याप्त भंडार रखना चाहिए। साथ ही, ऑर्डर की पुष्टि, पैकिंग, पता जांच और पार्सल भेजने की प्रक्रिया में स्पष्ट जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। लौटे हुए सामान की वजह समझना भी जरूरी है। यदि किसी इलाके में पते की गलती या ग्राहक की अनुपलब्धता बार-बार सामने आती है, तो विक्रेता डिलीवरी से पहले पुष्टि का तरीका बेहतर कर सकता है।
रिपोर्ट में शामिल आंकड़े सभी भारतीय ऑनलाइन कारोबारों की पूरी तस्वीर नहीं हैं। यह करीब 400 ब्रांडों की वेबसाइटों से लिए गए ऑर्डरों का विश्लेषण है। इसलिए इसे पूरे बाजार का सरकारी सर्वेक्षण नहीं समझना चाहिए। इसके बावजूद यह त्योहारी खरीदारी, ग्राहक खर्च और डिलीवरी व्यवस्था के बारे में उपयोगी संकेत देता है।
छोटे कारोबारों से जुड़ी एक अन्य खबर में WealthScopeNews ने छोटे रेस्तरां के लिए मुफ्त बिलिंग सुविधा की जानकारी दी थी। रिपोर्ट का मूल विवरण Business Standard की खबर में पढ़ा जा सकता है।
ऑनलाइन विक्रेता पैकिंग के लिए ई-कॉमर्स पैकिंग सामग्री भी देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. दिवाली से पहले ऑनलाइन ब्रांडों के ऑर्डर कितने बढ़े?
ClickPost की रिपोर्ट के अनुसार इस साल दिवाली से पहले सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाले ब्रांडों के रोजाना भेजे गए ऑर्डर पिछले साल की तुलना में 27 प्रतिशत बढ़े। अध्ययन में करीब 400 ब्रांडों की वेबसाइटों से 8 करोड़ से ज्यादा ऑर्डरों का विश्लेषण किया गया।
2. ऑनलाइन बिक्री का कुल मूल्य 45 प्रतिशत क्यों बढ़ा?
रिपोर्ट के अनुसार ग्राहकों ने महंगे फैशन, त्वचा देखभाल, स्वास्थ्य, पोषण और आभूषण जैसे उत्पादों पर अधिक खर्च किया। इस कारण कुल बिक्री मूल्य ऑर्डर संख्या की तुलना में तेजी से बढ़ा। रिपोर्ट ने इसे खरीदारी के औसत मूल्य में बदलाव से जोड़ा है।
3. छोटे शहरों में डिलीवरी का प्रदर्शन कैसा रहा?
दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में 83 प्रतिशत त्योहार ऑर्डर समय पर पहुंचे। महानगरों में यह अनुपात 78 प्रतिशत रहा। तीसरी श्रेणी के शहरों में समय पर डिलीवरी पिछले वर्ष के 74 प्रतिशत से बढ़कर 83 प्रतिशत हो गई।
4. लौटकर विक्रेता के पास आने वाले पार्सल कितने घटे?
रिपोर्ट में बिना ग्राहक तक पहुंचे विक्रेता के पास लौटने वाले पार्सलों का अनुपात पिछले वर्ष के 11 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत बताया गया। पहली कोशिश में असफल डिलीवरी भी 22 प्रतिशत से कम होकर 21 प्रतिशत रही।
5. छोटे ऑनलाइन विक्रेता इस रिपोर्ट से क्या सीख सकते हैं?
विक्रेताओं को त्योहारों से पहले स्टॉक, पैकिंग, ग्राहक पते और पार्सल उठाने की व्यवस्था तैयार रखनी चाहिए। समय पर भेजना, सही जानकारी देना और लौटे हुए पार्सलों के कारण समझना जरूरी है। इससे अतिरिक्त खर्च घटाने और ग्राहक अनुभव बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
त्योहारी मौसम में ऑनलाइन ब्रांडों के ऑर्डर और बिक्री मूल्य दोनों बढ़े। छोटे शहरों में डिलीवरी का प्रदर्शन भी बेहतर रहा। कारोबारों के लिए अब चुनौती इस मांग को भरोसेमंद सेवा और नियंत्रित लागत में बदलने की है।
अस्वीकरण: यह लेख एक निजी कंपनी की रिपोर्ट और प्रकाशित समाचार पर आधारित है। आंकड़े सभी विक्रेताओं पर लागू नहीं माने जाने चाहिए।
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